कलाम ने जब दिया था कम्प्यूटर पर हिन्दी में काम करने का मंत्र

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लगभग दो बार भोपाल यात्रा पर आए थे। इस दौरान उन्होंने गैस पीडि़तों और स्कूल के बच्चों के साथ समय बिताया था।

भोपाल। 15 अक्टूबर को पूरा देश डॉ. कलाम को याद कर रहा है। उन्हें हम सबने 27 जुलाई 2015 को खो दिया। मिसाइल मैन और बच्चों के प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर जाने जाने वाले डॉ. कलाम का भोपाल से भी नाता रहा है। खास तौर पर यहां के बच्चों और गैस पीडि़तों के प्रति डॉ. कलाम का असीम प्रेम था।





डॉ. कलाम 2012 में प्रशासन अकादमी में आयोजित हुए लैंग्वेज कम्प्यूटिंग कार्यशाला में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों से कहा था कि कम्प्यूटर के जरिए असीम ज्ञान पाया जा सकता है। इसमें भाषा कभी भी आड़े नहीं आएगी। यह पहला मौका था जब उन्होंने शासकीय स्कूल के बच्चों को हिन्दी में कम्प्यूटर के इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। ताकि बच्चे न केवल तकनीक से जुड़े बल्कि अपनी भाषा से भी जुड़ाव महसूस करें।


इसके पहले वे साल 2002 में भी भोपाल आ चुके थे। इस दौरान उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी का शिकार हुए परिवार के लोगों से मुलाकात की थी। गैस पीडि़तों के लिए की गई शासकीय मदद, स्वयं सेवी संगठनों से मुलाकात और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का जायजा भी लिया था। यह वही दौर था जब एक बार फिर गैस त्रासदी के जिम्मेदारों को सजा मिलने की आज बंधनी शुरू हुई थी।






ऐसा था कलाम का सफर
15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वर में जन्मे डॉ. कलाम ने मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में योग्यता हासिल की। भारत के मिसाइल मैन के रूप में विख्यात डॉ. कलाम अग्नि और पृथ्वी मिसाइल के सफल निमाज़्ण एवं परिचालन के लिए प्रसिद्ध रहे। देश में पहले सेटेलाइट प्रक्षेपण यान के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।





डॉ. कलाम भारत के रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे। वर्ष 1992-99 की अवधि में रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग में सचिव रहे। डॉ. कलाम द्वारा मिसाइल पद्धति विकसित की गई और पोखरण-दो परमाणु परीक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। डॉ. कलाम द्वारा इंडिया मिलेनियम मिशन-2020 की शुरुआत भी की गई। वे एक ऐसे महापुरुष थे जिनके पास भारत के विकास को लेकर व्यापक दृष्टि एवं सोच थी।





एक साहित्यकार के रूप में डॉ. कलाम द्वारा विंग्स ऑफ फायर इंडिया 2020-ए विजन फॅार द न्यू मिलेनियम, माय जर्नी, इग्नाइटेड माइन्ड्स-अनलिशिंग द पावर विदिन इंडिया जैसी विश्व प्रसिद्ध कृतियों का लेखन किया गया। डॉ. कलाम देश के युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित करते हुए समाज में परिवर्तन लाना चाहते थे।





डॉ. कलाम को 48 विश्वविद्यालय से मानद डाक्टरेट की उपाधि सहित कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें वषज़् 1997 में देश का सवोज़्च्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया था। डॉ. कलाम सही मायने में अजातशत्रु व्यक्तित्व को साकार करते थे। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से होते हुए भी व्यक्ति अपनी प्रतिभा और परिश्रम से देश के सर्वोच्च पद पर पहुँच सकता है, डॉ. कलाम इसके सर्वश्रेष्ठ उदाहरण थे। डॉ कलाम वर्ष 2002 से 2007 तक देश के 11वें राष्ट्रपति रहे। 27 जुलाई 2015 को मेघालय में शिलांग के बैथानी अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली।





Brajendra Sarvariya
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