सरकार के किसान सम्मेलन पर कांग्रेस का बड़ा सवाल, कहा जख्मों पर पर्दा डालने की कोशिश

किसानों को भावांतर योजना से लाभ पहुंचाने का दावा करने को कांग्रेस ने झूठा करार देते हुए सीएम शिवराज पर कई सवाल दागे।

By: rishi upadhyay

Published: 10 Feb 2018, 04:11 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने एक बार फिर सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला है। किसानों को भावांतर योजना से लाभ पहुंचाने का दावा करने को अरुण यादव ने झूठा करार देते हुए सीएम शिवराज पर कई सवाल दागे। इतना ही नहीं उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को कथित किसान पुत्र कहते हुए मांग है कि किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की जाए।


चुनावी मौसम में जहां भाजपा पहले ही किसानों को राहत पहुंचाने का दावा करती नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रदेश में किसानों की संपूर्ण ऋण माफी की मांग एक बार पुनः दोहराते हुए भोपाल में 12 फरवरी को होने जा रहे किसान सम्मेलन को लेकर सवाल उठाए हैं। यादव ने कहा कि प्रदेश के बर्बाद हो चुके किसानों को बहलाने, पिछले 14 वर्षों में 29 हजार किसानों की आत्महत्या और मंदसौर में पुलिस की गोली से शहीद हुए किसानों के असहनीय जख्मों पर पर्दा डालने की कोशिश है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के सवाल आगामी किसान सम्मेलन पर ही केन्द्रित थे। उन्होंने इस सम्मेलन में हो रहे सरकारी खर्च, प्रदेश भर की 5 हजार बसों के अनाधिकृत अधिग्रहण की निंदा करते हुए कहा सीएम शिवराजसिंह चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के जरिए किसानों से धोखा किया है। उन्होंने आगे कहा कि इस योजना के माध्यम से सरकार, चुनिंदा नौकरशाह और मुनाफाखोर व्यापारियों के एक कुत्सित गठबंधन ने एक बड़ा आर्थिक खेल खेला है, जिससे किसानों का कोई भला होने वाला नहीं है।

किसान सम्मेलन के आयोजन से पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने प्रेस कान्फ्रेंस के जरिए सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं। अरुण यादव ने पूछा है कि -

- भावांतर भुगतान योजना के माध्यम से राज्य सरकार किसानों द्वारा उत्पादित संपूर्ण फसल समर्थन मूल्य पर खरीदने से क्यों बच रही है?

- जिस योजना का भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन सहित अन्य भाजपा नेताओं ने ही सार्वजनिक विरोध किया है, वह गलत है या सही?

- इस योजना के अनुसार किसानों द्वारा उत्पादित प्रति हेक्टेयर फसल व योजना के अंतर्गत किसानों को किये जाने वाला भुगतान प्रतिबंधित व प्रति हेक्टेयर तक सीमित क्यों कर दिया गया?

- मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा था कि भावांतर का भुगतान 15 दिसम्बर, 17 तक कर दिया जायेगा, यह भुगतान कितना होगा, कब-कैसे होगा, अनिश्चित है। पूर्व में प्याज, उड़द, मूंग, तुअर की फसल समर्थन मूल्य पर बेचने वाले संपूर्ण किसानों का भुगतान आज तक क्यों नहीं किया गया?

- शासन द्वारा योजना के अंतर्गत भुगतान की अंतिम सीमा 15 दिसम्बर, 17 तय क्यों की गई, जबकि इस समय तक तो किसान रबी की फसल के लिए बोबनी में व्यस्त रहता है, इसके पीछे क्या षड्यंत्र था?

- इस योजना के अनुसार शासन द्वारा प्रदेश के बाहर की दो मंड़ी व प्रदेश की अन्य मंडियों का अधिकतम औसत भाव निकालकर मॉडल विक्रय दर क्रय की जायेगी, इसमें शासन की मंशा दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिकतम औसत के स्थान पर निम्न औसत व समर्थन मूल्य के भीतर का भुगतार किसानों को करना चाहिए, ताकि वह किसान मंड़ी के व्यापारियों से बच सकेगा, किंतु ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

- किसानों द्वारा उत्पादित फसल का औसत फसल कटाई प्रयोगों पर आधारित उत्पादकता के आधार पर तय किया जायेगा, जो प्राकृतिक आपदा के समय निम्नतम औसत होता है, क्या यह किसानों के साथ धोखा नहीं है?

- किसानों को फसल नुकसानी पर शासन से मिलने वाला मुआवजा बंद क्यों है?

- बीमा क्लेम राशि को डीएलटीसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल टेक्निकल कमेटी) ऋण मान से सीमित कर दिया गया है। ऋण मान का निर्धारण किसान हितों के विपरीत है, जो किसान द्वारा लिये गये ऋण का 20 फीसदी तक ही होता है, ऐसा क्यों?

- भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र-2014 व स्वामी नाथन कमेटी की सिफारिशों के ही विपरीत सरकार का किसान विरोधी आचरण क्या कहा जायेगा, जब उसने इन आधारों पर कहा था कि किसानों की प्रति हेक्टेयर लागत में 50 प्रतिशत लाभांश जोड़कर समर्थन मूल्य निर्धारित किया जायेगा, किंतु नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रति हेक्टेयर किसान की कुल आय को 50 प्रतिशत कम कर बीमित राशि डीएलटीसी द्वारा निर्धारित करने का आदेश है।

- पूर्व में ऋणदाता किसानों को अपने कुल कृषि ऋण का 3.5 प्रतिशत बीमा प्रीमियम लिया जाता था, अब डीएलटीसी ऋण के हिसाब से उसे 12 प्रतिशत क्यों वसूला जा रहा है?

- पूर्व में फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदा के कारण फसल की क्षति होने का सर्वे शासन द्वारा कराया जाता था और नुकसानी के आधार पर बीमा क्लेम की राशि निर्धारित की जाती थी, किंतु अब किसान की फसल खराब होने पर उसे स्वयं वित्तदायी बैंक, फसल बीमा कंपनी, कृषि विभाग के अधिकारियों व जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर सूचित किये जाने की बाध्यता निश्चित कर दी गई है, अन्यथा वह किसान क्लेम राशि पाने से वंचित हो जायेगा, यह किसानों की भलाई के लिए किया गया या उन्हें प्रताड़ना देने के लिए?

- पूर्व निर्धारित मापदण्ड के हिसाब से हर जिले में किसानों को होने वाली फसल नुकसानी का मूल्यांकन सर्वे करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाना था, जो अभी तक क्यों नहीं हुआ, इसके पीछे क्या कारण है?

- यदि कृषि उत्पाद की बिक्री मूल्य अधिसूचित कीमत से अधिक है, लेकिन एमएसपी से कम है, बिक्री मूल्य और एमएसपी के बीच का अंतर उनके बैंक खाते में सीधे जमा करने का प्रावधान था, किंतु मैदानी स्तर पर इस तरह की प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा रहा है, क्यों?

 

केन्द्र सरकार पहले ही अपने बजट के जरिए किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सौगातों की बरसात कर चुकी है। माना जा रहा है कि इस साल कई राज्यों में चुनाव के देखते हुए ये बजट ग्रामीण क्षेत्र आधारित रहा, लेकिन मध्यप्रदेश में हालात थोड़े अलग हैं। बीते साल हुए मंदसौर किसान आंदोलन को लेकर जहां पहले ही सरकार कटघरे में है, वहीं कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को हर बार भुनाने की कोशिश की जाती रही है। एक बार फिर जब शिवराज सिंह चौहान भोपाल में आगामी 12 फरवरी को आयोजित होने वाले किसान सम्मेलन के जरिए पिछले जख्मों को भरने की कोशिश करते नजर आ रहे थे, वहीं अब ये भी साफ दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस शिवराज सिंह को राह को इतना भी आसान नहीं होने देगी।

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