आखिर क्यों 3 बार चुनाव हार चुके प्रत्याशी पर कांग्रेस ने 4 बार किया भरोसा, इस बार मुकाबला संघ कार्यकर्ता से

आखिर क्यों 3 बार चुनाव हार चुके प्रत्याशी पर कांग्रेस ने 4 बार किया भरोसा, इस बार मुकाबला संघ कार्यकर्ता से

Pawan Tiwari | Publish: Apr, 14 2019 11:53:45 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India


आखिर क्यों 3 बार चुनाव हार चुके प्रत्याशी पर कांग्रेस ने 4 बार किया भरोसा, इस बार मुकाबला संघ कार्यकर्ता से

भोपाल. लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने शनिवार को 18 उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में मध्यप्रदेश के तीन नामों का एलान किया गया है। ग्वालियर से अशोक सिंह, भिंड से देवाशीष झारिया और धार से दिनेश गिरवाल का नाम शामिल है। कांग्रेस मध्यप्रदेश के लिए अब तक 28 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर चुकी है। इंदौर सीट को लेकर अभी भी मंथन चल रहा है। ग्वालियर से अशोक सिंह के को उम्मीदवार बनाया गया है। उनका मुकाबला बीजेपी के विवेक शेजवलकर से होगा।


ग्वालियर से तीन बार हार चुके हैं अशोक सिंह
कांग्रेस ने ग्वालियर संसदीय सीट से एक बार फिर से अशोक सिंह पर भरोसा जताया है। अशोक सिंह इससे पहले तीन बार अपना चुनाव हार चुके हैं। 2014 में पार्टी ने उन्हें भाजपा के कद्दावर नेता नरेन्द्र सिंह तोमर के खिलाफ मैदान में उतारा था। नरेन्द्र सिंह तोमर को इस चुनाव में 442,796 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के अशोक सिंह को 413,097 वोट मिले थे। ग्वालियर संसदीय सीट में भाजपा को 44.7% फीसदी तो कांग्रेस को 41.7% फीसदी वोट मिले थे। वहीं, इससे पहले 2007 में ग्वालियर संसदीय सीट से यशोधरा राजे सिंधिया ने अशोक सिंह को उपचुनाव में हराया था तो 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया के खिलाफ अशोक सिंह दूसरी बार मैदान में थे। इस चुनाव में यशोधरा राजे सिंधिया को 252,314 औऱ कांग्रेस के अशोक सिंह को 225,723 वोट मिले थे। अशोक सिंह अब तक तीन बार हार चुके हैं। अशोक सिंह चौथी बार मैदान में हैं। जबकि दो बार महापौर चुने गए विवेक शेजवलकर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

 

कांग्रेस की रणनीति
अशोक सिंह अभी तक ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिए उनकी संसदीय क्षेत्र में पकड़ रही है। लेकिन आपसी गुटबाजी के चलते उनके समक्ष कांग्रेस को एकजुट करने की चुनौती रहेगी। देर से प्रत्याशी घोषित होने की वजह से कांग्रेस की भले ही धरातल पर नहीं उतरी हों, लेकिन अशोक सिंह ने अपनी तैयारियां जारी रखी थीं।

दिग्विजय का करीबी
अशोक सिंह को दिग्विजय सिंह खेमे का माना जाता है। अशोक सिंह के पिता राजेन्द्र सिंह प्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री थे। कहा जा रहा है कि अशोक सिंह को फिर से टिकट मिलने के एक अहम कारण है दिग्विजय सिंह की करीबी। दिग्विजय खेमे का होने के कारण उन्हें टिकट मिली है। सिंधिया गुट के कई नामों पर भी विचार किया गया था लेकिन सफलता दिग्विजय सिंह खेमे को मिली। इस कारण अशोक सिंह का नाम प्रबल दावेदारों के रूप में चल रहा था, लेकिन यह नाम सिंधिया के समर्थकों को रास नहीं आ रहा था।

जनता तक सीधी पहुंच
अशोक सिंह के टिकट मिलने का एक कारण है जनता से सीधा संपर्क। जनता के बीच इनकी पकड़ अच्छी है और इनके परिवार की इमेज समाज में अच्छी है। माना जा रहा है सरल स्वाभाव के कारण ही कांग्रेस ने इन पर भरोसा जताया है। सरल स्वभाव के कारण ही कांग्रेस ने चौथी बार दांव लगाया है।

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