बायोलॉजी के सह विषयों को प्रदेश में मान्यता नहीं

अधर में लटका चयनित शिक्षकों का भविष्य

पद खाली लेकिन शिक्षकों को माना जा रहा अयोग्य

 

By: Arun Tiwari

Published: 10 Jun 2021, 04:57 PM IST

भोपाल : प्रदेश सरकार की एक गलती से कई युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। साढ़े 22 हजार पदों पर भर्ती के लिए चयनित शिक्षकों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरु की है। लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने बायोलॉजी के सह विषय माइक्रो बायोलॉजी, बायो टेक्रोलॉजी या बायो कैमिस्ट्री से एमएससी की है उनको शिक्षक चयन परीक्षा पास करने के बाद भी आयोग्य घोषित किया जा रहा है। इन युवाओं को ग्यारहवीं और बारहवीं में बायोलॉजी पढ़ाने के योग्य नहीं समझा जा रहा है। यानी जिन विषयों की पढ़ाई सरकार कॉलेज में करा रही है उन विषयों को नौकरी में मान्यता नहीं दी जा रही। इन विषयों के लोगों की परीक्षा ले ली गई और उनकी चयन सूची भी जारी हो गई लेकिन अब भर्ती में नियमों का अड़ंगा लगा दिया गया।

चयनित शिक्षकों ने मांगी इच्छा मृत्यु :
माइक्रो बायोलॉजी से एमएससी करने वाली रीवा की रेनु वर्मा ने शिक्षक चयन परीक्षा दी और उनका चयन वर्ग के जीव विज्ञान विषय के लिए हो गया। लेकिन जब भर्ती की बारी आई तो सत्यापन के समय उनसे कह दिया गया कि माइक्रोबॉयोलॉजी विषय के कारण उनकी भर्ती वर्ग एक पर नहीं की जा सकती क्योंकि बॉयोलॉजी के सह विषयों को मान्यता नहीं दी जा रही। रेनु ने कहा कि सरकार यदि उनको नौकरी नहीं दे सकती तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दे क्योंकि उसके पास और कोई विकल्प नहीं है। यह कहानी अकेली रेनु की नहीं है बल्कि उन 800 युवाओं की है जिन्होंने शिक्षक चयन परीक्षा पास की है।

यहां हो रही गफलत :
सरकार ने बायोलॉजी के 1600 पदों पर भर्ती निकाली है। 2018 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने जब इस भर्ती का सर्कुलर निकाला था तब उसमें ये स्पष्ट नहीं किया था कि बॉयोलॉजी के सह विषयों को इसमें शामिल किया जाएगा। इसी गलती के कारण इन चयनित शिक्षकों को नौकरी पर नहीं रखा जा रहा जबकि कई ने तो चयन परीक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया है। इससे पहले प्रदेश में हुई शिक्षकों की भर्ती में माइक्रोबॉयोलॉजी जैसे सभी सह विषयों के लोगों को नियुक्तियां दी गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग भी माइक्रोबायोलॉजी विषय के अभ्यर्थियों को सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति प्रदान करता है। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय, एकलव्य विद्यालय में इन विषयों की मान्यता है। गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में भी माइक्रोबायोलॉजी विषय के अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाती है।


एक सर्कुलर में गलती के कारण ये स्थिति पैदा हुई है, हम इस पूरे मामले पर विचार कर रहे हैं क्योंकि इसमें इन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है और उनको नियुक्ति मिलनी चाहिए। इनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हम ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कोई कानूनी रोड़ा न आए और इनको नियुक्ति भी मिल जाए। - इंदर सिंह परमार स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री -

Arun Tiwari
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