इधर चुनाव चरम पर, उधर बिजली-पानी के लिए हाहाकार

इधर चुनाव चरम पर, उधर बिजली-पानी के लिए हाहाकार

Anil Chaudhary | Publish: Apr, 23 2019 05:20:26 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

- चुनावी समीकरणों को बेपटरी न कर दे लालफीताशाही

भोपाल. लोकसभा चुनाव की गतिविधियां चरम पर हैं। ऐसे में प्रदेश में बिजली और पानी के लिए हाहाकार मचा है। पेयजल आपूर्ति अफसरों की शर्तों के पेंच में उलझ गई है। वहीं, बिजली सप्लाई में मैदानी अमले की लापरवाही सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है। सरकार ने दो दिन में 492 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई कर हालात संभालने की कोशिश की है, लेकिन हर दिन बढ़ती गर्मी के बीच बुंदेलखंड सहित अन्य इलाकों में बिजली और जल आपूर्ति बेपटरी होने से आम आदमी की परेशानी बढ़ गई है। इसका असर चुनावी माहौल पर होने लगा है। प्रदेश सरकार को अपनी छवि की चिंता सता रही है तो लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों को स्थानीय स्तर पर समीकरण प्रभावित होने का अंदेशा है।
- ऐसे हैं बिजली-पानी के हाल
पानी : परिवहन नहीं तो बिगड़े हालात
पानी पर हाहाकार के हालात परिवहन की व्यवस्था बिगडऩे से बने हैं। बारिश कम होने से बुंदेलखंड सहित कई अंचलों में स्थिति बेहद खराब है। 150 से ज्यादा निकायों में जलापूर्ति प्रतिदिन नहीं हो रही है। शहरी आवास एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने 28 मार्च को पानी माफिया पर लगाम कसने निजी टैंकरों से परिवहन पर रोक लगा दी थी, लेकिन इससे जिलों में हालात बिगड़ गए। अब एक अप्रेल को निजी टैंकरों को मंजूरी दे दी गई है, लेकिन इनकी शर्तों के इतने पेंच हैं कि मैदानी अधिकारियों ने पेयजल परिवहन न के बराबर किया। शर्त है कि निकाय में जलस्त्रोतों को आपस में जोड़कर पेयजल आपूर्ति हो। इससे समस्या हल न होने पर आस-पास के इलाकों के जलस्त्रोतों को जोड़कर आपूर्ति की जाए। ऐसा भी न हो तो निकाय के जलस्त्रोतों व अधिग्रहित जलस्त्रोतों से निकाय के ही टैंकरों से परिवहन कराया जाए। यदि इससे भी आपूर्ति संभव न हो और कोई विकल्प न बचे, तब निजी टैंकरों से आपूर्ति की जाए। ऐसा करने पर निर्धारित फॉर्मेट में पूरी जानकारी नगरीय प्रशासन संचालनाय को भेजी जाए। जानकारी भेजने के साथ पेयजल परिवहन किया जा सकेगा। बाद में संचालनालय स्तर पर यह जांचा जाएगा कि परिवहन अनावश्यक तरीके से तो नहीं किया गया। संचालनालय को पूरी जानकारी भेजने के नाम पर जिलों में निजी टैंकरों से किनारा कर लिया गया है।
- बिजली : सरप्लस, फिर भी कटौती से छवि खराब
बिजली सरप्लस होने के बावजूद अघोषित कटौती ने प्रदेश सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। अब भाजपा प्रचारित कर रही है कि कांग्रेस सरकार आ गई है तो बिजली कटौती तो होगी ही। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बिजली महकमे को सख्त निर्देश दिए हैं कि जनता को बताए बिना कटौती नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी पूछा है कि सरप्लस के बावजूद कटौती कोई साजिश तो नहीं है। बिजली को लेकर हालात इतने बिगड़े हैं कि इंदौर में कांग्रेस सरकार के एक कार्यक्रम में बिजली गुल हुई तो उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने अफसरों पर नाराजगी जताई। इसके बाद 492 से ज्यादा बिजली कर्मचारियों को निलंबित करने और दैनिक वेतन भोगियों को बर्खास्त करने के नोटिस दो घंटे में जारी कर दिए गए। इससे बवाल और बढ़ गया। खेती पर 10 घंटे बिजली आपूर्ति अनिवार्य की गई है, लेकिन ट्रिपिंग के नाम पर यह भी सात से आठ घंटे औसत ही दी जा रही है। उस पर 24 घंटे घरेलू आपूर्ति के दावे भी अघोषित कटौती से गड़बड़ा गए हैं। सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद कहीं मेंटनेंस, ट्रिपिंग के नाम पर तो कही अन्य कारणों का हवाला देकर अघोषित कटौती हो रही है। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने कलेक्टर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह तक कह दिया कि जरूरत पडऩे पर एस्मा भी लगाएं, जिससे मैदानी अमला नेतागिरी न कर पाए।

- 2003 के सत्ता-परिवर्तन में अहम थे बिजली-पानी
प्रदेश में 2003 में सत्ता परिवर्तन का बड़ा कारण बिजली, पानी और खराब सड़कें भी थीं, तब उमा भारती के चेहरे को आगे करके भाजपा ने तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह की 10 साल की कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल किया था। आमतौर पर लोकसभा चुनाव में बिजली-पानी मुद्दा नहीं बन पाते हैं, लेकिन भीषण गर्मी के चलते इस बार इनका असर चुनावी नतीजों पर दिख सकता है। हर दिन आम आदमी की बढ़ती परेशानी इस पर गुस्से को बढ़ा रही है।

बिजली कटौती कहीं नहीं हो रही है। कुछ लोकल शिकायतें रहती हैं तो उन्हें हल किया जाता है। बिजली सरप्लस है, आपूर्ति भी पिछले साल से 15 फीसदी ज्यादा है। ट्रिपिंग कहीं-कहीं होती है तो उसमें सुधार और कार्रवाई होती है, लेकिन यह भी पिछले साल से कम है।
- आइसीपी केसरी, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग

पानी के परिवहन पर कोई रोक नहीं है। परिवहन की पूरी जानकारी संकलित करके मुख्यालय को भेजने के लिए कहा गया है। जनता को जलापूर्ति पहली प्राथमिकता में हैं। केवल यह ध्यान रखना है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग न हो। हर स्तर पर जलसंकट को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
- संजय दुबे, प्रमुख सचिव, शहरी आवास एवं विकास विभाग

 

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