फर्जी तरीके से लिए थे सरकारी आवास, 66 पुलिसकर्मियों पर होगी एफआईआर

- ज्यादातर पुलिस महकमे में, वर्ष 2018 में शुरू हुई थी 105 आवासों की जांच, 2 जनवरी 2020 को जारी किया आदेश

भोपाल। सरकारी आवास आवंटन में फर्जी दस्तावेज तैयार कर गलत तरीके से आवंटन के मामले में जांच के बाद 66 सरकारी आवासों का आवंटन निरस्त किया गया है। 2 जनवरी को उप सचिव मप्र शासन उषा परमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सम्पदा संचालनालय के संचालक डॉ.आरआर भौंसले का कहना है कि इन सभी पर फर्जीवाड़े की एफआईआर कराने के साथ वसूली भी की जाएगी। इन लोगों को ये आवंटन वर्ष 2018 में हुए थे।

मुख्यमंत्री के द्वारा नियम 9 के तहत सरकारी कर्मचारी, निज सचिव, अलग-अलग विभाग में पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों को आवास आवंटन किए जाते हैं। वर्ष 2018 में 105 आवासों का आवंटन किया गया। शिकायत के बाद इसमें 35 आवासों का आवंटन सही निकला। 66 आवंटन फर्जी तरीके से कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर किए गए। इस मामले की शिकायत के बाद डेढ़ साल चली जांच के बाद अब 66 के आवंटन निरस्त कर दिए हैं। 3 में अभी जांच चल रही है। आवंटन अधिकारी सम्पदा संचालनालय मुकुल गुप्ता का कहना है कि लंबी जांच के बाद रिपोर्ट बनाकर भेजी गई थी, इसके बाद आवंटन निरस्त किए गए हैं।

इनके आवंटन हुए निरस्त

विजय बनौदिया (एसआई, पीएचक्यू ), विदिता खरे (सहायक वर्ग तीन ), पुष्पा डेहरिया (स्टेनोग्राफर ), पल्लवी सक्सेना, शांति प्रजापति, सुनील कौशल, क्षिप्रा शर्मा, मनोज चतुर्वेदी, गोविंद सिंह रघुवंशी, बालमुकुंद शर्मा, सुमित जवारिया, अशोक गर्ग, अन्नू कनौजिया, विनीत राठौर, सुचिता चौहान, अखिलेश तिवारी, नरेंद्र जाटव, कमलेश धर्मेश, प्रदीप कुमरे, अंकुश सूर्यवंशी, सर्वेश सिंह, अजय कुमार, अनुज सिंह, विनोद कुमार विरहा, रवि शर्मा, सरनाम सिंह, राजेश कुशवाह, रजनी चिरगैईंया, श्याम पवमांगे, तेजपाल सिंह, सतेंद्र सिंह, नितीश मिश्रा,

भास्कर रघुवंशी, अनिल दौनेरिया, दीपक त्रिपाठी, भूपेंद्र कुमार राई, महाराज सिंह दांगी (आरक्षक ), श्यामा वर्मा, अश्विनी पाराशर, नंद किशोर जोशी, दीपिका मरावी, आशीष वास्केल, जितेंद्र कुमार बृजपरिया, अंकित दीवान, महेंद्र कुमार राठौर, सुजीत मरावी, अंशुल नारंग, पवन राय, मुकेश कुमार धनकर, अमित अलावे, आशीष डेहररिया, लेदला सुल्या, लीला बामनियां, योगेश्वर रावत, अरुण चौहान व अन्य हैं।

जांच के बाद 66 आवसों के आवंटन निरस्त किए गए हैं। कूटरिचत दस्तावेज बनाकर आवास आवंटन कराने वालों के मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद इनसे वसूली होगी।
आरआर भौंसले, संचालक, सम्पदा संचालनालय

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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