गाद निकालने पर बेपरवाह जिम्मेदार, कई जगह बड़े तालाब की गहराई सिर्फ 3.16 मीटर गहराई बची

-गाद निकालने एवं कैचमेंट को रासायनिक खादों से मुक्त करने के लिए नहीं किए कारगर उपाय

भोपाल. बड़े तालाब में मिल रहे नालों और सफाई में बरती जा रही अनदेखी के कारण बड़े तालाब की गहराई कम हो रही है। कई स्थानों पर गहराई सिर्फ 3.16 मीटर से 11.64 मीटर तक बची है। इसका असर तालाब की स्टोरेज क्षमता पर पड़ रहा है। खास बात है कि जिम्मेदार विभागों ने तालाब को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक स्टोरेज क्षमता कम होने से दिसंबर महीने से तालाब का पानी कम होने लगता है। जलीय जीव दम तोडऩे लगते हैं। नतीजतन मई-जून में तालाब से पानी सप्लाई में परेशानी आती है। पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए कैचमेंट में वृह्द स्तर पर पौधरोपण की दरकार है। एप्को के पास वेटलैंड अथॉरिटी के तहत बड़े और छोटे तालाबों के संधारण और संरक्षण की जिम्मेदारी है, लेकिन इन्होंने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। अथॉरिटी को हर महीने पानी की रिपोर्ट तैयार कर वेबसाइट पर अपडेट भी नहीं की जा रही है।

अभिकरण गठन का मामला भी ठंडे बस्ते में

बड़ा तालाब और सीहोर की कोलोंस नदी के संरक्षण के लिए अभिकरण गठित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने शासन को भेजा था। कलेक्टर तरुण पिथोड़े इस संबंध में प्रेजेंटेशन दे चुके हैं। इसमें तालाब की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने के लिए अलग-अलग अमला रखे जाने की बात कही गई थी। इस प्रेजेंटेशन के लिए अक्टूबर महीने में बड़ा तालाब के पानी की जांच करवाई थी। इसमें तालाब की गहराई कम होने एवं पानी के प्रदूषित होने की जानकारी मिली थी। हालांकि इसके बाद से अभिकरण के गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।


20 साल पुरानी स्थिति में आना होगा

विशेषज्ञों के अनुसार बड़ा तालाब को बचाने के लिए 20 साल पुरानी स्थिति को रिकॉल करना होगा। उस समय खेती में रसायनों और कीटनाशकों का उपयोग कम होता था। कैचमेंट में बड़ी संख्या में पेड़ थे। मौजूदा समय में स्थिति बिलकुल उलट है। खेतों में कीटनाशक और रसायनों का अधिकाधित उपयोग किया जा रहा है और कैचमेंट से पेड़ों की संख्या लगातार कम हो रही है। पेड़ो की वजह से कैचमेंट एरिया में नमी रहती है।

बड़े तालाब के संरक्षण के लिए अन्य विभागों से बात कर जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे। जैविक खेती करने के लिए किसानों को समझाइश दी जाएगी।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर


तालाब से गाद कम करने के लिए समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्टोरेज क्षमता कम होगी। नतीजतन मई-जून में ही तालाब सूखने लगता है।

सुभाष सी. पांडे, पर्यावरणविद्

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