पॉजिटिव केस में बागसेवनियां टॉप पांच में, होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों के लिए अलार्म, जाटखेड़ी तक पहुंचा कारोना

- छतरपुर, झांसी, बुंदेलखंड, बड़वानी, झाबुआ और अन्य जिलों से आए मजदूरों ने बसाई थी बस्ती

भोपाल. सुबह मेहनतकर शाम को दो जून रोटी कमाने वाले मजदूरों को कोरोना काल में सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ा। सरकार की तरफ से दी गई मुफ्त राशन की व्यवस्था पर दूसरों ने डाका डाल दिया। मजबूरी और हालात ने इस कदर बेबस कर दिया कि उन्हें अपने सपनों के आशियाने में ताले डालकर अपने गांव ही जाना पड़ा। कोलार बंजारी में पूरी बस्ती दिहाड़ी मजदूरों और घरों में काम करने वालों की बसी है। इसमें से अस्सी फीसदी घरों में आज ताले डले हैं। घर अंदर से खाली हैं, अगर कुछ है तो सोने की कुछ चारपाई ही झुग्गियों में रखी हैं। बाकी मजदूर अपना सामान समेट कर ले गए। उनके जाने के बाद यहां की गलियां सूनी पड़ी हैं। कल तक यहां हजारों मजदूरों की चहल पहल होती थी।

गोविंदपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया में गौतम नगर बस्ती में झुग्गी रहने वाले मजदूर अपने घर आष्टा चले गए। यहां रहने वाले मजदूर इडस्ट्री में काम करते थे और अपना गुजारा करते थे। लेकिन लंबे समय से बंद पड़े इंडस्ट्रीयल एरिया के चलते इन लोगों को खाने के लाले पड़ गए। दो लोग वहीं घूमते मिले उन्होंने अपने राम रमेश और सुखलाल साहू बताया। दोनों का कहना है कि यहां रोजाना काफी चहल पहल रहती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मजदूर परिवार को लेकर चले गए। अब यहां सन्नाटा पसरा है। श्यामला हिल्स, मांडवा बस्ती और बाणगंगा में भी बड़ी संख्या में मजदूर पलायन कर गए। यहां बचे कुछ मजदूरों मे केशव बताते हैं कि घर में खाने को कुछ बचा नहीं है। आस-पास के लोगों से कुछ उम्मीद रहती है। वो भी कब तक खिलाएंगे। सरकारी राशन की दुकान पर राशन मिलता नहीं है। 18 मई से कुछ आस है, नहीं खुलेगा तो ये भी परिवार के साथ अपने गांव चले जाएंगे।
मजदूरों के पीठे सूने, निशातपुरा से मजदूर गायब

शहर में कोलार, बंजारी, दानिश कुंज, दानापानी के पास मीरा नगर बस्ती, अन्ना नगर, हबीबगंज स्टेशन के सामने, मिसरोद, बागसेवनियां, करोद, अशोका गार्डन, टीटी नगर, अयोध्या बायपास, गोविंदपुरा, निशातपुरा, ईटखेड़ी ये ऐसे स्थान हैं जहां सुबह-सुबह मजदूर खड़े मिल जाते थे। लेकिन शहर से दो लाख के आस-पास मजदूर पलायन करने के कारण अब ये पीठे सूने रहते हैं। निशातपुरा में जहां रेलवे का माल लोड अपलोड होता है, सीमेंट की बोरियां उतरती हैं, वहां भी अब मजदूर तलाशे नहीं मिल रहे हैं।
95 फीसदी काम बंद, खदानें चालू लेकिन काम नहीं

लॉकडाउन की स्थिति में जिले में 95 फीसदी निमार्ण कार्य बंद हैं, जो काम चल रहे हैं उनमें 30 फीसदी मजदूर ही आ रहे हैं। इसका भी कई जगह विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र में गिट्टी कोपरा की खदानें चालू की गईं हैं, लेकिन निर्माण कार्य से सप्लाई न होने से यहां काम करने वाले पांच हजार मजदूर एक तरह से बेरोजगार हैं। इसमें से 30 फीसदी तो अपने घर जा चुके हैं। अब 18 मई को जारी होने वाली गई गाइडलाइन से कुछ काम शुरू होने की आस है।
मजदूर कैसे और कहां से जाएं, कोई बताने वाला नहीं

मजदूरों को घर भेजने को लेकर शुरू की गई व्यवस्था में बहुत हीला हवाली है। मजदूर कैसे और कब घर जा सकते हैं कोई बताने वाला नहीं है। प्रशासन स्तर से कोई पारदर्शी वाली व्यवस्था नहीं है। मजदूर पैदल ही सड़कों पर निकल रहे हैं। न खाने की व्यवस्था न पीने का इंतजाम। सिर्फ नेताओं की साठगांठ से ही मजदूर अपने जिले या गांव जा पा रहे हैं। जो नाम सूची में आते हैं वे बस से जाते हैं और जो किसी को वोट नहीं देते वो पैदल ही गांव की तरफ चल देते हैं।

प्रशासन का दावा 10 हजार 500 बस और ट्रेन से भेजे

जिला प्रशासन का दावा है कि अभी तक जिले से जाने वाले लगभग साढ़े दस हजार मजदूरों को वे बसों और टे्रन की मदद से शिवपुरी, गुना, झांसी, ग्वालियर, छतरपुर, बड़वानी, झाबुआ, रीवा, सतना व अन्य स्थानों पर भेज चुके हैं। इसमें से छह हजार मजदूर बाहर जिले से पैदल आने के यहां क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए। जांच कराई और इसके बाद इनको घर भेज दिया। जबकि शहर से खुद करीब 20 हजार मजदूर कोलार, बंजारी, गोविंदपुरा, मांडवा बस्ती, करोंद, निशातपुरा, अशोका गार्डन, बागसेवनियां व अन्य जगहो से अपने घर जा चुका है।

वर्जन
मजदूरों को घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। जो लोग घर जाना चाहते हैं उनके लिए ट्रेनें और बसें चलाई हैं। इसके लिए पहले सूची तैयार करते हैं। जो लोग जाना चाहते हैं वे नजदीकी सेंटरों पर संम्पर्क कर सकते हैं।

उमराव मरावी, अपर कलेक्टर, (बाहर जाने वाले लोगों की व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी )

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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