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मेरी कमीज तुमसे साफ

वि त्तमंत्री पी. चिदम्बरम को शिकायत है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में तथ्यों के ..

Updated: January 16, 2015 12:12:13 pm

वि त्तमंत्री पी. चिदम्बरम को शिकायत है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में तथ्यों के साथ फर्जी मुठभेड़ कर रहे हैं। चिदम्बरम की शिकायत में कितना दम है, इसका फैसला होना तो मुश्किल है, लेकिन देश के राजनेताओं के भाषणों पर बारीकी से गौर किया जाए तो लगता यही है कि हर नेता तथ्यों के साथ खिलवाड़ करके सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की जल्दबाजी में है।

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री के दावेदार नरेन्द्र मोदी हों या कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अथवा मुलायम सिंह, मायावती, नीतीश कुमार अथवा जयललिता, हर कोई अपनी कमीज को साफ बताने की होड़ में लगा हुआ है। मोदी को कांग्रेस में सारी बुराइयां नजर आ रही हैं, तो राहुल को मोदी में। गुजरात के दौरे पर राहुल गांधी ने राज्य में छह हजार किसानों की आत्महत्याओं का मामला उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की।

मोदी पर हमला करके राहुल सीधे-सीधे यह जताना चाहते हैं कि मोदी के विकास के दावे में दम नहीं है। गुजरात में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उछालने वाले राहुल का आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों की आत्महत्या पर मौन रहने का मतलब आसानी से समझा जा सकता है।

मोदी भी यही सब कर रहे हैं। केन्द्र और दूसरे राज्यों की कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला बोलने वाले मोदी भी भाजपा सरकारों की नाकामियों पर खामोशी साध लेते हैं तो इसका सीधा आशय वोट बैंक की राजनीति के अलावा कुछ नहीं। देश का दुर्भाग्य यही है कि यहां हर राजनीतिक दल और नेता तथ्यों के साथ फर्जी मुठभेड़ कर वोटों की राजनीतिक फसल उगाना चाह रहे हैं। भ्रष्टाचार, महंगाई, किसानों के दुख-दर्द और विकास की चिंता सबको है,

लेकिन सबको अपना विकास ही नजर आता है। कमजोरियां और खामियां तो विरोधियों की ही दिखाई पड़ती हैं। सत्ता पाने के लिए राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोपों के दौर पहले भी चलते थे, लेकिन राजनीतिक मर्यादा का ध्यान अवश्य रखा जाता था। आज तथ्यों के फर्जी मुठभेड़ के साथ-साथ नेताओं के चरित्र हनन की राजनीति अव्वल हो गई है।

आश्चर्य तो तब होता है, जब राजनीतिक दलों का शीर्ष नेतृत्व भी एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में शामिल हो जाता है। सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए घटिया आरोपों का चलन बढ़ने के साथ ही लगता है मुद्दों की राजनीति का जमाना लदता जा रहा है। देश में शिक्षा का स्तर बढ़ने और राजनीति में युवाओं के आने के बावजूद राजनीति के स्तर का दिनोंदिन गिरना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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