मां से बोलकर गया परवेज, बप्पा को विदा कर आ रहा हूं, झील में नाव पलटी तो वह भी साथ चला गया!

पांच साल पहले परवेज के पिता की भी हो गई है मौत

By: Muneshwar Kumar

Updated: 13 Sep 2019, 07:00 PM IST

भोपाल/ गणपति विसर्जन के दौरान भोपाल की झील में नाव पलटी और 11 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में सभी युवा भी हैं। एक साथ ग्यारह सौ क्वार्टर से जब इतनी अर्थियां निकलीं तो परिजनों की चीत्कार से पूरा इलाका गूंज उठा। सबके मन में एक ही सवाल था ये सब कैसे हो गया। ग्यारह घरों के चिराग एक साथ बुझ गए थे। उन्हीं में एस परवेज भी था जो गणपति का विसर्जन करने गया था।

12 साल का परवेज पिछले पांच सालों से मोहल्ले के लड़कों के साथ मिलकर गणपति की प्रतिमा को स्थापित करता था। हादसे के दिन गणपति की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए वह पूजा समिति के बाकी लोगों के साथ घटालपुरा तलाब गया था। दोस्तों के साथ नाचते-गाते गए परवेज ने कभी नहीं सोचा होगा कि ये जिंदगी की मेरी भी आखिरी सफर होगी।


पिता की भी हो गई है मौत
परवेज की मां बेटे को याद कर बार-बार बेहोश हो जा रही थी। पांच साल पहले ही परवेज के पिता सईद का भी निधन हो गया है। ऐसे में परिवार के लोगों को परवेज से ही उम्मीद थी। गरीबी की वजह से इधर-उधर थोड़ा बहुत काम करता था। साथ ही परिवार को आर्थिक मदद भी करता था। परवेज के जाने से मां की सारी उम्मीदें अब टूट गई हैं। मां को चिंता है कि बुढ़ापे का सहारा अब कौन बनेगा।

थोड़ी देर में आ जाऊंगा मां
मोहल्ले के लोग गणपति का विसर्जन करने जा रहे थे। परवेज अपनी मां से बोलकर गया था कि मां मैं थोड़ी देर में बप्पा को विदा कर आ जाऊंगा। सभी दोस्तों के साथ मैं विसर्जित करने जा रहा हूं। लेकिन परवेज इस दुनिया से हमेशा के लिए रुखस्त हो गया।

मेरे बेटे को लाओ
परवेज की मां बार-बार घर आने वाले हर व्यक्ति को यही बोल रही है कि मेरे बेटे को लाओ। कहां गया वो। क्योंकि परवेज हर बार गणपति की स्थापना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। मां की दहाड़ सुन पड़ोस के लोग कांप जा रहे हैं। वह बार-बार इसी बात को दोहराते हुए बेहोश हो जा रही है कि मेरे बेटे को लाओ।

Muneshwar Kumar
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