गैस त्रासदी ने पहले अपनों को छीना, अब दो वक्त की रोटी और दवाओं के लिए संघर्ष कर रहीं बुजुर्ग महिलाएं

गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग से मिलती है एक हजार तो राज्य सरकार से 600 रुपए की पेंशन, इतनी कम राशि में दवाएं ही नहीं मिल पातीं, राशन कैसे खरीदें

By: Ram kailash napit

Published: 03 Dec 2019, 03:06 AM IST

भोपाल. राजधानी में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात लाखों लोगों पर कहर बनकर टूटी। यूनियन कर्बाइड से निकली जहरीली मिथाइल आइसोसाइनट गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली। इनके परिवारों को बीमारी के रूप में जिंदगीभर का दर्द दिया। त्रासदी को 35 साल हो गए, पर शांतिबाई, प्रेमबाई साहू और चम्पाबाई जैसी सैकड़ों पीडि़त बुजुर्ग विधवाएं आज भी हक के लिए संघर्ष कर रही हैं। इन्होंने त्रासदी में पहले परिवार खोया और अब दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। दस किलो राशन की उम्मीद में खाद्य शाखा में कई बार चक्कर लगाने पर भी सुनवाई नहीं हुई तो खाद्य मंत्री को ज्ञापन सौंपा। हाथ में सूखी रोटी लेकर नीलम पार्क में प्रदर्शन से भी अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। दरअसल, मई 2019 से गैस पीडि़तों के पास मौजूद राशन कार्ड बेकार हो गए हैं, इसकी वजह एनआईसी पर अपडेशन नहीं होना है। नतीजतन इन्हें उचित मूल्य की दुकान से राशन नहीं मिल रहा है। अधिकारी कहते है कि एनआईसी से अपडेशन के बाद ही कुछ हो सकता है।

आशियानों पर कब्जे
करोंद की हाउसिंग बोर्ड स्थित विधवा कॉलोनी में एक हजार से अधिक आवास गैस पीडि़त महिलाओं के लिए हैं। इनमें से अधिकतर में कब्जे हो गए हैं। कई पीडि़ताओं को आवास ही नहीं मिले और वर्षों से संघर्ष कर रही हैं।

5 हजार से अधिक बुजुर्ग महिलाएं हो रहीं परेशान

राशन कार्ड अपडेट नहीं होने से 5000 से अधिक बुजुर्ग महिलाएं परेशान हैं। इनका घर चलाने वाला कोई नहीं है। इन्हें गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग से एक हजार तो राज्य सरकार से 600 रुपए की पेंशन मिलती है। इतने कम रुपयों में गुजारा करना तकरीबन नामुकिन है। समझ नहीं आता कि इनसे दवाएं खरीदें या राशन। शांतिबाई बताती हैं कि गैस राहत कॉलोनी से कलेक्टोरेट तक 10 किमी आने में ही 40 रुपए खर्च हो जाते हैं। एक महीने में पांच बार चक्कर लगे तो 200 रुपए तो सिर्फ किराए में ही चले जाते हैं। गैस पीडि़त महिलाओं की मांग है कि गैस राहत पेंशन कम से कम दो हजार रुपए की जाए, ताकि उनकी कुछ तो परेशानियां कम हों।

अब पेंशन पर भी संकट के बादल
गैस पीडि़त निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव बताते हैं कि विधवाओं की परेशानी नए साल में और बढ़ जाएगी। केंद्र सरकार ने विधवा पेंशन के लिए 30 करोड़ रुपए जमा कराए थे। इसके ब्याज से पेंशन दी जाती है। बीच-बीच में एफडी तोड़कर राशि निकाली गई, जिससे ये रुपया खत्म हो गया है। ऐसे में संकट की स्थिति है।

90 साल की उम्र में भटकना पड़ रहा है
राजधानी में पांच हजार से अधिक गैस पीडि़त विधवा महिलाएं हैं। इनमें से 250 से अधिक की मृत्यु हो चुकी है। बाकी की उम्र 90 साल के आसपास है। ऐसे में राशन और पेंशन के लिए कलेक्टोरेट और गैस राहत शाखा के चक्कर लगाना बहुत मुश्किल है। ये सभी अकेले ही सरकारी अव्यवस्था और बीमारियों से जूझ रही हैं।
&गैस पीडि़त बुजुर्ग महिलाओं की राशन और पेंशन संबंधी जो समस्या है, उसका हम निराकरण कराएंगे।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर

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