फैकल्टी के देश-दुनिया में छपे लेखों ने दिलाया तमगा

फैकल्टी के देश-दुनिया में छपे लेखों ने दिलाया तमगा

Pushpam Kumar | Publish: Oct, 14 2018 06:02:01 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

आइसर भोपाल देशभर में दूसरे नंबर पर

भोपाल. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) भोपाल देशभर में स्थित सात अन्य आइसर संस्थानों में द्वितीय स्थान पहुंच गया है। संस्थान के वैज्ञानिकों और फैकल्टी द्वारा लिखे गए लेख और शोधपत्रों के देश और दुनिया भर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन के आधार पर यह रैकिंग प्रदान की गई है। नेचर इंडेक्स 2018 के नाम से जारी इस रैकिंग में साल 2017 में जनवरी से लेकर 31 दिसंबर 2017 तक के लेख शामिल किए गए हैं। यह रैकिंग स्थापित ब्रिटिश पत्रिका ने जारी की है। जानकारी के अनुसार नेचर इंडेक्स रैकिंग जारी करने के लिए हाई क्वालिटी नेचुरल साइंस जर्नल्स को आधार बनाया गया है। रैकिंग जारी करने वाली पत्रिका ने उच्च क्वालिटी के जर्नल्स को में छपे लेखों के आधार पर सभी आइसर को रैकिंग दी जिसमें आइसर पुणे प्रथम स्थान और आइसर भोपाल दूसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2008 में राजधानी में शुरू हुए संस्थान ने मात्र 10 साल में ही यह उपलब्धि हासिल कर ली है। भोपाल के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) भोपाल ने इस रैंकिंग में दूसरा स्थान बना पाने में कामयाबी हासिल की है।

इन्होंने किए उल्लेखनीय काम
डॉ. विनीत शर्मा : संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विनीत शर्मा और उनके ग्रुप ने राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीनोम को सीक्वेंशड किया है। उनका यह शोध देश भर में सराहा गया।
डॉ. संजीव शुक्ल : संस्थान की फैकल्टी डॉ. संजीव शुक्ला ने महिलाओं को होने वाले ब्रेस्ट कैंसर पर उल्लेखनीय शोध किया। यह शोध भी देश भर के प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ।
डॉ. जे शंकर : इन्होंने आर्गेनिक सोलर सेल्स पर काम किया है। हरित ऊर्जा को लेकर किया गया इनका शोध खूब सराहा गया।

हमारे लिए यह गर्व का विषय है। संस्थान ने नेचर इंडेक्स रैकिंग में देश भर में दूसरा स्थान पाया है। यह रैकिंग बताती है कि संस्थान में सही दिशा में काम हो रहा है। सप्त ऋषि मुखर्जी, डिप्टी डायरेक्टर आइसर भोपाल

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