भोपाल फिल्म इंडस्ट्री का सबसे फेवरेट डेस्टिनेशन, शूटिंग का सिलसिला कभी थमेगा नहीं

मिंटो हॉल में इंटरैक्टिव सेशन के ‘द एक्सपर्ट शॉट्स’ आयोजित

By: mukesh vishwakarma

Published: 15 Sep 2021, 10:53 PM IST

भोपाल. फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग बसु ने कहा कि मैं पैदा भिलाई में हुआ लेकिन टेक्निकली एमपी का ही हूं। भोपाल से पढ़ाई पूरी की है। मेरा भोपाल में शूटिंग का सुखद अनुभव रहा। भोपाल फिल्म इंडस्ट्री का सबसे फेवरेट डेस्टिनेशन है। यहां शूटिंग का सिलसिला कभी थमेगा नहीं। यह बात उन्होंने बुधवार को मिंटो हॉल में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन के ‘द एक्सपर्ट शॉट्स’ के शुभारंभ अवसर पर कही। फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए मप्र पर्यटन बोर्ड ओर से वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें सिनेमा विशेषज्ञों ने फिल्म निर्माण की बारीकियां बताईं। उन्होंने बताया कि भोपाल खूबसूरत जगह तो है ही यहां के लोग भी बहुत खूबसूरत हैं।

जनवरी में यहां करूंगा फिल्म की शूटिंग
एमपी में कई वेब सीरिज की शूटिंग होने के बारे में अनुराग ने बताया कि मध्यप्रदेश में बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो रही है। एक दो साल में मध्यप्रदेश फिल्मों के लिए बेहतर लोकेशन बनकर उभरा है। आने वाले समय में एमपी में दर्जनों फिल्में और वेब सीरीज बनेगी। मप्र में फिल्म बनाने के लिए बहुत सहूलियत है। उन्होंने कहा कि मेरा खुद का अनुभव रहा है कि भोपाल में बहुत आसानी से शूटिंग हो जाती है। इतनी आसान शूटिंग कही भी नहीं हो सकती। मैं जनवरी में एक और फिल्म बनाने के लिए भोपाल आ रहा हूं क्योंकि फिल्म लूडो में भोपाल का नाम कहीं नहीं ले पाया।
धीर-धीरे उबर रही है फिल्म इंडस्ट्री
कोरोना के दौरान फिल्म इंडस्ट्री को हुए नुकसान पर बसु ने कहा कि निश्चित तौर पर सभी जगह नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान उन वर्कर्स को हुआ है, जो इंडस्ट्री में रोजाना मेहनताना पर काम कर रहे हैं। ऐसे में अब धीर-धीरे इंडस्ट्री उबर रही है। नए-नए प्लेटफॉर्म के माध्यम से वह सरवाइव कर रही है।

भोपाल देखने का नहीं महसूस करने का शहर: राज शांडिल्य
फिल्म ड्रीम गर्ल के डायरेक्टर और कॉमेडी सर्कस के स्क्रिप्ट राइटर राज शांडिल्य ने कहा कि जब मैं भोपाल में इंजीनियरिंग कर रहा था, तभी सबसे पहले कॉमेडी सर्कस शो लिखा था। भोपाल देखने का नहीं महसूस करने का शहर है। मैं मानता हूं कि हर फिल्म मेकर को एक बार भोपाल में शूटिंग जरूर करनी चाहिए। जब मैं टेलीविजन के लिए काम करता था तब रेस्ट्रिक्शन्स बहुत थे। उस समय भाषा ऐसी रखनी होती थी जिसे फैमिली वाले देख सके। मैं हमेशा यही कोशिश करता था कि कभी भी डबल मीनिंग जोक्स न लिखू। उन्होंने कहा कि जब मुझसे पूछा जाता है कि आप सिर्फ फैमिली ओरिएंटेड फिल्में ही क्यों लिखते हैं। मैं हमेशा एक ही बात कहता हूं कि जब भी कोई स्टोरी लिखता हूं तो हिंदुस्तान के कल्चर को ध्यान में रखकर ही लिखता हूं। साथ ही मैं अब प्रोड्यूसर भी बनने वाला हूं लेकिन कई दफा ऐसा होता है कि आप स्क्रिप्ट्स नहीं बदल सकते हैं। कुछ टाइम बाद कॉमेडी नाइट्स में बाद में भाषा बदली गई और अब ओटीटी आने से अब कॉमेडी वहां शिफ्ट हो गई है। मैं खुद कभी भी इस फेवर में नहीं रहा कि कभी भी कॉमेडी फैमिली के साथ बैठकर न देख सके। प्रोड्यूसर के तौर पर एक और फिल्म की शूटिंग भोपाल में शुरू करने वाला था लेकिन लोकेशन बुक्स होने के कारण चंदेरी और ग्वालियर में शूट कर रहे हैं। साथ ही मैं एक कॉमेडी वेब सीरीज भी लिख रहा हूं।

प्रतिभा दिखाने का नया मंच है ओटीटी
मप्र नाट्य विद्यालय के निदेशक आलोक चटर्जी ने कहा कि कोरोना के बाद फिल्मों में एक बड़ा बदलाव आया है। अब स्ट्रगल नहीं करना पड़ रहा है। प्रतिभा दिखाने का नया मंच है ओटीटी। अब बस स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है। क्योंकि यदि कलाकार कुछ नया सीखता नहीं है तो वह अप्रासंगिक हो जाता है। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कहा कि मेरी कोशिश होगी कि मेरा ऑफिस मप्र के हर जिले में हो। अभिनेता शिवांकित सिंह परिहार ने बताया कि मैं सतना से हूं। विंध्य प्रदेश में भी शूटिंग की काफी संभावनाएं हैं। सेशन का लाइव प्रसारण एमपी टूरिज्म के फेसबुक पेज पर भी किया गया।

एक्सपर्ट ने दिए एक्सपर्ट शॉट्स
शुभारंभ समारोह के बाद द एक्सपर्ट शाट्र्स सेशन की शुरुआत हुई। जिसमें अनुराग बसु ने फिल्म निर्माण की बारीकियां बताई और मौजूद लोगों की जिज्ञासाओं को समाधान किया। सेशन के दौरान शिवांकित के साथ चर्चा में उन्होंने बताया कि फिल्मों से मेरा लगाव बचपन से था और मैं फिल्में देखता नहीं बल्कि पढ़ता था। भोपाल में शूटिंग के पूर्व स्कूटर से घूम-घूम कर लोकेशंस देखी थीं। दूसरा सेशन फिल्म लेखक और निर्माता-निर्देशक राज शाडिल्य का। तीसरा आलोक चटर्जी और अंतिम सत्र कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का था।

 

फिल्म लाइन में करियर बनाएं, लेकिन संस्कारों को न भूलें : मंत्री उषा ठाकुर

इधर, पर्यटन और संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर का कहा कि फिल्म लाइन अच्छी भी है और बुरी भी। प्रदेश के युवा टैलेंटेड भी हैं। वे फिल्म लाइन में करियर बनाएं। लेकिन अपने संस्कारों को न भूलें। बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को फिल्मों के माध्यम से और प्रगाढ़ करें। ठाकुर ने एक कविता के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया और आजादी के अमृत महोत्सव को देखते हुए आजादी के नायकों पर शॉर्ट फिल्म बनाने को कहा। पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशंकर शुक्ला ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश की प्रतिभाएं मुंबई में प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। फिल्म इंडस्ट्री की शुरुआत के साथ ही मप्र का दबदबा रहा है। अब हमारी कोशिश है कि मप्र के लोगों को काम के लिए मुंबई न जाना पड़े। उन्हें पूरी सुविधाएं और फिल्म इंडस्ट्री में रोजगार के साधन में हम मप्र में ही उपलब्ध कराना चाहते हैं।

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mukesh vishwakarma Reporting
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