वार्ड आरक्षण का असर- बदल जाएगी पूरी परिषद, प्रत्याशियों में विधायक के साथ संगठन भी रहेगा सक्रिय

भोपाल। नगर निगम चुनावों के तहत हुए वार्डो के आरक्षण ने कई पुराने पार्षदों को अपना क्षेत्र छोडऩे पर मजबूर किया तो विधायकों के लिए भी अब पार्षद प्रत्याशी तय करना आसान नहीं होगा। शहर व राजनीतिक दलों की स्थानीय राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि इस बार की परिषद में संभव है 90 फीसदी चेहरे नए हो। पिछली परिषद में 40 फीसदी से अधिक पार्षद तीन से पांच बाद चुनाव लडऩे वाले थे, लेकिन आगामी परिषद में शायद ऐसा न हो।


गौरतलब है कि पिछली बार पार्षद प्रत्याशी चयन में विधायकों की ही भूमिका थी। ऐसे में विधानसभा वार जो पार्षद तय हुए, वे विधायकों से जुड़े हुए ही थे। लेकिन अभी जो राजनीतिक बदलाव चल रहा है, आगामी चुनाव में ऐसा संभव नहीं लगता। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संगठन कई स्तरों पर बदलाव कर रहे हैं।

भाजपा की ही बात करें तो गोविंदपुरा विधानसभा के पार्षद तय करने में क्षेत्रीय विधायक कृष्णा गौर के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा भी दखल रखेंगे। मध्य और दक्षिण पश्चिम विधानसभा में भाजपा के पूर्व विधायक मंत्री उमाशंकर गुप्ता- सुरेंद्रनाथ् सिंह के साथ सांसद प्रज्ञासिंह ठाकुर भी भूमिका तय करेगी। यही स्थिति हुजूर विधानसभा में होगी। विधायक रामेश्वर शर्मा के साथ यहां अब संगठन में मजबूत स्थिति में आए भगवानदास सबनानी की भूमिका भी प्रमुख रहेगी। संभव है पार्षद प्रत्याशी संगठन अपने स्तर पर तय करें और उसे जिताने का जिम्मा स्थानीय विधायक को दें।

ुपुराने चेहरों को नए क्षेत्र में जाना आसान नहीं


- कांग्रेस के चार बार से पार्षद मोहम्मद सगीर वार्ड 41 से चुनाव लडऩा चाहते हैं, लेकिन वार्ड 41 में कई स्थानीय कांग्रेसी पहले से तैयारी कर रहे हैं और यहां उनके लिए उतना आसान नहीं होगा।


- भाजपा की ओर से 1999 से पार्षद का चुनाव लड़ रहे, महेश मकवाना अब वार्ड 12 या फिर 13 से उतरने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इन वार्डों में भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी अपने कुछ स्थानीय नेताओं को उतारना चाहते हैं, ऐसे में दिक्कत हो सकती है।


- कांग्रेस से गोविंदपुरा विधानसभा के वार्ड 67 के पार्षद रहे गिरीश शर्मा अब भाजपा में आ गए, इनके लिए नए क्षेत्र के साथ नई जगह पर चुनाव लडऩा काफी चुनौतीभरा होगा।


- पूर्व नगर निगम परिषद अध्यक्ष सुरजीतसिंह चौहान भी अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकते, हालांकि वे संगठन के निर्देश का पालन करने की बात कह रहे हैं, लेकिन यहां जिसे भी टिकट मिलेगा, उसमें इनकी दखल भी होगी।
- वार्ड 83 से भाजपा की ओर से पार्षद रही मनफूल श्याम मीणा वार्ड आरक्षण के बाद अब अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएगी, साथ ही इनके पति श्याम मीणा के कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद कोलार में नए क्षेत्र की तलाश करना होगी।


- हुजूर विधानसभा के वार्ड क्रमांक दो से पार्षद रहे पूर्व एमआइसी कृष्णमोहन सोनी ने चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा की है, लेकिन पार्टी के स्थानीय वरिष्ठ नेता होने के नाते बैरागढ़ टिकट वितरण में दखल देने की स्थिति है।

इनका कहना
मैंने पहले ही कह दिया है कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा। जिस तरह आरक्षण हुआ है उससे परिषद में फ्रेश चेहरे अधिक नजर आ सकते हैं।
- कृष्णमोहन सोनी, पूर्व एमआईसी
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मौजूदा परिषद में मैं सबसे वरिष्ठ पार्षद हूं। चार बार से लगातार पार्षद हूं। अगला चुनाव भी लडूंगा। वार्ड 12 या फिर वार्ड 13 में मौका मिल सकता है।
- महेश मकवाना, पूर्व एमआईसी


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देवेंद्र शर्मा Reporting
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