ई-वेस्ट नियम लागू होने के 3 साल बाद पीसीबी ढूंढ़ रहा सर्विस सेंटर्स

लापरवाही: प्रदूषण की मुख्य वजह बन रहे इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ के निष्पादन की नहीं है पुख्ता व्यवस्था
एनजीटी के निर्देश पर पीसीबी की अनुमति के बाद ही संचालित हो सकेंगे सर्विस सेंटर्स

By: manish kushwah

Published: 06 Jan 2020, 01:19 AM IST

भोपाल. शहर में इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ (ई-वेस्ट) का निष्पादन तो दूर, जिम्मेदारों को ये भी नहीं पता कि रोजाना कितना ऐसा कचरा निकल रहा है। अब जाकर प्रदूषण नियंत्रण मंडल (पीसीबी) ने सर्विस सेंटर्स को रिफरविशमेंट कैटेगिरी में पंजीयन कराना अनिवार्य किया है। पीसीबी को पता नहीं है कि राजधानी समेत प्रदेशभर में कितने इलेक्ट्रॉनिक्स सर्विस सेंटर्स हैं और यहां से कितना ई-वेस्ट निकल रहा है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में ई-वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए थे। वर्ष 2016 में इनमें संशोधन कर धारा जोड़ी गई थी कि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली कंपनियां ई-वेस्ट को न केवल बाजार से बुलाएंगी, बल्कि इनका वैज्ञानिक निष्पादन करेंगी।


नियम जिनका नहीं किया पालन
सर्विस सेंटर्स को रजिस्ट्रेशन के बाद उतना वेस्ट खरीदना जरूरी है, जितना उनके सेंटर से निकल रहा है। वर्ष 2011 में ई-वेस्ट मैनेजमेंट के रूल्स बनने से पहले कचरा प्रबंधन के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स थे। इसके बाद बॉयोमेडिकल वेस्ट और बाद में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए रूल्स बनाए गए। वर्ष 2016 में ई-वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नियमों में संशोधन किया गया। इसके अनुसार कंपनियां जितने इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाएंगी, उतना ई-वेस्ट बाजार से रिकवर करना होगा। इसके लिए मोबाइल कंपनियों समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के सर्विस सेंटर को सोर्स बनाया जाना था। यहां ई-वेस्ट इक_ा कर जानकारी पीसीबी को देनी थी, ताकि इसका निष्पादन हो सके। 

एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के निर्देश के बाद मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने ई-वेस्ट मैनेजमेंट प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। इसके तहत सर्विस सेंटर्स को निश्चित समयावधि में ई-वेस्ट रिकवर करना होगा। इसका वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन करना है।
इम्तियाज अली, संचालक, सार्थक प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सबिलिटी अथॉरिटी

manish kushwah Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned