सैम्पल हुआ नहीं, बुजुर्ग की मृत्यु के बाद घर के बाहर चस्पा कर दिया कोविड बोर्ड

कोरोना की सैम्पलिंग सूची में लगातार हो रही लापरवाही, परिजन हो रहे परेशान

By: Pradeep Kumar Sharma

Updated: 17 Sep 2020, 01:11 AM IST

भोपाल. कोरोना को लेकर अब गंभीरता कम होता जा रही है, मौत के बाद तक तय नहीं हो पा रहा कि मरीज पॉजिटिव है या नहीं। सौभाग्य नगर सैमरा निवासी बुजुर्ग महिला की हार्ट बीट कम होने पर उनके बड़े पुत्र अमित कुमार तिवारी जेपी अस्पताल में दिखाने ले गए। डॉक्टरों ने उनको देखने के बाद 7 सितंबर को ही मृत घोषित कर दिया। अमित उनको लेकर घर आ गए। अमित ने बताया कि 8 सितंबर की सुबह मोबाइल पर एक फोन आया जिसमें कोई लता तिवारी का नाम पूछा और एक मैसेज भेजा कोविड पॉजिटिव होने का। उन्होंने मना किया कि उनकी मां का टेस्ट ही नहीं हुआ उनका नाम आशा तिवारी है। इसी बीच एक टीम आई और लता तिवारी के नाम का कोविड बोर्ड चस्पा कर पूरे घर को आईसोलेट कर दिया। उन्होंने बताया भी कि मां का नाम आशा तिवारी था। इसके बाद उन्होंने बोर्ड से लता का नाम काट कर आशा किया और चस्पा कर चले गए। इस दौरान बहसबाजी भी हुई, लेकिन घर के बाहर बोर्ड चस्पा है। अमित ने बताया कि मां की खबर सुनकर परिवारीजन काफी दूर से आए थे, कोई 600 किमी कार चलाकर सैमरा पहुंचा, लेकिन कोविड के बोर्ड के चलते बाहर से ही लौटना पड़ा। आठ सितंबर से पूरे घर को आईसोलेट कर रखा है। इस संबंध में कोरोना कंट्रोल रूम तक फोन कर पूछ चुके हैं, लेकिन कोई बताने वाला नहीं है। सिर्फ इतना बोलते हैं कि सूची में यही नाम आए हैं। 20 तक पूरा परिवार आइसोलेट है।

एम्बुलेंस भेजी कहीं, फोन पहुंचा कहीं और
गड़बड़ी का एक और उदाहरण सामने आ चुका है। जिसमें शहर सर्किल के एक कर्मचारी ने फोन कर बताया कि आप की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है। वो फोन पहुंचा होशंगाबाद रोड की एक पॉश कॉलोनी के बड़े कारोबारी के पास। पूरे परिवार में हड़कंप मच गया। क्योंकि उनके पास एक दिन पहले सैम्पल निगेटिव की रिपोर्ट का मैसेज आया था। लेकिन फोन करने वाले ने कहा कि वो उन्हें लेने आ रहे हैं तैयार हो जाओ। इसके बाद जब टीम उन्हें लेने पहुंची पुराने शहर में। तब स्पष्ट हुआ कि सूची में मोबाइल नंबर गलत था।

सीएम ने की राजधानी की समीक्षा
भोपाल. कोरोना को लेकर सीएम शिवराज सिंह ने बुधवार को भोपाल जिले के कोरोना की समीक्षा की। वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से हुई समीक्षा में कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि अब लोग सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी इलाज के लिए रुख कर रहे हैं। अकेले बंसल में 66 मरीज एडमिट हैं, बाकी अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। वर्तमान में जिले के हमीदिया, एम्स, जेपी व अन्य अस्पतालों में भर्ती हैं। आयुष्मान योजना के तहत जिले में 300 बेडों का आरक्षण किया जा चुका है।

Pradeep Kumar Sharma
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