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शिक्षा के बहाने खुला निर्माण का रास्ता, वनों पर संकट


15 साल में उजड़ा 278 एकड़ का जंगल, सबसे ज्यादा 53 एकड़ में संस्कार वैली स्कूल का निर्माण

भोपाल

Published: August 14, 2021 01:05:24 am

भोपाल. शासन प्रशासन की तरह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने शहर किनारे वनक्षेत्र में निर्माण की राह खोले रखी है। पब्लिक सेमी पब्लिक लैंडयूज के नाम पर स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के लिए वनक्षेत्र में बड़े निर्माण की राह खोली। नतीजा चंदनपुरा में संस्कार वैली स्कूल और अन्य शैक्षणिक व अद्र्ध सार्वजनिक उपयोग के निर्माणों के तौर पर सामने है। साल दर साल ये दायरा बढ़ा रहे हैं, जिससे बाघ व अन्य वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ रहा है।
एनजीटी के निर्देश पर पेश रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2003 से 18 के बीच 15 साल में केरवा से कलियासोत डैम के बीच 112 हेक्टेयर (276 एकड़) जंगल को उजाड़ कर वहां पक्के निर्माण हुए या फार्म हाउस बने। चंदनपुरा गांव में घने जंगल और बाघ भ्रमण क्षेत्र में सबसे ज्यादा 21.31 हेक्टेयर (52.65 एकड़) में निर्माण संस्कार वैले स्कूल का है। इसके बाद फार्म हाउस, रिसॉर्ट और निजी मकानों के निर्माण हुए हैं।
भोपाल मास्टर प्लान 2031 के ड्राफ्ट में भी मास्टर प्लान 2005 की तरह ही न शहर के वन क्षेत्र का ध्यान रखा गया, न पर्यावरण का। अब वन में कलियासोत जलभराव वाले ग्राम खुदागंज, बरखेड़ी खुर्द, बरखेड़ी कलां क्षेत्र तक को पीएसएपी दर्शा कर चंदनपुरा की तरह यहां भी स्कूल कॉलेजों के लिए निर्माण की छूट का रास्ता बनाया जा रहा है, जबकि चंदनपुरा, चीचली, मेंडोरा, मेंडौरी, छावनी क्षेत्र हाईकोर्ट के आदेश में परिभाषित वन की श्रेणी में है, इसकी पुष्टि पर्यावरण, वन जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय की रिपोर्ट से होती है।
इसी आधार पर एनजीटी ने 6 फरवरी 20 को आदेश जारी कर क्षेत्र को तीन माह के अंदर जंगल मेपिंग कर नोटिफाइ कर वन विभाग को जंगल की भूमि हस्तांतरित करने का आदेश भी दिया था। इस संबंध में हाल ही में शासन ने नोटिफिकेशन जारी किया है। यह क्षेत्र रातापानी अभ्यारण्य से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र बाघ भ्रमण क्षेत्रों में आता है। वन विभाग के पत्र मुताबिक 40 बाघों का भ्रमण क्षेत्र बताया गया है। स्थाई रूप से इस क्षेत्र में 20 बाघ आश्रित हैं। यह बाघों का प्रजनन क्षेत्र भी है। यह क्षेत्र संवेदनशील होने के कारण संरक्षित किया जाना चाहिए।
शिक्षा के बहाने खुला निर्माण का रास्ता, वनों पर संकट
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बताई हकीकत
एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओइएफ) के अधिकारी ने केरवा के जंगलों का सर्वे कर रिपोर्ट पेश की। एमओइएफ के रीजनल ऑफिस में तत्कालीन एपीसीसीएफ डॉ. तेजिंदर सिंह ने 2018 में तैयार रिपोर्ट में बताया कि 2003 में जंगल के बीच मेंडोरा, मेंडोरी व चंदनपुरा गांवों में 45.99 हेक्टेयर जमीन पर गैर वन गतिविधि थी, वर्ष 2018 में ये 158.05 हेक्टेयर में फैल गई। यानी 15 साल में 112.06 हेक्टेयर पर जंगल उजाड़ दिया गया।

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