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आदिवासियों के नाम पर फर्जीवाड़ा: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट

-आदिवासियों को जैविक खेती का गुर सिखाने के नाम पर करोड़ों का ‘खेल’
-110 करोड़ रुपए की थी योजना, ३५ आदिवासी बाहुल्य जिलों में वर्ष २०१७-१८ में हुई थी लागू

भोपाल

Updated: January 14, 2022 10:51:52 pm

भोपाल. आदिवासी परिवारों को सक्षम बनाने के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा मंजूर किए गए जैविक खेती प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े के शिकायत पर केंद्रीय जनजाति आयोग ने कार्रवाई की है। आयोग ने १५ दिसंबर २०२१ को मंडला कलेक्टर को पत्र लिखकर योजना के हितग्राहियों की पहचान करने के साथ ही इसमें किए गए फर्जीवाड़ेे के आरोपों की जांच कर आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने को कहा है। इस पर मंडला कलेक्टर हर्षिका सिंह ने सात जनवरी को जिला पंचायत मंडला के सीईओ सुनील दुबे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें कृषि विभाग की प्रभारी उप संचालक मधु अली को बतौर सचिव और नायब तहसीलदार राजेंद्रनाथ प्रजापति को सदस्य रखाा गया है।यहां बता दें कि १५ दिन में कलेक्टर कार्यालय को अनुसूचित जनजाति आयोग को रिपोर्ट देना है। योजना में फर्जीवाड़े की शिकायत आरटीआइ एक्टिविस्ट पुनीत टंडन ने अनुसूचित जनजाति आयोग में की थी। शिकायत में बताया गया है कि वर्ष २०१६-१७ में मंजूर योजना में १५ पीवीटीजी जिले (विशेष जनजाति समूह वाले जिले) के अलावा २० अन्य आदिवासी जिलों के लिए ११० करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इस योजना का क्रियान्यन कृषि विभाग द्वारा किया गया। इसमें नियम विरुद्ध योजना का क्रियान्वयन ही बदल दिया गया। योजना के अनुसार वर्मी कम्पोस्ट किट के साथ ही जैविक खाद बनाने के लिए आदिवासी हितग्राहियों को सक्षम बनाना था, पर कृषि विभाग ने वर्मी कम्पोस्ट की जगह बीज किट मुहैया कराए गए। इसके अलावा हितग्राहियों को राशि बैंकों में नहीं दी गई। मालूम हो कि वर्ष २०१8 में कांग्रेस सरकार के दौरान विधानसभा में ये मामला उठा था। इसके बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सात विधायकों की जांच समिति बनाई थी। हालांकि सरकार बदलने के बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
आदिवासियों के नाम पर फर्जीवाड़ा: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट
आदिवासियों के नाम पर फर्जीवाड़ा: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट
आरटीआई में मिली चौकाने वाली जानकारी
योजना के क्रियान्वयन और इसके हितग्राहियों की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई तो पीवीटीजी वाले जिलों में संरक्षित जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के हितग्राहियों के अलावा अन्य जनजाति और सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों को लाभ दिया गया। स्थिति ये है कि पीवीजीटी क्षेत्र के हितग्राहियों की सूची एवक अन्य आदिवासी हितग्राहियों की सूची तकरीबन एक समान है। सूचियों में थोड़ा परिवर्तन किया गया है। मंडला जिले के कुन्द्रा गांव की सूची में कई अन्य जातियों के लोगों को लाभ देने की भी बात सामने आई है।
अन्य जिलों में भी फर्जीवाड़े की आशंका
आदिवासियों को जैविक खेती के लिए जागरुक करने के उद्देश्य से लाई गई इस योजना में पीवीटीजी वाले 15 जिलों के लिए केंद्र सरकार ने शत प्रतिशत २० करोड़ रुपए दिए थे, जबकि आदिवासी बाहुल्य 15 जिलों के लिए कुल 90 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। इनमें से 54 करोड़ रुपए केंद्र सरकार तो 36 करोड़ राज्य सरकार का अंश था। जानकारी के मुताबिक इस योजना में अन्य जिलों से मिली हितग्राहियों की सूची में गड़बड़ी है।

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