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आतंकी हमले को चीते सी फुर्ती और चट्टान से मजबूत इरादों से नाकाम करने में सक्षम सीटीजी कमांडो

-एनएसजी की तर्ज पर मप्र की सुरक्षा के लिए है युवा जोश से लबरेज सीटीजी
-किसी भी परिस्थिति और हमले से निपटने में सक्षम ५० जवान

भोपाल

Published: January 14, 2022 11:09:49 pm

मनीष कुशवाह
भोपाल. नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) से हम सभी भंलिभांति परिचित है। अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों से लैस एनएसजी कमांडो किसी भी आतंकी हमले को नाकाम करने के साथ ही आतंकियों को ठिकाने लगाने वाले एनएसजी कमांडों की तरह ही मध्यप्रदेश में सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं काउंटर टेरिज्म ग्रुप (सीटीजी) के ५० कमांडो। कठिन से कठिन ट्रेनिंग से निकले ये कमांडो मप्र के किसी भी हिस्से में हुए हमले को नाकाम करने और आतंकियों को नाश करने के लिए तैयार रहते हैं। दरअसल वर्ष २००२ में गांधीनगर के अक्षरधाम में हुए आतंकी हमले के बाद सभी राज्यों में एनएसजी की तर्ज पर कमांडो तैयार करने की योजना पर काम शुरू हुआ था। इसी क्रम में वर्ष २००३ में मध्यप्रदेश में सीटीजी की स्थापना हुई। इसके लिए नक्सल विरोधी अभियान के लिए तैयार की गई टास्क फोर्स से जवानों को लिया गया। एसटीजी का बेस कैंप भोपाल है। यहां इन कमांडों की ट्रेनिंग निरंतर जारी रहती है। भोपाल में बेस कैंप होने पर कमांडो यहां से मप्र के किसी भी हिस्से में कम से कम समय पर पहुंच सकते हैं। भोपाल में सूचना मिलने पर अधिकतम २० मिनट में कमांडो ऑपरेशन शुरू करने की काबिलियत रखते हैं।
कमांडो बनने के लिए दो स्तर की टफ ट्रेनिंग
सीटीजी कमांडो के लिए अधिकतम 35 वर्ष है। कमांडो तक का सफर तय करने के लिए युवा जांबाजों को कई पड़ाव पार करना पड़ते हैं। हॉक फोर्स के लिए पुलिस की अन्य इकाइयों से जवानों की भर्ती की जाती है। कठिन ट्रेनिंग के बाद जवान हॉक फोर्स का हिस्सा बनते हैं। सीटीजी के लिए कमांडो का चयन हॉक फोर्स में से किया जाता है। इसके लिए भी जवानों को कई स्तर के टेस्ट से गुजरना जरूरी है। हॉक फोर्स के जवानों के पास सुदूर वन क्षेत्रों में ऑपरेशन्स का अनुभव होता है। ट्रेनिंग के दौरान बीओएसी (बैटल ऑपसिटिकल कोर्स) के साथ ही यूएसी (अनआम्र्ड कॉम्बेट) यानी बगैर हथियारों के साथ लडऩे की ट्रेनिंग दी जाती है। ये कमांडो जूडो, कराटे समेत अन्य युद्ध विधाओं में पारंगत होते हैं।
कमंाडो बनने 90 दिन की इंडक्शन ट्रेनिंग
सीटीजी कमांडो की शुरुआती 90 दिन की इंडक्शन ट्रेनिंग कठिनतम है। इसमें सात दिन का वो कोर्स भी होता है, जिसमें जवानों को बगैर किसी राशन और पानी के ऑपरेशंस को अंजाम देना पड़ता है। इसमें खाने की व्यवस्था करने केक साथ ही खुद को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के साथ ही टास्क पूरा करना जरूरी है। ट्रेनिंग में फायरिंग, ऊंची इमारतों पर चढऩा (बिल्डिंग क्लाइंबिंग), आपात स्थिति में इमारतों मे घुसना (बिल्डिंग इंटरवेंशन), दरवाजे को विस्फोट से तोडऩा (डोर ब्रीचिंग) के साथ ही हर परिस्थिति में आपात स्थिति पर काबू पाना सिखाया जाता है।
आतंकी हमले को चीते सी फुर्ती और चट्टान से मजबूत इरादों से नाकाम करने में सक्षम सीटीजी कमांडो
आतंकी हमले को चीते सी फुर्ती और चट्टान से मजबूत इरादों से नाकाम करने में सक्षम सीटीजी कमांडो

इन आधुनिक हथियारों और उपकरणों से रहते हैं लैस
स्नाइपर राइफल: सीटीजी कमांडो स्नाइपर राइफल से दुश्मनों को निशाना बनाने में सक्षम रहते हैं।
कॉर्नर शॉटगन: दीवार या अन्य किसी अवरोध के पीछे छिपे दुश्मन को ढेर करने के लिए कॉर्नर शॉटगन का उपयोग करते हैं। कैमरे से लैस इस शॉर्टगन से दुश्मन की सटीक स्थिति पता चलती है।
ब्रीचर वैपन: अवरोधों और दरवाजों को विस्फोट से तोडऩे के लिए ब्रीचर वैपन का उपयोग करना इन कमांडो को बखूबी आता है।
बिल्डिंग क्लाइंबिंग उपकरण: सीटीजी कमांडो ऊंची इमारतों पर चढऩे में सक्षम हैं। इसके लिए जरूरी उपकरण इनके पास हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
एनएसजी के साथ ही यूएसए में ट्रेनिंग
सीटीजी कमांडों को ऑपरेशन्स के दौरान नए तरीकों से रूबरू कराने के लिए एनएसजी कमांडो के साथ साल में दो बार ट्रेनिंग करते हैं। इसके अलावा समय समय पर अमरीका में एटीए (एंटी टेरेरिज्मि असिस्टेंस) प्र्रोग्राम के तहत विशेष ट्रेनिंग लेते हैं। सीटीजी कमांडो की फिटनेस जांचने के लिए साल में दो बार टेस्ट भी लिए जाते हैं।

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