600 से अधिक निजी कर्मचारियों का नहीं है पुलिस वैरिफिकेशन

600 से अधिक निजी कर्मचारियों का नहीं है पुलिस वैरिफिकेशन
Bhopal Railway Station

Ram kailash napit | Updated: 12 Oct 2019, 03:03:03 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

भोपाल स्टेशन पर कॉन्ट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों के मामले में अनदेखी

भोपाल. भोपाल रेलवे स्टेशन परिसर के वॉशिंग पिट में हुई गैंगरेप की घटना के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को छोड़कर अन्य सभी विभागों में कॉन्ट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे गए हैं, इन कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन कराने और दस्तावेज रेलवे को सौंपने की जिम्मेदारी कॉन्ट्रेक्टर को दी गई है, लेकिन अधिकतर विभागों में कार्यरत इन निजी कर्मचारियों की जानकारी रेलवे के पास नहीं है और न ही इनके पुलिस वैरिफिकेशन की कॉपी आरपीएफ पोस्ट व जीआरपी थाने के पास है।

हर हफ्ते बदल जाते हैं 10 फीसदी सफाईकर्मी
भोपाल रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्ट में 92 सफाईकर्मी काम करते हैं। इनमें से 10 फीसदी सफाईकर्मी हर हफ्ते बदल जाते हैं और इनकी जगह नए रखे जाते हैं। ठेकेदार द्वारा कॉन्ट्रेक्ट की शुरुआत में तो कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन कराकर रेलवे के पास जमा कराया जाता है, लेकिन जब कुछ महीनों में कर्मचारी बदल जाते हैं तो उनका वैरिफिकेशन रेलवे को नहीं सौंपा जाता। यही हाल अन्य विभागों का भी है। ऐसे में रेलवे के पास भी यह जानकारी नहीं होती है कि वर्तमान में स्टेशन पर विभिन्न विभागों में कौन-कौन कर्मचारी हैं। रेलवे के पास सिर्फ प्रत्येक विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या होती है।

सबसे अधिक कमर्शियल विभाग में
शुक्रवार को पत्रिका टीम ने भोपाल रेलवे स्टेशन का जायजा लिया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। स्टेशन पर रेलवे स्टाफ से अधिक तादाद में निजी कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां विभिन्न विभागों में तीन शिफ्ट में 600 से अधिक कॉन्ट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे गए हैं। कमर्शियल विभाग में करीब 400 ऐसे कर्मचारी हैं, जो ठेके पर हैं। स्टॉल पर मौजूद वेंडर, ट्रेन में खाद्य पदार्थ बेचने वाले वेंडर, सफाई कर्मचारी, लीज होल्डर के वेंडर, पार्सल पोर्टर, पार्र्किंंग के कर्मचारी इस दायरे में आते हैं।

रेलवे परिसर में निजी कर्मचारी रखे जाते हैं तो ठेकेदार द्वारा उनका पुलिस वैरिफिकेशन कराकर रेलवे के पास जमा कराया जाता है। औचक निरीक्षण में ऐसा नहीं मिलता है तो जुर्माना लगाया जाता है।
अनुराग पटेरिया, सीनियर डीसीएम (कमर्शियल), भोपाल मंडल

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