4 महीने से उखड़ी हैं राजधानी की सडक़ें, मरम्मत की बजाय भरवा रहे मलबा-बजरी और मिट्टी

4 महीने से उखड़ी हैं राजधानी की सडक़ें, मरम्मत की बजाय भरवा रहे मलबा-बजरी और मिट्टी
4 महीने से उखड़ी हैं राजधानी की सडक़ें, मरम्मत की बजाय भरवा रहे मलबा-बजरी और मिट्टी

KRISHNAKANT SHUKLA | Updated: 06 Oct 2019, 12:26:24 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

शहर की सडक़ें गांव से बदतर : एजेंसियों ने सुधार के नाम पर घटिया मेंटेनेंस करवा दिया, नतीजा समस्या और बढ़ गई

भोपाल. राजधानी की अधिकतर सडक़ें उखड़ी पड़ी हैं। जनता चार महीने से परेशान है, लेकिन सरकारी एजेंसियों के जिम्मेदार मौसम खुलने पर सुधार का बहाना करते आ रहे हैं। अक्टूबर के पहले सप्ताह में बारिश थमी तो उम्मीद जागी कि अब हालत सुधरेगी, लेकिन खंदक बन चुके गड्ढों में मलबा, बजरी और मिट्टी भरकर लीपापोती की जा रही है। उड़ रही धूल ने शहर की आबोहवा प्रदूषित कर दी है। आंखों और फेफड़ों की समस्या बढ़ गई हैं। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वाहनों का मेंटेनेंस बढ़ गया है, तो पेट्रोल-डीजल की खपत भी।

4 महीने से उखड़ी हैं राजधानी की सडक़ें, मरम्मत की बजाय भरवा रहे मलबा-बजरी और मिट्टी

लाइव- 01 - ऑफ रोडिंग ट्रैक में तब्दील हुई सडक़

गणेश मंदिर से बीजेपी कार्यालय चौराहे तक 850 मीटर की सडक़ पूरी तरह से उखड़ चुकी है। बारिश रुकी तो नगर निगम की ओर से गिट्टी-मलबे से गड्ढे पाटे गए। घटिया हुए काम से यहां ब्रेक लगाते ही गाड़ी फिसलने लगती है। इस सडक़ पर वाहन चलाना किसी ऑफ रोड चैलेंज जैसा अनुभव कराता है। यहां पेचवर्क शुरू हुआ है, लेकिन इसकी गुणवत्ता देखकर नहीं लगता कि काम टिकाऊ हो रहा है।

4 महीने से उखड़ी हैं राजधानी की सडक़ें, मरम्मत की बजाय भरवा रहे मलबा-बजरी और मिट्टी

लाइव- 02 - बागमुगालिया जाना हुआ मुश्किल

होशंगाबाद रोड से बागमुगालिया की ओर नहर के किनारे-किनारे जाने वाली सडक़ भी बदहाल है। इस सडक़ के चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटे जा चुके हैं। कई जगह सडक़ खोदकर आवाजाही रोक रखी है, फिर भी महीनों से काम बंद पड़ा है। क्षेत्र की कॉलोनियों के रहवासी गड्ढों से भरी सडक़ से आने-जाने को मजबूर हैं। बारिश के महीनों में स्ट्रीट लाइट भी बंद होने से रात को निकलना दूभर हो रहा है।

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लाइव- 03 - पेचवर्क के बाद और बढ़ गई समस्या

कस्तूरबा अस्पताल के पास उधड़ी सडक़ का पेचवर्क जिस बेतरतीब तरीके से किया गया है, उससे वाहन चालकों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। बजरी व सीमेंट को बिना मिक्स किए ऐसे ही भर दिया गया है। यही वजह है कि गड्ढे जस के तस हैं। वाहन चालक इनसे गुजरते नियंत्रण खोकर धराशायी हो रहे हैं।

लाइव- अपनी गर्दन बचाने के लिए भरवाए गड्ढे

हबीबगंज क्षेत्र में गणेश मंदिर चौराहे के गड्ढे बिल्डिंग तोडऩे पर निकले मलबे से भरे गए हैं। साफ है कि मरम्मत के दौरान किसी प्रकार के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया है। जिम्मेदार एजेंसी ने सिर्फ गर्दन बचाने के लिए बेतरतीब गड्ढे भरवा दिए हैं। ऐसे में वाहन चालक तो दूर पैदल चलने वालों को भी मुश्किल हो रही है।

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