दो साल पहले घूमते थे आवारा जानवर, अब जगमगा रहा मीरा नगर बस्ती स्कूल

- प्रभारी और शिक्षकों ने मिलकर बदली बस्ती के स्कूल की दशा

By: praveen malviya

Published: 13 Oct 2021, 01:19 AM IST

भोपाल. हबीबगंज अंडर ब्रिज से बावडिया कलां जाने वाली सड़क से सटी मीरा नगर बस्ती के बीच में स्थित सरकारी प्रायमरी स्कूल.़.़.़। सरकारी मल्टी के पास बना यह स्कूल, दो साल पहले तक शहर के सबसे बदहाल परिसरों में शुमार था। बाउंड्रीवॉल थी नहीं और कक्षाओं में कचरा भरा रहता था। पूरे परिसर में मवेशी और आवारा तत्वों का कब्जा था। नशे से लेकर अपराध तक का अड्डा बने स्कूल में शिक्षक भी नाक-भौं सिकोड़कर आते थे। आखिर में इसे बदलने का बीड़ा स्कूल के ही शिक्षकों ने उठाया, जिम्मेदारों से लेकर निजी संस्थाओं ने साथ दिया और आज स्कूल की हालात इतनी बदल गई है कि इसे पहली नजर में पहचानना मुश्किल है। एक स्कूल परिसर के बदलाव की कहानी बाकी स्कूलों के लिए प्रेरणा भी है कि कोशिश की जाए तो किसी भी स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

कक्षाओं में कचरा, परिसर गंदा

गंदगी से पटी बस्ती के बीच में स्थित नवीन शासकीय प्राथमिक शाला मीरा नगर की सबसे बड़ी समस्या चारदीवारी ना होना था। ऐसे में शिक्षकों के जाते ही, बच्चे और बस्ती के युवा यहां आ जाते। असामाजिक तत्व अड्डा जमाते तो पूरे इलाके का कचरा भी स्कूल में ही फिंकता। इतना ही नहीं इलाके के मवेशी भी यहां घूमते रहते थे।

ताले में कंकड़ डाल देते थे बच्चे

स्कूल दुर्दशा को 2019 में पत्रिका ने बदहाल स्कूलों की श्रंृखला में उठाया था। जब स्कूल की बदहाली की बेहद चौंकाने वाली स्थिति सामने आई तो जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर स्थाई जनप्रतिनिधियों ने स्कूल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने की कोशिश शुरू की। सबसे पहले चारदीवारी बनाई जानी शुरू हुई। जब चारदीवारी बनाई गई और सुधार की कोशिशें हुई तो पहले-पहल कुछ लोगों ने विरोध किया। शिक्षक बताते हैं, यहां दीवार बनाने से लेकर ताला लगाना चुनौती था। लोग रोजाना ताले में पत्थर भर देते थे जिससे चाबी ही नहीं जाती थी। या तो ताला ठोंककर कंकड़ निकालते थे या ताला ही तोडऩा पड़ता था। परिसर में कचरा भी फेंका गया लेकिन शिक्षक डटे रहे।

बदल गई तस्वीर धीरे-धीरे प्रयास रंग लाने लगे, चारदीवारी बनी तो स्कूल की पुताई और सफाई भी हो गई। कक्षाओं में पंखे और लाइट लगीं, बेंच जमी और आखिर में स्कूल की दशा बदल गई। इतना ही नहीं स्कूल परिसर के साथ आस-पास को भी संवारा गया। बचपन संस्था की मदद से पास की पहाड़ी पर रखी चट्टानों तक पर पेंट कराकर हिंदी के अक्षर और संख्याएं लिखी गईं। आखिर में स्कूल की दशा बदल गई।

पिछले कई सालों से स्कूल में गंदगी और अव्यवस्थाएं थीं, सुधार की कोशिशें व्यर्थ हो रही थीं, लेकिन फिर अधिकारियों के निर्देशन में बदलाव शुरू किया। सबसे पहले चार दीवारी बनाई गई। पहले-पहल समस्याएं आईं, लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलते गए।

- उमेश माथुर, प्रभारी, नवीन शासकीय प्राथमिक शाला मीरा नगर

praveen malviya Reporting
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