अब 180 किमी प्रतिघंटा के रफ्तार से दौड़ेगी भोपाल शताब्दी, लगेगा स्वदेशी इंजन

अब 180 किमी प्रतिघंटा के रफ्तार से दौड़ेगी भोपाल शताब्दी, लगेगा स्वदेशी इंजन

Deepesh Tiwari | Publish: Aug, 14 2019 06:40:29 PM (IST) | Updated: Aug, 14 2019 09:42:25 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

अन्य शताब्दी shatabdi Express ट्रेनों सहित राजधानी Rajdhabi express एक्सप्रेस व दूरंतो duranto जैसी ट्रेनों की स्पीड में भी होगी बढ़ौतरी...

भोपाल। दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन nizammudin station से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हबीबगंज habibganj railway station रेलवे स्टेशन तक आने वाली भोपाल शताब्दी bhopal shatabdi एक्सप्रेस सहित देश की विभिन्न शताब्दी shatabdi , राजधानी rajdhani व दूरंतो duranto जैसी तेज रफ्तार fast train वाली ट्रेनों की जल्द ही स्पीड speed में इजाफा increasing speed होने जा रहा है।

इसके तहत भारतीय रेलवे indian railway ने 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाला एक इंजन तैयार किया है। इस इंजन को पश्चिम बंगाल स्थिति चिरंजन लोकोमोटिव वक्र्स फैक्ट्री में तैयार किया गया है। वहीं यह इंजन पूरी तरह से स्वदेश में ही निर्मित है। इससे राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की स्पीड में बढ़ौतरी की जा सकेगी।

रेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि नए लोकोमोटिव इंजन से प्रीमियम ट्रेनों का अधिक गति से संचालन हो सकेगा।

मंत्रालय के मुताबिक राजधानी rajdhani , शताब्दी shatabdi और दूरंतो duranto जैसी ट्रेनों की गति में इजाफा होगा। अभी शताब्दी एक्सप्रेस की अधिकतम स्पीड 155 किमी प्रतिघंटा है।

मेक इन इंडिया के तहत बनाया: make in india
अपने एक ट्वीट में रेल मंत्री पीयुष गोयल ने बताया कि इस इंजन को मेक इन इंडिया make in india के तहत तैयार किया गया है। इससे ट्रेनों को वह गति मिल सकेगी, जो अब तक नहीं थी। चितरंजन लोकोमोटिव वक्र्स ने इस इंजन को मार्च 2019 में ही तैयार किया था, लेकिन अब इसे टास्क सौंपा गया है।

देश के महत्वपूर्ण रुटों पर ट्रेनों की गति में इजाफा करने के मकसद से इस रेल इंजन को तैयार किया गया है। ज्ञात हो कि मिशन रफ्तार के तहत रेलवे देश भर में अपने नेटवर्क पर ट्रेनों की औसत गति बढ़ाने पर काम कर रहा है।

लॉच होगा कमांडो फोर्स का नया दस्ता:
वहीं अब रेलवे का भी अपना कमांडो फोर्स coras indian railways force होगा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस कमांडो दस्ते को लॉच होना है। रेलवे ने बेहतर सुरक्षा व संपात्ति के संरक्षण के लिए 1200 कमांडो को देश के विभिन्न इलाकों से ट्रेनिंग दी है। इसमें महिला व पुरुष कमांडो शामिल हैं।

भारतीय रेलवे को मिली पहली कमांडो फोर्स 'कोरास', जानिए खासियत : coras indian railways force ...
भारतीय रेलवे को अपनी पहली कमांडो फोर्स first commando force 'कोरास (CORAS)' है। कोरास का मतलब कमांडो फॉर रेलवे सिक्योरिटी है। कोरास coras first commando force में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स के जवान शामिल किये गए हैं।

इन कमांडो की खास तरह की यूनिफार्म होगी। इनके पास बुलेट प्रूफ जैकेट होगी और अलग तरह का हेलमेट होगा। इसके साथ ही इनके पास अत्याधुनिक हथियार भी मौजूद रहेंगे। इसमें से अधिकतर जवान 30 से 35 साल उम्र के हैं और इनकी ट्रेनिंग एनएसजी, फोर्स वन और ग्रेहाउंड जैसे कमांडोज़ के साथ में हुई है।

दरअसल रेलवे की कमांडोज फोर्स coras indian railways के इन जवानों को खासतौर पर तैयार किए गया है जो किसी भी तरह की अप्रिय हालातों से निपटने में सक्षम हैं। चाहे आतंकी हमला हो, नक्सलियों का हमला हो या फिर प्राकृतिक आपदा से यात्रियों को बचना हो, इन कमांडोज को खासतौर पर ट्रेनिंग दी गई है।

आजादी के पर्व पर ये कमांडो फोर्स रेलवे में शामिल हो गई है। यह ऐसे स्थानों पर मौजूद रहेंगे जहां पर अक्सर अप्रिय हालातों का खतरा बना रहता है। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और दंतेवाड़ा, उत्तर-पूर्व राज्यों के संवेदनशील इलाके या फिर जम्मू कश्मीर जैसी जगहों पर इन कोरास को तैनात रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जाएगी।


रेलवे के मुताबिक अभी तक देश के कुछ हिस्सों में रेलवे के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में भी दिक्कत आती थी। खासतौर पर ऐसे इलाकों में जहां पर नक्सली, आतंकी और उल्फा के हमलों का डर रहता था, लेकिन अब इन कमांडोज की मदद से रेलवे अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने की भी योजना बना रही है।


आरपीएफ के डीजीपी की माने तो इन जवानों को एनएसजी और मार्कोस की तर्ज पर ट्रेनिंग दी गई है। मार्कोस जहां समुद्री ऑपरेशन में महारत हासिल रखते हैं, वहीं एनएसजी के जवानों के पास अलग-अलग इलाकों में ऑपरेशन की महारत है। इसी तरह रेलवे के ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए कोरास को खासतौर पर तैयार किया गया है।

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