Video: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई- समिति के प्रबंधक ने घर में मारा छापा, जल्द ही बड़े खुलासे की उम्मीद

उपभोक्ता सहकारी समिति के प्रबंधक के मकानों पर छापा...

By: दीपेश तिवारी

Updated: 29 Aug 2018, 01:57 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में नगर में उपभोक्ता सहकारी समिति के प्रबंधक के घर बुधवार सुबह लोकायुक्त ने छापा मार कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में यह कार्रवाई अभी जारी है। यह कार्रवाई ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस की टीम की ओर से की गई है।

इस कार्रवाई में उपभोक्ता सहकारी समिति के प्रबंधक दीवान सिंह यादव आैर उसके भाई चंद्रभान सिंह यादव के मकानों पर छापा मारा गया है। आय से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के मामले में यह कार्रवाई की जा रही है। जिसमें जल्द ही बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है|

जानकारी के अनुसार दीवानसिंह सेवा सहकारी समितियों का संचालक है और कई सरकारी समितियों का संचालन उनके पास है। लोकायुक्त ने सुबह करीब 5 बजे दीवान सिंह के ठिकानों पर छापा मार कर छानबीन की जा रही है।

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शहर में स्थित दीवानसिंह के दो आलीशान मकानों पर पुलिस तैनात है, दीवानसिंह के यहां मिली संपत्ति का लोकायुक्त आकलन कर रही है। यह कार्रवाई राधा कुंज भवन तुलसी सरोवर के सामने ईसागढ़ रोड पर कार्रवाई की जा रही है। छापे में अब तक दो मकान 3 मंजिला और एक अन्य मकान के साथ 13 बीघा जमीन के दस्तावेज, 4 फोर व्हीलर जायलो, Swift ब्रिजा के साथ 7 दो पहिया वाहन भी मिले। इस आलिशान मकान में लिफ्ट तक लगी हुई है|

ये है मामला...
सहकारिता विभाग के समिति प्रबंधक दीवान सिंह यादव के यहां लोकायुक्त की ओर से छापा मारा गया है, दीवान सिंह यादव कोलुआ के समिति प्रबंधक हैं। ग्वालियर लोकायुक्त टीम की ओर से सुबह करीब 5 बजे छापा मार कार्रवाई की गई, जिसके तहत लोकायुक्त ने दीवान सिंह यादव घर में घुसकर की कार्रवाई।

तीन मकानों में से दो मकानों पर छापा...
दीवान सिंह करोड़ों की संपत्ति के मालिक बताए जाते हैं, यहां तक की इनके मकानों में लाखों रुपए की लिफ्ट तक लगी हैं।वहीं कई JCB वाहन मशीनें भी इनके पास होनी बताई जाती हैं।

यह बात भी सामने आ रही है कि करीब 10-12 साल पहले इनके पास ज्यादा कुछ भी नहीं था, लेकिन उसके बाद कुछ ही समय में यह करोड़ों के मालिक बन गए।

बताया जाता है कि यह ₹10000 महीने की तनख्वाह पर करते हैं। यह मुख्य रूप से 3-4 समितियों की गेहूं खरीदी व चना खरीदी का काम करते हैं। वहीं ये भी बताया जा रहा है कि पूर्व में भी बैंक में गड़बड़ी के कुछ मामले समाने आए हैं, जिनमें फर्जी किसानों के नाम से करोड़ों का लोन निकाला गया है। इसके साथ ही विभिन्न रिश्तेदारों को भी इन्होंने अलग-अलग समितियों में लगा रखा है।

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दीपेश तिवारी
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