scriptBig change in RTE Act - this way examination of fifth eighth will be | आरटीई एक्ट में बड़ा बदलाव- 12 साल बाद इस तरह होगी पांचवीं आठवीं की परीक्षा | Patrika News

आरटीई एक्ट में बड़ा बदलाव- 12 साल बाद इस तरह होगी पांचवीं आठवीं की परीक्षा

प्रश्न-पत्र राज्य स्तर से सेट किया जाएगा। कॉपियों की जांच अन्य स्कूलोंं के शिक्षक करेंगे।

भोपाल

Published: December 02, 2021 01:23:05 pm

मनीष कुशवाहा
भोपाल. शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षा में से बोर्ड खत्म कर दिया था, क्योंकि कक्षा आठवीं तक किसी को फेल नहीं किया जा सकता था, इस अधिनियम में करीब 12 साल बाद बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिसके तहत अब कक्षा 5 वीं और 8 वीं की परीक्षा बोर्ड पैर्टन पर होगी।

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12 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पांचवीं और आठवीं की परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न से कराने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। निर्णय लेने जल्द ही बैठक होगी।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं को समाप्त कर दिया गया था। अधिनियम में किसी भी विद्यार्थी को आठवीं तक फेल नहीं करने की बात कही गई थी। हालांकि शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाए रखने 2017-18 में अधिनियम में संशोधन कर राज्यों को पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं करवाने के अधिकार दिए गए थे।

सत्र 2019-20 में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुई थीं, पर कोरोना के प्रभाव के चलते परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया। 2020 में भी परीक्षाएं नहीं हुईं। अब 2020-21 सत्र की परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न पर करवाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

  • बोर्ड पैटर्न परीक्षा राज्य शिक्षा केंद्र स्तर पर आयोजित होगी।
  • प्रश्न-पत्र राज्य स्तर से सेट किया जाएगा। कॉपियों की जांच अन्य स्कूलोंं के शिक्षक करेंगे।
  • पहली से आठवीं तक की अद्र्धवार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां पूरी हो गई हैं। कोरोना संक्रमण बढऩे पर बच्चों को प्रश्न पत्र बुकलेट घर पर हल करने की सुविधा दी जाएगी।

आठवीं तक के बच्चों को सामान्यत: सात मासिक परीक्षाओं सहित अद्र्धवार्षिक, वार्षिक परीक्षाएं देना होती हैं। लेट हुए सत्र 2020-21 अद्र्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। वार्षिक परीक्षाएं मार्च 2022 में होंगी।

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नींव हो रही थी कमजोर
दरअसल पिछले कई सालों से कक्षा 5 वीं 8 वीं से बोर्ड खत्म कर देने और अनुत्र्तीण नहीं करने के कारण बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता कमजोर होने के बाद भी उन्हें अगली कक्षा में पहुंचा दिया जाता था, इस कारण वे आगे की कक्षाओं में काफी परेशानी का सामना करते थे, कई विद्यार्थी तो कक्षा ९ वीं के बाद आगे ही नहीं बढ़ पाते थे, लेकिन अब इस बदलाव से निश्चित ही बच्चों की नींव मजबूत होगी।

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