Breaking: चुनाव से पहले प्राइवेट नौकरी वालों के लिए सरकार ऐलान, जल्द होने जा रही है घोषणा!

प्राइवेट नौकरी वालों के पक्ष में सरकार का बड़ा निर्णय...

भोपाल। चुनावों से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार,मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहे लोगों को खास तोहफा देने के मूड में दिख रही है।

सूत्रों के अनुसार इसके तहत सरकार इस साल के अंत तक ग्रेच्युटी मिलने की समय सीमा को घटाने की तैयारी में है। बताया जाता है कि केंद्र सरकार इसके द्वारा चुनाव से पहले प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों को राहत देने के मूड में है।

ग्रेच्युटी है क्या?...
ग्रेच्युटी कर्मचारी के वेतन यानी सैलरी का वह हिस्सा है, जो कंपनी या आपका नियोक्ता, यानी एम्प्लॉयर आपकी सालों की सेवाओं के बदले देता है। ग्रेच्युटी वह लाभकारी योजना है, जो रिटायरमेंट लाभों का हिस्सा है और नौकरी छोड़ने या खत्म हो जाने पर कर्मचारी को नियोक्ता द्वारा दिया जाता है।

इस संबंध में बात सामने आते ही मध्यप्रदेश के भोपाल सहित विभिन्न जिलों के प्राइवेट कर्मचारी ने इसे सरकार का एक अच्छा फैसला बताते हुए, सरकार को धन्यवाद देने तक की बात कहते हैं। दरअसल इस संबंध में जैसे ही खबर सामने आईं प्राइवेट कर्मचारी के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई।

ये बहुत अच्छा निर्णय होगा। ग्रेच्युटी की सीमा घटने से अंतत: प्राइवेट कर्मचारी का ही भला होगा। क्योंकि कई किन्हीं समस्याओं के चलते कर्मचारी नौकरी छोड़ने को विवश हो जाता है। ऐसे में उसे ग्रेच्युटी नहीं मिलने पर समस्या का सामना करना पड़ता है। अब इस निर्णय के बाद आम कर्मचारी को फायदा ही होगा।
- आरके आर्या, निजी कंपनी में कार्यरत

कोई भी व्यक्ति बिना किसी बड़ी परेशानी के एकाएक नौकरी नहीं छोड़ता, लेकिन कई बार उसे मुश्किलों के चलते 3 या 4 साल में नौकरी छोड़नी पड़ जाती है। ऐसे में उसे ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिल पाता, यदि सरकार इस निर्णय को कर लेती है। तो लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
- डीपी सिंह, निजी कंपनी में कार्यरत

सरकारी नौकरी में तो व्यक्ति को सिक्योरिटी मिलती ही है, निजी कंपनियों में ऐसा होना एकाएक संभव नहीं हो पाता। साथ ही कई बार इमानदारी से काम करने के बावजूद 5 साल से पहले नौकरी छोड़ने या हटाए जाने पर ग्रेच्युटी का नुकसान होता है। ऐसे में यदि सरकार ग्रेच्युटी के लिए सीमा में कमी करती है तो ये स्वागत योग्य है।
- पीके यादव, निजी संस्था में कार्यरत

यदि सरकार ऐसा करती है तो हम उसका स्वागत करेंगे। साथ ही उन सब लोगों का भी ह्रदय से धन्यवाद देंगे जो इस सीमा को कम करने में सहायक रहे।
- सीके गोरकर, निजी कंपनी मे कार्यरत

यदि सरकार इसमें संशोधन कर देती है, तो सचमुच ये निजी कंपनी में कार्य करने वालों के लिए बहुत ही राहत देने वाली बात होगी। सरकार को निजी कर्मचारियों के हित की दिशा में ये कदम जल्द उठाना चाहिए। जिससे कई कंपनियां भी गड़बड़ियां नहीें कर पाएंगी।
- एनके झा, सीए


ये है ग्रेच्युटी का प्रावधान...
दरअसल सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार चुनाव से पहले करोड़ों निजी कर्मचारियों को राहत देने की तैयारी कर रही है। अभी किसी भी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी को 5 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलने का प्रावधान है।

इस समय सीमा को अब घटाकर तीन साल करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के नए बोर्ड के सामने रखा जाएगा।

चर्चा है कि इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है और लेबर मिनिस्ट्री ने इंडस्ट्री से इस पर राय भी मांगी है। दरअसल मंत्रालय ये जानना चाहता है कि इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

तीन साल: समय सीमा!
सूत्रों के अनुसर ग्रेच्युटी की गणना के तरीकों में भी बदलाव पर विचार किया जाने के साथ ही पांच साल से कम करके ग्रेच्युटी मिलने की समय सीमा को घटाकर तीन साल किया जा सकता है। वहीं बताया जाता है कि लेबर यूनियन की तरफ से ग्रेच्युटी की समय सीमा को और कम करने की मांग की जा रही है।

 

इसकी भी तैयारी...
बताया जाता है कि इसके अलावा कुछ जरूरी नियमों में बदलाव की बात भी चल रही है। जिसके तहत फिक्सड टर्म एम्पलाई (अनुबंधित कर्मचारी) को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सके। भले ही ऐसे कर्मचारी का टर्म पांच साल से कम ही क्यों न हो।

जानकारों के अनुसार अनुबंध एक साल या तीन साल का होता है। इस अवधि के पूरा होने पर नियोक्ता कंपनी कर्मचारी का रिन्यूअल कर देती हैं। इस नए तरीके से ऐसे कर्मचारियों को अनुपातिक रूप से ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। यानी जितने समय की सर्विस होगी उस अनुपात में नियोक्ता कर्मचारी को लाभ देगा।

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दीपेश तिवारी
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