Big news : भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस में दो दिग्गज नेता हुए शामिल

Big news : भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस में दो दिग्गज नेता हुए शामिल

KRISHNAKANT SHUKLA | Publish: Oct, 13 2018 02:47:31 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 03:43:01 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

Big news : भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस में दो दिग्गज नेता हुए शामिल

भोपाल। विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस प्रदेश स्तर से लेकर ब्लाक स्तर पर अपनी टीम को खड़ी कर दी। एससीएसटी के विरोध में भाजपा से कई नेता कांग्रेस में शामिल हो चुके है। अब गोटेगांव से रह चुके पूर्व विधायक शेखर चौधरी दोबारा कांग्रेस में शामिल हो रहे है। शेखर 2008 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे। 1998 से 2003 तक कांग्रेस के टिकट पर रहे।

शनिवार को पीसीसी कार्यालय पहुंचकर समाजवादी पार्टी के अर्जुन आर्य और बीजेपी के शेखर चौधरी भी कांग्रेस पार्टी ज्वाइन किया। भाजपा के सबसे बड़े गढ़ और मध्यप्रदेश के सबसे बड़े क्षेत्र मालवा की जनता का मिजाज भी इस बार कुछ अलग तरह का दिख रहा है। ऐसे में इस बार के चुनाव में यहां के मतदाता किसके साथ जाएंगे यह अभी भी एक सवाल बना हुआ है।

कहा जा रहा है कि इस चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में भाजपा खुद को सहज महसूस नहीं कर रही है। वहीं कांग्रेस भी इस बार बाजी पलट देने की उम्मीद में है। मालवा क्षेत्र के कुछ किसानों का कहना है कि इस बार कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि इस बार चुनाव कौन जीतेगा। उनका कहना था कि भाजपा के गढ़ मालवा क्षेत्र में राजनीति पिछले एक साल में खासतौर पर मंदसौर में गोलीकांड की घटना के बाद काफी हद तक बदल गई है।

बता दें पिछले साल जून में छह किसानों की मौत हो गई थी जब पुलिस ने बेहतर कीमतों की मांग कर रहे किसान प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी थीं। इसके अलावा सूखे से प्रभावित इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के कई मामले दर्ज किए गए हैं।

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जिसके बाद से यहां की राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं जानकारों के अनुसार इस घटना से न केवल मंदसौर जिले में किसानों का गुस्सा भड़का बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र और कुछ हद तक निमाड़ क्षेत्र में भी इसका असर पड़ा। मालवा क्षेत्र में अगर, देवास, धार, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन जिले शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार मालवा क्षेत्र में कुल 50 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें पिछले दो चुनावों में भाजपा ने अधिकांश सीटें जीती हैं। यहां भाजपा ने 2008 के चुनावों में इस क्षेत्र में 50 सीटों में से 27 सीटें जीती थीं। और 2013 के चुनावों में 45 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी।

जिसके चलते 2013 के चुनावों में भाजपा ने प्रदेश की 230 सीटों में से 165 जीती थीं, जो पिछले चुनावों के मुकाबले में लगभग 22 सीटें ज्यादा थीं। जीती गई अतिरिक्त 22 सीटों में से 18 सीटें मालवा क्षेत्र से जीती गईं थी।

विरोध का ये भी बड़ा कारण

राजनीति के जानकार डीके शर्मा की माने तो सत्ता विरोध लहर के अलावा भाजपा जिन बातों से सबसे ज्यादा परेशान है वो इस प्रकार हैं- बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत, प्रदेश में अपराध का बढ़ता ग्राफ, कृषि मुद्दों और सबसे बढ़कर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम का मुद्दा। ऐसे में जहां प्रदेश में भाजपा कमजोर होती दिख रही है, वहीं कांग्रेस इसका सीधे तौर पर फायदा उठाने की कोशिशों में जुटी दिखती है।

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