इन्क्रीमेंट तो मिलेगा पर GST ऐसे काट लेगा आपकी जेब!

इन्क्रीमेंट तो मिलेगा पर GST ऐसे काट लेगा आपकी जेब!

Deepesh Tiwari | Publish: Apr, 17 2018 04:43:44 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

आपकी तनख्वाह पर आज की सबसे बड़ी खबर, जो आपको सकते में डाल देगी!

भोपाल। कर्मचारियों के लिए GST को लेकर एक बुरी खबर सामने आ रही है। जिसके अनुसार अब उनके वेतन पर भी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगने वाला है।

सामने आ रही खबरों के मुताबिक सरकार ने इस पर फैसला ले लिया है और जल्द ही यह लागू किया जा सकता है। इस फैसले की बात सामने आते ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित विभिन्न जिलों के कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई है।

ऐसे हुआ खुलासा...
वहीं इस मामले में एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, एक्सपर्ट्स ने कंपनियों को सलाह दी है कि वो अपने एचआर डिपार्टमेंट से इन मामलों पर समीक्षा के लिए कहें।


उसके अनुसार इस असर के चलते देशभर की कंपनियां अपने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं क्योंकि अब कर्मचारी की सैलरी का ब्रेकअप कंपनियों पर भारी पड़ेगा। शॉपिंग और रेस्टोरेंट बिल के बाद ये और बड़ा झटका होगा।

हाउस रेंट, मोबाइल बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल जैसे सैलरी का ब्रेकअप यदि जीएसटी के दायरे में आ जाएगा, तो कंपनियों को आपकी सैलरी पैकेज को नए सिरे से निर्धारित करना होगा।

हमें वैसे ही वेतन कम मिलता है, उसमें भी ये जीएसटी तो हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा। हम इसका विरोध करेंगे। वेतन से आप टैक्स लेते हो तो जीएसटी किस बात का।
- राजेश आर्या, निजी कंपनी में कार्यरत भोपाल

मेरे पति एक निजी कंपनी में काम करते हैं। हमें वेतन बहुत कम मिलता है, महीना खत्म होने से पहले वेतन खत्म हो जाता है। ऐसे में जीएसटी कहां से लाकर देंगे।
- गायत्री सिंह, हाउस वाइफ

मूल वेतन में हमें मिलता ही क्या है, ले दे कर जैसे तैसे एचआरए, मेडिकल बिल व अन्य भत्तों से काम चला रहे हैं। मोबाइल भी तो कंपनी के काम के लिए ही उपयोग करते हैं। ऐसे में हम कैसे उस पर भी जीएसटी देंगे। ये हमारे लिए मुमकिन नहीं है।
- राजेश शर्मा, निजी कंपनी में कार्यरत मंडीदीप

मेरे पति एक निजी कंपनी में काम करते हैं। सैलरी बहुत कम है अब एचआरए, मोबाइल बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल, इंटरटेंमेंट, इत्यादि भत्तों पर जीएसटी देकर क्या हम सड़कों पर रहने आ जाएं। ये हमारे लिए कताई मुमकिन नहीं है। उन्हें वेतन ही कितना मिलता है कि अब जीएसटी भी दें।
- वीना गोयल, हाउस वाइफ भोपाल


हमें स्कूलों में वेतन के नाम पर केवल इतना ही पैसा दिया जाता है कि हम जिंदा रह सकें। ऐसे में यदि ये नियम आता है तो हम जीएसटी जैसे सरकार के नियम को पूरा नहीं कर सकेंगे।
- सुधा, निजी स्कूल में टीचर पद पर कार्यरत

वहीं जानकारों का मानना है कि लगभग सभी प्राइवेट संस्थाओं में इस बार भी इंक्रीमेंट जो अप्रैल में तो मिलेगा, लेकिन सरकार की इस नई पॉलीसी के चलते लोगों की जेबों पर अतिरिक्त भार आ जाएगा।


ऐसे जाने पूरा मामला...
दरअसल यह GST उनके मूल वेतन पर नहीं लगेगा लेकिन आपके हाउस रेंट अलाउंस यानि एचआरए, मोबाइल बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल, इंटरटेंमेंट, इत्यादि भत्तों पर यह लगेगा।

वहीं माना जा रहा है कि प्राइवेट कंपनियां GST का भुगतान अपनी तरफ से नहीं करेंगी अत: यह कर्मचारियों के वेतन से काटा जाएगा। इस तरह उनका वेतन अपने आप कट हो जाएगा।

ये आएगा GST के दायरे में!...
फोन के लिए मिलने वाली राशि, मेडिकल इंश्योरेंस, मेडिकल जांच, ट्रासंपोर्टेशन और एचआरए भी जीएसटी के दायरे में आने वाला है। सूत्रों से सामने आ रही खबर के अनुसार अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग रूलिंग (AAR) ने एक मामले में फैसला दिया है कि कंपनियों द्वारा कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारियों से वसूला जाने वाला चार्ज भी जीएसटी के दायरे में आएगा।

इन सुविधाओं पर यदि जीएसटी लगता है तो कंपनियां यह राशि इम्प्लॉइज से वसूलेंगी। इसका सीधा असर कर्मचारी के पैकेज पर पड़ेगा।

 

अभी सीटीसी पर सैलरी...
जानकारों के अनुसार फिलहाल अधिकांश कंपनियां कर्मचारी को कॉस्ट टू कंपनी के आधार पर सैलरी पैकेज तैयार करती थी और कई सेवाओं के बदले में कटौती को सैलरी का हिस्सा बनाकर दिया जाता है।

लेकिन अब यदि इसे जीएसटी के दायरे में लिया जाता है तो कंपनियां किसी कर्मचारी की कॉस्ट टू कंपनी को ही आधार रखते हुए उसके ब्रेकअप में बदलाव करेंगी जिससे कंपनी की टैक्स देनदारी पर कोई प्रभाव न पड़े।

टैक्स जानकारों के मुताबिक कर्मचारियों की सैलरी में कई ऐसे ब्रेकअप शामिल रहते हैं जिनके एवज में कंपनियां सेवा प्रदान करती है और कर्मचारियों को इन सेवाओं के एवज में पेमेंट बिना किसी रसीद के मिल जाता था।

इसके चलते टैक्स विभाग के लिए इन सेवाओं पर जीएसटी का अनुमान लगाना मुश्किल होता है और कंपनियां अपनी सुविधा पर अपना टैक्स बचाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी ब्रेकअप तैयार करती हैं।

लिहाजा, कंपनी द्वारा कर्मचारी को दी जा रही सेवाएं यदि जीएसटी के दायरे में आती हैं तो कंपनियों की कोशिश देश जीएसटी को भी कर्मचारी के कॉस्ट टू कंपनी में जोड़ दें जिससे उसकी टैक्स देनदारी पर असर न पड़े।

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