भाजपा के नाराज सांसद बोले-अब जिंदा मक्खी नहीं निगल सकता, इससे अच्छा तो मर जाऊं

भाजपा के नाराज सांसद बोले-अब जिंदा मक्खी नहीं निगल सकता, इससे अच्छा तो मर जाऊं

By: Faiz

Published: 04 Apr 2019, 01:30 PM IST

भोपालः लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश भाजपा में बगावत के सुर काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते दिल्ली तक राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कारण है टिकट कटने और ना मिलने से नाराज नेता, जिसके चलते पार्टी के सामने टिकट बांटना बड़ी चुनौती साबित हो रही है। मध्य प्रदेश में यही विरोध गुज़रे विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला था, जिसका खामियाज़ा भाजपा को पंद्रह साल की सत्ता खोकर भुगतना पड़ा। अब यहीं स्थिति लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के समक्ष आन खड़ी है, जिसका निराकरण करने के लिए दिल्ली में ताबड़तोड़ बैठकों का दौर चल रहा है। फिलहाल, नाराज नेताओं को मनाने की अब तक संगठन और संघ द्वारा बनाई सभी रणनीतियां फेल रही है।

आलाकमान की चिंता का कारण

भाजपा की चिंता का मुख्य कारण टिकट के वो दावेदार हैं, जो पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों के विरोध में उतर आए हैं, वहीं वो मौजूदा सांसद भी हैं, जो टिकट कटने से नाराज होकर बगावत पर उतर आए हैं। वैसे तो मध्य प्रदेश में नाराज़गी की छोटी मोटी सुगबुगाहट कई जिलों से देखने को मिल रही है, लेकिन ज्यादा नाराजगी बालाघाट और शहडोल जिले में नज़र आ रही है। कुछ दिनों पहले बालाघाट सांसद बोध सिंह भगत ने नामांकन फार्म खरीद था, इसके बाद अब पार्टी से खफा एक और सांसद शहडोल से वर्तमान सांसद ज्ञान सिंह ने भी टिकट कटने से नाराज होकर नामांकन फॉर्म खरीद लिया है। फार्म खरीदने के बाद मीडिया द्वारा पूछे गए पार्टी से बगावत के सवाल पर ज्ञान सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि, 'जिंदा मक्खी नहीं खा सकता, इससे अच्छा कि मर ही जाऊं। ज्ञान सिंह ने तल्ख शब्दों में ये भी कहा कि, अगर पार्टी ने टिकट मेरी सांसद सीट का टिकट नहीं बदला तो मौजूदा उम्मीदवार हिमाद्री सिंह हार जाएंगी। अब भाजपा पर निरिभर करता है कि, वो चुनाव में मेरा इस्तेमाल करेगी या विरोध में मेरी क्षमता को आजमाएगी।'

सांसद की नाराज़गी का कारण

सांसद ज्ञान द्वारा दिये गए इस बयान और नामांकन फार्म खरीदने से ये बात तो पूरी तरह स्पष्ट है कि, फिलहाल वो पार्टी से बेहद खफा हैं। दरअसल, उनकी नाराज़गी का कारण ये है कि, 2016 में शहड़ोल सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने कांग्रेस की जिस प्रत्याशी को हराया था, इस बार पार्टी आलाकमान ने उसी प्रत्याशी हिमाद्री सिंह को शहडोल सीट से टिकट दे दिया है और ज्ञान सिंह को निर्देश दिये हैं कि, उनके लिए प्रचार करें। इस बात से सांसद ज्ञान सिंह बेहद नाराज़ हो गए हैं। उनका कहना है कि, 'मेने उपचुनाव में कांग्रेस से जिस सीट को बचाया था, अब पार्टी ने उसी की प्रत्याशी को भाजपा की सदस्यता दिलाकर टिकट दे दिया।'

कांग्रेस को होगा इस नाराज़गी से लाभ

आपको बता दें कि, भाजपा ने अब तक 18 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करक दी है। इसमें हालात के मद्देनज़र कई मौजूदा सांसदों के टिकट कटे हैं और कई दावेदार टिकट ना मिलने से नाखुश हैं। नाराज़गी के इन सुरों को देखते हुए प्रदेश भाजपा ही नहीं, बल्कि आलाकमान और संघ तक हड़कंप मचा हुआ है। प्रदेश स्तर पर रूठों को मनाने की कोशिश भी चली इसके तहत ज्ञान सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने मुलाकात कर आश्वसन भी दिया था कि वह उनके नाम को लेकर चर्चा करेंगे। लेकिन, इस बात को हुए भी लंबा समय हो जाने के चलते आखिराकर बुधवार शाम ज्ञान सिंह ने भी नामांकन फॉर्म खरीद लिया। वही बोध सिंह को भी पार्टी नेताओं द्वारा मनाने की जद्दोजहद की गई, लेकिन नतीजा विफल ही साबित हुआ। फिलहाल अब अगर ये सांसद निर्दलीय मैदान में उतरते हैं, तो साफ है कि इसका सीधा नुकसान आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को ही होगा।

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