भाजपा-कांग्रेस का सिरदर्द बन सकती हैं वोट काटू पार्टियां

62 राजनीतिक दल गैर मान्यता प्राप्त , प्रदेश में पिछले चुनाव में कब्जाए थे 5.27 फीसदी वोट, दूसरे राज्यों की छोटी पार्टियां भी आजमाती हैं मप्र में किस्मत

By: आलोक पाण्डेय

Published: 07 Jun 2018, 07:27 AM IST

भोपाल. वोट काटू पार्टियां विधानसभा चुनाव में बड़े राजनीतिक दलों के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है। चुनाव आयोग ने हाल ही में एक अपडेट सूची जारी की है। इसके मुताबिक मध्यप्रदेश में ६२ गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। वहीं, प्रदेश के बाहर रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त २७ छोटी पार्टियों ने भी पिछले चुनाव में मध्यप्रदेश में अपनी किस्म आजमाई थी। इस लिहाज से ८९ राजनीतिक दल वोट काटने के लिए प्रदेश की चुनावी जंग में उतर सकते हैं।

2013 के विधानसभा चुनाव में इन छोटे राजनीति दलों ने ५.२७ प्रतिशत वोट झटके थे, लेकिन जीत तो दूर एक भी सीट पर ये निकटतम प्रतिद्वंद्वी भी नहीं बन पाए थे। हालांकि, इससे बड़ी पार्टियों के दो दर्जन उम्मीदवारों की जीत के समीकरण बदले और वे हार गए।

- ४२४ लोगों के गांव में पार्टी का मुख्यालय
प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की लंबी फेहरिस्त है। पार्टियों के मुख्यालय राजधानी से ज्यादा दूसरे शहरों, कस्बों और गांवों में हैं। रायसेन जिले के नंदरौला गांव में भारतीय सामाजिक एकता पार्टी का मुख्यालय है। इस गांव की आबादी ४२४ है। इसी तरह मंडला जिले के बिजनिया गांव में भारतीय सत्य संघर्ष पार्टी तो शहडोल जिले के छोटे से गांव खमदार में भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का मुख्यालय है।

- कांग्रेस की नजर छोटे दलों के वोट पर
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ३६.३८ प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जबकि इससे लगभग तीन गुना ज्यादा सीटें हासिल कर तीसरी बार सत्ता में आने वाली भाजपा को ४४.८७ प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस की नजर इस बार बसपा, सपा जैसी बड़ी पार्टियों के साथ उन छोटी वोट काटू पार्टियों पर भी है, जिनसे गठबंधन करके वो कुछ सीटों पर सफलता हासिल कर सकती है। इसमें ग्वालियर-चंबल और विंध्य अंचल में कुछ छोटी पार्टियों से कांग्रेस की बात भी चल रही है।

 

लोकतंत्र में हर राजनीति दल को जनता के पास जाने का अधिकार है। जनता उनको उनकी साख की हिसाब से तवज्जो देती है। वोट काटने वाली ये छोटी पर्टियों परिणामों को प्रभावित करती है। तिकड़मबाजी और साजिश के लिए इनका इस्तेमाल न होता हो तो इनके चुनाव लडऩे पर आपत्ति नहीं की जा सकती है।
- डॉ. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा

छोटे दलों को भी चुनाव लडऩे का संवैधानिक अधिकार है। हम इस बार प्रदेश के कई दलों को साथ लेकर चुनाव लडऩे की सोच रहे हैं। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा, चुनाव के वक्त पर पार्टी इस मामले में निर्णय लेगी।
- मानक अग्रवाल, मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस

इस बार हमारी पार्टी प्रदेश की कई सीटों पर चुनाव लडऩे का विचार कर रही है। पार्टी का फोकस मूल रूप से मालवा और निमाड़ में रहेगा। इस बार भाजपा-कांग्रेस से जनता नाराज है। छोटे दलों को काफी बढ़त मिलेगी।
- राकेश शर्मा, भारतीय जन विचार पार्टी

आलोक पाण्डेय
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