एक ही दुकान में सरकार बेच रही कड़कनाथ चिकन और काऊ मिल्क, बीजेपी ने कहा- धार्मिक भावना हो रही है आहत

एक ही दुकान में सरकार बेच रही कड़कनाथ चिकन और काऊ मिल्क, बीजेपी ने कहा- धार्मिक भावना हो रही है आहत

Muneshwar Kumar | Updated: 14 Sep 2019, 02:38:37 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने दूध और चिकन पॉर्लर अलग करने की मांग की


भोपाल/ मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार एक ही दुकान पर कड़कनाथ का मांस, गाय का दूध और अंडा बेच रही है। ऐसे कई आउटलेट भोपाल में खोले गए हैं। इस आउटलेट पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश सरकार के इस फैसले पर बीजेपी ने कहा है कि गाय के दूध के साथ मांस की बिक्री से धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

दरअसल, मध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले कुक्कुट विकास निगम ने भोपाल में गाय के शुद्ध दूध का पार्लर खोल खुद ही बिक्री शुरू किया है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि लोगों को शुद्ध दूध मिल सके। लेकिन इस पार्लर के साथ ही कड़कनाथ चिकन का मांस और अंडा भी है। लोग यहां इसे खरीद सकते हैं। सारे स्टॉल भोपाल में ओपन कर दिए गए हैं।

कमलनाथ सरकार के मंत्री लाखन सिंह ने कहा कि यहां लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाले अंडे और दूध मिलेंगे। चिकन पार्लर में कड़कनाथ चिकन भी बेचा जा रहा है। हमारी कोशिश है कि लोगों के शुद्ध दूध मिले। वहीं, सरकार पहले से ही मध्यप्रदेश में मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रखी है। ऐसे में सरकार की इस कोशिश को वाहवाही भी मिल रही है तो बीजेपी ने इसमें धर्म का तड़का लगा दिया है।

बीजेपी ने उठाए सवाल
एमपी सरकार ने राज्यभर में एक ही आउटलेट में चिकन और दूध बेचने की परियोजना शुरू की है। भोपाल में भी एक आउटलेट खोला गया है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि हमें आपत्ति है कि गाय के दूध को चिकन और अंडे के साथ बेचा जा रहा है। इससे लोगों की धार्मिक भावना आहत हो रही है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस पर गौर करे। दूध के आउटलेट और चिकन के आउटलेट को एक-दूसरे से कुछ दूरी पर खोला जाना चाहिए।

क्यों खास है कड़कनाथ मुर्गा
दरअसल, कड़कनाथ मुर्गा काले रंग का होता है। यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिलता है। इसका खून भी काले रंग का होता है। साथ ही इसका मांस काफी कड़ा होता है। यह अन्य मुर्गों की तुलना में पकने में ज्यादा समय लेता है। लेकिन स्वाद लाजवाब होता है। इसके सेवन से स्टेमिना बढ़ती है। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में यह ज्यादा पाया जाता है। साथ ही इसमें प्रोटीन काफी होता है।

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