मध्यप्रदेश विधानसभा में 15 साल बाद विपक्ष में बैठेगी भाजपा

15वीं विधानसभा का पहला सत्र आज से
सीट नंबर एक पर कमलनाथ, शिवराज के लिए फिलहाल विपक्ष की पहली कुर्सी

 

By: anil chaudhary

Published: 07 Jan 2019, 05:19 AM IST

शुरू से ही तीखे तेवर दिखाने की तैयारी में भाजपा
भोपाल. विधानसभा के सदन का नजारा सोमवार को 15 साल बाद बदला हुआ दिखेगा। अब तक विपक्ष में बैठने वाली कांग्रेस, अध्यक्ष की आसंदी के दाहिनी ओर यानी सत्ता की कुर्सियों पर बैठेगी। भाजपा विधायक सामने प्रतिपक्ष की सीटों पर बैठेंगे। लगातार 13 वर्षों तक पहली कुर्सी पर बैठने वाले शिवराज सिंह चौहान अब विपक्ष में नजर आएंगे। वर्तमान व्यवस्था में उन्हें विपक्ष की पहली सीट दी गई है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के चयन के बाद उन्हें दूसरे नंबर की सीट मिलेगी। उधर, सदन के नेता के रूप में पहली सीट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ होंगे। उनके पास मंत्री गोविंद सिंह, आरिफ अकील, सज्जन सिंह वर्मा बैठेंगे। जीतू पटवारी, मुख्यमंत्री के ठीक पीछे वाली सीट पर नजर आएंगे। पिछली विधानसभा में इस सीट पर नरोत्तम मिश्रा बैठते थे।
14वीं विधानसभा में स्पीकर रहे डॉ. सीतासरन शर्मा विपक्ष में सीट क्रमांक 159 पर बैठे नजर आएंगे। यह विपक्ष की अग्रिम पंक्ति की सीट होगी। मध्यप्रदेश के संसदीय इतिहास पहली बार ये स्थिति है जब पक्ष-विपक्ष में बहुत कम सदस्यों का अंतर होगा। विपक्ष भरा-पूरा होने से बहस की संभावना बहुत ज्यादा रहेगी तो सरकार मतदान में अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अपने विधायकों को सदन में उपस्थित रहने के लिए पाबंद कर चुकी है।
- विधायकों की शपथ और जरूरी शासकीय कार्य होंगे
15वीं विधानसभा का यह पहला सत्र हैं, इसलिए इस सत्र में विधायकों की शपथ होगी। पांच दिवसीय इस सत्र में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण इत्यादि तो नहीं होगा, लेकिन जरूरी शासकीय कार्य होंगे। राज्य के खर्चे के लिए सरकार को पैसों की जरूरत है, इसलिए सप्लीमेंट्री बजट पेश होगा। इसमें जरूरी खर्चों के लिए राशि शामिल होगी। पहले दिन यानी सात जनवरी को प्रोटेम स्पीकर विधायकों को शपथ दिलाएंगे। इसी दिन दोपहर 12 बजे अध्यक्ष के लिए नामांकन भी भरा जाएगा। अगले दिन यानी आठ जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा। राज्यपाल का अभिभाषण और कृतज्ञता प्रस्ताव पर चर्चा भी होगी। महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश हो सकते हैं।

- फ्लोर मैनेजमेंट का जिम्मा इन पर
सत्ता के पक्ष के अहम चेहरे
कमलनाथ - सदन में पहली बार नजर आएंगे। वे नौ बार सांसद और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। अब सदन के नेता के रूप में मौजूद होंगे। वे सभी के साथ लेकर चलने में माहिर हैं। यहां इनका कौशल नजर आएगा।
डॉ. गोविंद सिंह - संसदीय कार्यमंत्री हैं। सातवीं बार के विधायक होने के कारण गहन संसदीय अनुभव भी है। संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते यह जिम्मेदारी भी है कि सदन की कार्यवाही सुचारू से चलती रहे। विपक्ष में रहने के दौरान सरकार को कई बार ऐसा घेरा की जवाब देना मुश्किल हुआ।
केपी सिंह - कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हैं। छठवीं बार विधायक बने। संसदीय नियमों के बेहतर जानकार हैं। अपनी बात दमदारी से रखने के साथ विरोधी को करारा जवाब भी देते हैं, इसलिए इन्हें सदन में अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया गया है।
सज्जन सिंह वर्मा - पांचवीं बार के विधायक हैं, लोकसभा सदस्य भी रहे हैं। राज्य सरकार में मंत्री हैं। अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने और विरोधी को उसी की शैली में जवाब देने की कला अच्छे से आती है। विरोधी पक्ष की रणनीति को समझने और ध्वस्त करने की शैली भी अच्छे से आती है। यहां भी ये सक्रिय रहेंगे।
बाला बच्चन - विपक्ष में रहने के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहे। सरकार को घेरने में आक्रामक तेवर अपनाते रहे हैं। अब सरकार में मंत्री हैं, इसलिए फ्लोर मैंनेजमेंट में भी सक्रिय भूमिका होगी। पांचवीं बार के विधायक होने के कारण संसदीय अनुभव भी बेहतर है।
ब्रजेन्द्र सिंह राठौर - शालीनता से बात रखते हैं, लेकिन रणनीति में माहिर हैं। पांचवीं बार के विधायक होने के साथ ही इनका संसदीय अनुभव भी बेहतर है। नियम प्रक्रिया के तहत यदि विपक्षी दल ने सरकार को घेरने का प्रयास किया तो नियम प्रक्रिया का जवाब नियमों के तहत ही देंगे।

- विपक्ष के अहम चेहरे
शिवराज सिंह चौहान- शिवराज नेता प्रतिपक्ष नहीं रहेंगे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से विपक्ष में इनकी भूमिका अहम रहेगी। शिवराज पहले कह चुके हैं कि सरकार के सार्थक कामों में वे सहयोग करेंगे, लेकिन जरा भी गड़बड़ हुई तो तत्काल सवाल उठाएंगे। शिवराज की भाषण शैली में तथ्यों के साथ धाराप्रवाहता होने के कारण उनपर सभी की नजर बनी रहेगी।
नरोत्तम मिश्रा- पिछली विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री के नाते फ्लोर मैनेजमेंट का जिम्मा मिश्रा पर था। मिश्रा मैनेजमेंट और तोडफ़ोड़ में माहिर माने जाते हैं। कई बार ये भाजपा सरकार के संकट मोचक भी साबित हुए। इस बार इनके नेता प्रतिपक्ष बनने की संभावना है। सदन में अपने तीखे हमलों से कांग्रेस सरकार को घेरने में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
गोपाल भार्गव- भार्गव सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं। वे आठवीं बार के विधायक हैं। भार्गव ने विपक्षी विधायक के रूप में भी सफल कार्यकाल पूरे किए हैं। वे दिग्विजय सरकार में विपक्ष के सक्रिय विधायक थे। इस बार भार्गव अपने अनुभव से सरकार पर निशाना साधेंगे।
भूपेंद्र सिंह - शिवराज सरकार में गृह एवं परिवहन मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह विपक्ष के सख्त मिजाज विधायकों में से एक रहेंगे। विपक्ष के सरकार पर होने वाले हमलों में इनकी भूमिका अहम रहेगी।
गौरीशंकर बिसेन- शिवराज सरकार में कृषि मंत्री रहे गौरीशंकर बिसेन अभी से कांग्रेस सरकार के कर्जमाफी के वादे की हवा निकालने की तैयारी में हैं। वे कृषि और सहकारिता पर सरकार को घेरेंगे। बिसेन आक्रामक शैली के विधायक माने जाते हैं।
यशोधरा राजे सिंधिया- शिवराज सरकार की फायरब्रांड नेत्री यशोधरा अब महिला विधायक के रूप में विपक्ष में सक्रिय नजर आएंगी।
- चर्चित चेहरे, जो इस बार नहीं आएंगे नजर
बाबूलाल गौर, सरताज सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, गौरीशंकर शेजवार, जयंत मलैया, माया सिंह, उमाशंकर गुप्ता, अजय सिंह, रामनिवास रावत, मुकेश नायक, रजनीश सिंह और सुंदरलाल तिवारी।

 

anil chaudhary Desk
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