निर्माण अधूरे तोड़े, जोखिम बढ़ा रहे

भोपाल। नगर निगम अवैध निर्माणों को तोडऩे की अधूरी कार्रवाई कर रहा है। इससे संबंधित क्षेत्रों में रहवासियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। बीते छह माह में निगम ने 20 से अधिक बड़े निर्माणों को अधूरा तोड़ा। इसमें से 60 फीसदी से अधिक को फिर से बना लिया गया, जबकि बाकी अधूरे ही टूटे हुए हैं।


हाल में अशोका विहार में तोड़ी गई बिल्डिंग भी अधूरी ही टूटी हुई है, इसका मलबा भी पूरी तरह नहीं हटा। इसी तरह जिंसी पर एक अवैध भवन तोड़ा और मलबा रोड पर ही डाल दिया। भवन के भी कुछ हिस्से अधूरे टूटे हुए आसपास वालों के लिए दिक्कत बढ़ा रहे हैं। ऐशबाग के साथ गिन्नौरी, हाथीखाना, चेतकब्रिज के पास कस्तुरबा नगर, गौतमनगर, कोहेफिजा, श्यामला हिल्स पर कार्रवाई की थी और 80 फीसदी में भवन पूरी तरह नहीं तोड़े गए।


एक स्थिति ये भी: कार्रवाई कम, नोटिस अधिक
नगर निगम अवैध निर्माणों पर नोटिस देने में सबसे आगे है। नियम 302,ख्305 और 307 के तहत नोटिस जारी करके अवैध निर्माण करने वालो पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है, लेकिन निगम प्रशासन खुद अपने स्तर पर कार्रवाई नहीं करता। हाल में अशोका विहार की कार्रवाई एक लोकायुक्त प्रकरण का जवाब देने के लिए हुई थी। इससे पहले की कार्रवाई जिला प्रशासन के नेतृत्व में हुई। गौरतलब है कि बीते तीन माह में निगम की टीम दस हजार नोटिस जारी किए।

इस तरह सिर्फ नोटिस देकर जिम्मा खत्म, अवैध निर्माणों की अनदेखी


- चूनाभट्टी में दो प्लॉट को मिलाकर एक अस्पताल बनाया गया। ये तरीका अवैध है और इसकी शिकायत की गई, लेकिन सिर्फ नोटिस देकर जिम्मेदारी पूरी कर ली।


- जिंसी में एक नेताजी ने सरकारी जमीन पर 5000 वर्गफीट का कब्जा किया हुआ है। इसकी सीएम हेल्पलाइन से लेकर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा में शिकायत है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा।


- गांधी नगर में पूर्व पार्षद ने सरकारी जमीन पर बिना अनुमति पूरा मार्केट बनाकर दुकानें बेची दी। इसकी शिकायत हुई, लेकिन सुनवाई नहीं की गई। सिर्फ नोटिस ही जारी किया गया।
- चूनाभट्टी काली माता मंदिर के पास का पूरा क्षेत्र विवादित भूमि पर बस गया। इसे लेकर नोटिस जारी किया गया, सुनवाई चल रही और इस दौरान यहां बड़े निर्माण हो गए।
- हाथीखाना, गिन्नौरी में बिना अनुमति के अभी दस से अधिक बड़ी बिल्डिंग बनी हुई है जिन्होंने अनुमति नहीं ली हुई है।

ईमानदारी से जांच तो, सवा लाख से अधिक कार्रवाई करना पड़े


अवैध व अनुमति के विपरित निर्माणों पर यदि ईमानदारी से जोनवार जांच व कार्रवाई की जाए तो शहर में सवा लाख से अधिक अवैध निर्माण सामने आएंगे। वर्ष 2016 में शहर में निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने आधे अधूरे निर्माणों को कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर जांच की थी। तब निगम के जोन क्रमांक 18 और 19 तक ही मामला सीमिति था। जांच रिपोर्ट में जाहिर हुआ था कि 80 फीसदी में गलत तरीके से कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुए, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।

कोट्स
निगम प्रशासन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के साथ अनुमति से अधिक हुए निर्माणों को तय नियम के तहत कंपाउंडिंग से नियमित करने की कार्रवाई भी कर रहा है। शिकायतों के आधार पर भी कार्रवाई की जाती है। अभी कार्रवाईयों की संख्यां बढ़ी है।


- वीकेएस चौधरी, निगम आयुक्त

देवेंद्र शर्मा Reporting
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