scriptBMC Divers work more, paid less | निराशा में डूब रहे दूसरों को डूबने से बचाने वाले | Patrika News

निराशा में डूब रहे दूसरों को डूबने से बचाने वाले

- दर्जनभर गोताखार अभी तक बचा चुके तमाम लोगों की जान
- लगभग 200 डैड बॉडी भी निकाली हैं इन्होंने पानी से
- बाढ़ और विसर्जन जैसे समय पर 24 घंटे करते ड्यूटी
- बारिश हो या कड़कती ठंड, किसी भी समय निकल पड़ते मदद को
- वेतन, सुविधाओं के लिए शासन की तरफ से मायूस गोताखोर

भोपाल

Published: February 05, 2020 03:52:47 pm

भोपाल. दूसरों को डूबने से बचाने वाले गोताखोर वेतन और सुविधाओं के लिए की जा रही उपेक्षा से त्रस्त हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जबकि ये गोताखोर काफी कठिन ड्यूटी करते हैं। किसी ने जान देने के इरादे से पानी में छलांग लगाई हो या बाढ़ में लोग, मवेशी फंस गए हों, गोताखोर ही बचाने के लिए तुरंत दौड़ाए जाते हैं। नगर निगम में बहुत कम वेतन पर काम कर रहे गोताखोरों की पीड़ा सुनकर किसी का भी दिल पिघल जाएगा।

निराशा में डूब रहे दूसरों को डूबने से बचाने वाले
निराशा में डूब रहे दूसरों को डूबने से बचाने वाले

भोपाल नगर निगम के पास 11 गोताखोर हैं। इन्हीं गोताखोरों के जिम्मे बड़ा तालाब, छोटा तालाब, मोतिया तालाब, मुंशी हुसैन खां तालाब, सिद्दीक हसन तालाब, लेंडिया तालाब, कलियासोत डैम, केरवा डैम, घोड़ा पछाड़ डैम आदि जलाशय हैं।

यहां पर कोई हादसे की कोई सूचना होते ही इन गोताखोरों को तत्काल बुलाया जाता है। सर्दी, गर्मी हो या बरसात, दिन हो या रात, इन्हें तो कॉल आते ही दौडऩा होता है। ठंड में जब आदमी घर में सोता है, तब इन्हें ठंडे पानी में बिना देरी किए उतरना होता है। ठंडे पानी में जाने से हालत खराब हो जाती है। जीवन का खतरा तो किसी भी सीजन में पानी में उतरने से रहता है।
ऐसे कई काम किए

नगर निगम के गोताखोर बताते हैं कि वे वर्ष 2009 से काम कर रहे हैं। इन दस वर्षों में उन्होंने लगभग 40 व्यक्तियों को डूबने से बचाया है। कई महिलाएं और लड़कियां परेशान होकर जान देने के इरादे से गहरे पानी में कूदीं, लेकिन मौके पर मौजूद गोताखोरों ने इन्हें बचा लिया।

ये गोताखोर करीब 200 डैड बॉडी भी पानी से निकाल चुके हैं। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, मूर्ति विसर्जन आदि अवसरों पर तो इन्हें कई दिनों तक 24 घंटे की ड्यूटी देनी पड़ती है। समर्रा तोड़ा में आई बाढ़ में कई लोगों और मवेशी को बचाया। सैर सपाटा में रात के दो बजे कार गिरी। कार में लोगों के फंसे होने की खबर पाते ही गोताखोर रात में भागे और वहां पहुंचकर लोगों को बचाया। बरसात में मंडीदीप में बाढ़ में फंसे लोगों और बकरियों को एनडीआरएफ की टीम के साथ जाकर बचाया।

इनाम या वेतनवृद्धि नहीं
इतना जोखिम भरा काम करने पर भी गोताखोरों को कोई इनाम, प्रशस्ति पत्र या वेतन वृद्धि नहीं दी जाती। जान हथेली पर रखकर काम करने वालों को पांच हजार रुपए मिलते हैं, जिनमें उन्हें स्वयं और परिवार का खर्च उठाना पड़ता है।

ये हैं नगर निगम के गोताखोर
1. बन्ना उस्ताद, सुभाष नगर
2. फैदुल्ला, पुल बोगदा
3. ओमप्रकाश बाथम, भोईपुरा
4. संजय बाथम, भोईपुरा
5. प्रमोद बाथम, भोईपुरा
6. राजेन्द्र बाथम, भोईपुरा
7. शेख आसिफ, किलोल पार्क, धोबी घाट
8. आसिफ बशीर, वीआइपी रोड
9. मो. आमिर, फतेहगढ़
10. मो. मजहर, फतेहगढ़
11. मो. इमरान, फतेहगढ़

हमारे पास 11 गोताखोर हैं, जिनमें 3-4 रेगुलर हुए हैं, शेष अस्थाई तौर पर कार्यरत हैं। उन्हें वर्दी, लाइफ जैकेट आदि बचाव संबंधी सामान उपलब्ध कराया गया है। वेतन, सुविधाएं बढ़ाने पर उच्च स्तर पर विचार हो सकता है।
- रामेश्वर नील, प्रभारी, अग्निशमन शाखा, नगर निगम

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