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कृष्ण जन्म पर टूटे जेल के ताले

बरखेड़ा सालम में भागवत कथा में पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन ...

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dharam

भोपाल। बरखेड़ा सालम में भागवत कथा में पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया गया। कथा वाचक रेखा शास्त्री ने कहा कि कृष्ण ? हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं।
सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं।

जब-जब पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेइस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण माने जाते हैं।

श्री राम का जन्म क्षत्रिय कुल में और श्री कृष्ण का जन्म राजा यदु के वंश में हुआ था। जब कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के ताले खुल गए थे, सिपाही गहरी नींद में खो गए थे, यमुना श्रीकृष्ण के पैर छूने के लिए लगातार उफनती जा रही थी। शेषनाग प्रभु को बारिश से बचाने छाया दे रहे थे। श्री कृष्ण की लीला देखकर सभी देवी-देवता अचंभित थे। कथा पंडाल में श्री कृष्ण जन्म पर भक्त झूमते गाते नजर आए, वहीं कृष्ण जन्म पर बधाई गीत गाए।

महिलाओं को देवी के रूप में शामिल कर पूजा
पिपलानी. गणेश मंदिर में महाराष्ट्रीयन कोंकणस्थ ब्राह्मणों की कुलदेवताओं की पूजा और साधारण भोजनों से अलंकृत करने का कार्यक्रम 'बोडन रविवार की रात आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महाराष्ट्र समाज की महिलाएं उपस्थित रहीं।

इसमें जिन महिलाओं को देवी के रूप में शामिल किया गया, उसमें दातार, काले और परांजपे, गद्रे थीं। मंदिर समिति के मुकुंद गोडबोले ने बताया कि बोडन के तहत एक बड़ा सा थाल लेते हं। उसमें अन्नपूर्णा देवी को गुंथे हुए आटे के आसन पर विराजमान कर आटे के आभूषणों से शृंगारित करते हैं।

दो कुमारिका, तीन सौभाग्य महिलाएं एवं एक देवी को उस थाल के चारों ओर बिठाते हंै। फिर उस थाल में पूरण पोली, सादी रोटी, दाल, चावल कढ़ी, चटनी, सब्जी, दूध, शहद, दही, शक्कर, पानी आदि डालकर जितने पूजा में बैठे है।

वे सब एक साथ दोनों हाथंो से डाले गए भोग को मिलाते है। इसी समय महिला पर देवी आती है। उन कुमारिकाओं एवम अन्य महिलाओं के साथ तब तक भोग मिलाते है, जब तक आयी हुई देवी शांत होती है।

इसके बाद देवी की आरती होती है। इस बने घोल का सभी महिला पुरुष तिलक करते हैं। इस कार्यक्रम में महिलाएं नौ गज की साड़ी जिसे लुगडे कहते हैं, पहनकर पूजा करती है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी प्रसन्न होकर घर परिवार को सुख- समृद्धि प्रदान करती है। इस मौके पर प्राजक्ता गोडबोले, केलकर, गौरी अभ्यंकर, परांजपे, नीशा पाटणकर, सोहनी आदि उपस्थित रही।