शहर में बीआरटीएस से समस्या

२४ किमी लंबे बीआरटीएस में १२५ से ज्यादा कट पाइंट, लो फ्लोर बसों के लिए ही जगह नहीं, डेडीकेटेड लेन में एक भी ट्रैफिक सिग्नल चालू नहीं  स्कूल बसों, सूत

भोपाल। मिसरोद से बैरागढ़ तक २४ किमी लंबे मौजूदा जर्जर बीआरटीएस में १३० लो फ्लोर बसों के साथ १२०० स्कूल बस और २०० से ज्यादा इंटरसिटी बसों को प्रवेश देने का फैसला लोगों की जान खतरे में डाल सकता है। बीसीएलएल जिस मॉनीटरिंग सिस्टम की बदौलत बीआरटीएस की डेडीकेटेड लेन में बसों को नियम से चलाने का दावा कर रहा है वो सिस्टम वास्तव में एक्टिव ही नहीं है। पत्रिका ने २४ किमी लंबे बीआरटीएस का मुआयना कि� ��ा जिसमें जमीनी हकीकत सामने आ गई।

डेडीकेटेड लेने में ८५ स्थानों पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल पूरी तरह से बंद हैं। बीआरटीएस की रैलिंग में १२५ से ज्यादा स्थानों पर कट पाइंट बने हुए हैं जहां से लोग शॉर्टकट के चक्कर में अनाधिकृत प्रवेश कर दूसरी तरफ छलांग लगाते हैं। बागसेवनिया, बीयू, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, बीजेपी ऑफिस, प्रगति पेट्रोल पंप, रोशनपुरा सहित बैरागढ़ मेनरोड पर बीआरटीएस बेहद संक� ��ा है।

यहां लो फ्लोर बसें ही मुश्किल से एक साथ क्रॉस हो पाती हैं। डेडीकेटेड लेन में तीन श्रेणी की बसों को दौड़ाने के लिए बीसीएलएल ने ७ बिंदुओं की गाइड लाइन बनाई है लेकिन नियम तोडऩे वाली बसों पर कार्रवाई कैसे होगी इसके लिए मौके पर कोई इंतजाम नहीं है। सिटी बसों के ड्रायवरों में ओवर स्पीडिंग, ओवर टेकिंग और कहीं भी अचानक रूककर सवारी उठाने की जानलेवा आदतें हैं। एेसे में डेडीकेटेड लेन मे ं इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित होगी और बीसीएलएल फिलहाल इससे निपटने अभी तैयार नहीं है।

होशंगाबाद बीआरटीएस पर सर्वाधिक लोड बीआरटीएस पर सबसे ज्यादा स्कूल बसें और प्रायवेट बसें होशंगाबाद रोड पर दौड़ती हैं। मिसरोद की दिशा से नोबल अस्पताल, सेंचुरी मॉल, स्नेह नगर, शनि मंदिर और चिनार फॉर्चून के बीच ही पूरे १५ कट पाइंट हैं जहां से लोग डेडीकेटेड लेने क्रॉस करते हैं। यहां से बागसेवनिया थाना चौराहे तक १४ स्थानों पर रैलिंग टूटी हुई है और दानिश नगर के पास बीआरटीएस क्रॉसिंग बनाई गई है। पिछले साल इस हिस्से पर ६ से ज� �यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। कैमरों की कनेक्टिविटी नहीं मिली स्मार्ट सिटी सेल ने बीआरटीएस सहित शहर के प्रमुख ३२ चौराहों पर हाई क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।

इन कैमरों की कनेक्टिविटी केवल स्मार्ट सिटी कंट्रोल कमांड सेंटर के पास है लेकिन बीसीएलएल के कंट्रोल रूम में इसका डाटा शेयर नहीं होता। इस स्थिति में बीसीएलएल को ये पता ही नहीं चल सकेगा कि बीआरटीएस के किस्स हिस्से पर कौन साी बस नियम का पालन नहीं कर रही है। निगरानी और नियंत्रण की गाइड लाइन और हकीकत १- डेडीकेटेड लेन में चलने से पहले ऑपरेटरों को गठित कमेटी से मंजूरी लेनी होगी। - आदेश जारी करने के बावजूद बीसीएलएल ने अब तक एेसी कोई समिति ही गठित नहीं की है। दावा है कि आवेदनों की संख्या बढऩे के बाद समिति गठित कर अनुमतियां जारी की जाएंगी। इधर शहर में बगैर अनुमति ही प्रायवेट बसें डेडीकेटेड लेन में धड़ल्ले से प्रवेश करती देखी जा सकती हैं।

२- बीआरटीएस में बगैर रुके गुजरना होगा। - स्कूल बसों के लिए ये नियम व्यवहारिक नहीं है। लो फ्लोर बसें मिसरोद से बैरागढ़ के बीच २५ से ज्यादा स्टॉप पर रूकती हैं। इंटरसिटी बसें रूकी हुई बसों को क्रॉस करने के चक्कर में दुर्घटना का शिकार हो सकती हैं। ३- नियमों की अवमानना की स्थिति में बसों का संचालन निरस्त किया जाएगा। - नियमों की अवमानना करने वाली बसों की पहचान करने के लिए बीसीएलएल के पास कोई ऑटोमैटिक सिस्टम नहीं है। बीआरटीएस के पाइंट पर खड़े गार्ड से ये काम कराया जाएगा। ४- समस्त बस ऑपरेटर और वाहन चालकों को बीसीएलएल ट्रैनिंग प्रोग्राम में शामिल होना पड़ेगा। - केवल अनुमति मांगने वाले बस ऑपरेटर और वाहन चालकों को ही बुलाया जाएगा जबकि शहर में बड़ी तादाद में बसों का संचालन किया जा रहा है।

५- बीआरटीएस में चलने वाली स्कूल बसों की जवाबदारी संबंधित स्कूल प्रबंधनों की ही रहेगी। - शहर का एक भी स्कूल प्रबंधन बच्चों को ले जाने वाली बसों की जिम्मेदारी लेने तैयार नहीं है। ये बात जिला प्रशासन तक नहीं मनवा पाया।

६- संचालित स्कूल बसों की मॉनीटरिंग के लिए नोडल अधिकारी स्कूल प्रबंधन ही तय करेगा। - इस मुद्दे पर भी शहर का एक भी स्कूल प्रबंधन जिला प्रशासन से सहमत नहीं हुआ था। ७- बसों में जीपीएसी सीसीटीवी जरूरी है। डेडीकेटेड लेन पैदल पार करना अब प्रतिबंधित हो चुका है।

- शहर की ९० प्रतिशत स्कूलों में ये सुविधा मौजूद नहीं है। पैदल चलने वालों को रोकने के लिए बीसीएलएल के पास कोई इंतजाम नहीं है।

सुधार और सुझावों पर लगातार काम करेंगे। फिलहाल ये प्रयोग शुरूआती स्टेज पर है। बीआरटीएस में स्कूल बसों को चलाने की डिमांड जनता के बीच से ही आई थी। संजय कुमार, सीईओ, बीसीएलएल

हर्ष पचौरी Reporting
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