दिन में नहीं जलाई हेडलाइट तो भरना होगा जुर्माना, जानें क्या है बात!

दिन में नहीं जलाई हेडलाइट तो भरना होगा जुर्माना, जानें क्या है बात!

यदि किसी वाहन की हेड लाइट दिन में भी जलती दिखे तो उसे बंद कराने का इशारा बिल्कुल भी न करें। जी हां, क्योंकि दिन में भी वाहन की लाइट जलाना कर सफर करने का कानून लागू होने वाला है।


भोपाल। यदि किसी वाहन की हेड लाइट दिन में भी जलती दिखे तो उसे बंद कराने का इशारा बिल्कुल भी न करें। जी हां, क्योंकि दिन में भी वाहन की लाइट जलाना कर सफर करने का कानून लागू होने वाला है। यूरोपियन देशों की तरह पर भारत सरकार भी बाइक की हेडलाइट जलाकर ही चलने का नया नियम लागू होने वाला है।

देश में लागू हुए बीएस-4 (Bharat stage emission standards) मानकों के तहत अब दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों ने अपने सभी मॉडल से हेड लाइट ऑन-ऑफ करने का सिस्टम ही खत्म कर दिया है।

हेड लाइट ऑन ऑफ स्विच की जगह अब सभी दोपहिया वाहनों में आटोमैटिक हेड लाइट सिस्टम (ओएचओ) होगा। इसमें इंजन स्टार्ट होते ही मोटरसाइकिल की हेडलाइट अपने आप ऑन हो जाएगी। जब तक दोपहिया वाहन का इंजन स्टार्ट रहेगा तब तक हेडलाइट ऑन रहेगी। वाहन चालक इसे चाहकर भी बंद नहीं कर पाएंगे। अब सभी वाहन चालक दिन में भी हैडलाइट जलाकर चलें तो आश्चर्य न करें।


Bharat stage emission




एक अप्रैल से हो जाएगी नई व्यवस्था लागू
सूत्रों के मुताबिक सिर्फ नए मॉडलों में ही यह व्यवस्था रहेगी। पुराने वाहनों को हेडलाइट को मेनुअली ऑन रखना होगा। यदि दिन में दोपहिया वाहन में लाइट आफ मिली तो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके लिए जुर्माना भी भरना होगा।


नई व्यवस्था के लिए है यह सोच
मध्यप्रदेश के आरटीओ के मुताबिक अब तक हमारे देश में बीएस-3 मानकों के दोपहिया वाहन चल रहे थे। अब बीएस -4 मानकों को अप्रैल 2017 से लागू किया जाएगा। इसी के तहत अब दिन में भी दोपहिया वाहनों की हेडलाइट आन रहेगी।

नई व्यवस्था से यह होगा फायदा
भोपाल स्थित एक टूव्हीलर शोरूम के ऑनर मनोज जौहरी के मुताबिक यह तकनीक विदेशों में अपनाई जा रही है। दिन में भी वाहनों की पार्किंग लाइट जलाने का मकसद दुर्घटना में कमी करने का प्रयास है जौहरी के मुताबिक अपने देश में बढ़ते दुर्घटनाओं के ग्राफ को कम करने के उद्देश्य से यह जरूरी है। कई कार निर्माता कंपनियों ने तो अपने नए माडल में इसे जरूरी कर दिया है। इसका फायदा यह होगा कि घने कोहरे, धूल या बरसात और भारी ट्रैफिक में वाहन की दृश्यता कम हो जाती है। इसलिए इस प्रकार के नियम में बदलाव अच्छा कदम है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियों के वाहनों में बीएस-4 मानकों के वाहन में स्विच ही हटाए जा रहे हैं।

इधर भोपाल आरटीओ के एक अधिकारी के मुताबिक बीएस-4 मानकों पर जो सेंट्रल गवर्नमेंट में निर्णय हुए हैं, उसके बारे में फिलहाल कोई सर्कुलर या नियम लागू करने के निर्देश नहीं आए हैं।

ऐसा है विदेशों में नियम
- यूरोपीय देशों में 2003 से डेटाइम रनिंग लाइट्स (डीआरएल) का नियम लागू है।
- विदेशों से भारत आने वाली कारों में भी यह सिस्टम इनबिल्ट है। 
- कई अन्य विकसित देशों में भी दिन के उजाले में बाइक की हेडलाइट जलाना अनिवार्य है।


आने लगी बेस-4 नार्म्स की बाइक
होंडा की आई नई बाइक में सेफ्टी के लिहाज से ऑटो हेडलैंप ऑन फीचर दिया गया है, जो चालक की विजिबिलिटी को और बेहतर करता है। इसके अलावा बजाज ने भी अपनी नई बाइक बीएस-4 नार्म्स के मुताबिक बाजार में उतारी है।


कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती
1. देशभर में 1 अप्रैल 2017 से वाहनों के लिए भारत स्टेज इमिशन स्टैंडर्ड (बीएस) 4 लागू करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिए थे। 
2. निर्देश के बाद एनवायरमेंट पोल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) ने सख्त रुख अपनाया।
3. ईपीसीए ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों को स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2017 से बीएस-4 मानक से कम कोई भी वाहन पंजीकृत नहीं होगा।
4. वाहन निर्माता कंपनियों ने भी कहा है कि उन्हें इस मोर्चे पर उन वाहनों के स्तर पर राहत दी जाएगी, जो 31 मार्च 2017 तक तैयार हो जाएंगे।



जून में आई रिपोर्ट ने चौका दिया था
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 9 जून को एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट का नाम है- 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2015'। इस रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पूरे देश में जितने भी सड़क हादसे हुए, उनमें 11 फीसदी हादसे सिर्फ मध्यप्रदेश में हुए हैं। 2015 में करीब 54, 947 रोड एक्सीडेंट मध्यप्रदेश में हुए। अगर हम पूरे देश की बात करते हैं तो पिछले साल करीबन 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई जिसमें 1 लाख 46000 हजार लोग मारे गए और इसके तीन गुना लोग घायल हुए। इन हादसों में एमपी टॉप 10 प्रदेशों में 3 नंबर पर है।














road accident


ये हैं रोड एक्सीडेंट में टॉप 13 प्रदेश
राज्य हादसे
तमिलनाडु  69,059
महाराष्ट्र  63,805
कर्नाटक  44,011
केरल  39,014
उत्तर प्रदेश  32,385
आंध्र प्रदेश  24,258
राजस्थान  24,072
गुजरात  23,183
तेलंगाना  21,252
छत्तीसगढ़  14,446
पश्चिम बंगाल  13,208
हरयाणा  11,174

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