बीयूआईटी में लैब नहीं फिर भी पास हो जाते हैं छात्र

Yogendra Sen

Publish: Mar, 14 2018 10:28:43 AM (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
बीयूआईटी में लैब नहीं फिर भी पास हो जाते हैं छात्र

थ्योरी परीक्षा में फेल होने के बाद भी मिल रही बीई की डिग्री

भोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों को थ्योरी परीक्षा में पास होना जरूरी नहीं है। क्योंकि छात्र सेशनल और प्रैक्टिकल परीक्षा में अच्छे अंक लाकर ही पास हो सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि बीई सिविल ब्रांच के छात्रों के लिए लैब ही नहीं है। इसके अलावा अन्य लैब के हाल भी बुरे हैं।

इसके बाद भी छात्र उसकी प्रैक्टिक्ल परीक्षा में पास होते आ रहे हैं। बीई सिविल ब्रांच के अलावा कैड लैब के कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर नहीं है। कंप्यूटर साइंस की लैब में कंप्यूटर आउटडेटेट हैं। मैकेनिकल की लैब में अच्छी मशीनें नहीं है। इसके कारण छात्रों ने भी सवाल खड़े किए। लेकिन इसका हल नहीं निकला। इसके कारण विश्वविद्यालय की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। इसका मुख्य कारण पिछले सालों में तकनीकी शिक्षा के एक्सपर्ट को डायरेक्टर नहीं बनाना भी है। वहीं प्रभारी डायरेक्टर जब कोई कार्रवाई करते हैं तो प्रशासन उनके प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लेते। इस कारण यूआईटी में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं।

 

एक्सपर्ट कमेंट्स --
जब लैब ही नहीं है तो कोई भी समझ सकता है कि छात्र प्रैक्टिकल परीक्षा में पास कैसे होता होगा। अब इंस्टीट्यूट्स में प्रैक्टिकल होते ही नहीं हैं। इसलिए सेशनल व प्रैक्टिकल परीक्षा में पारदर्शिता खत्म हो रही है। थ्योरी व प्रैक्टिकल में न्यूनतम माक्र्स की व्यवस्था होनी ही चाहिए। एेसा नहीं होने से गुणवत्ता में गिरावट आना तय है।

- सुबोध पाण्डेय, शिक्षाविद् तकनीकी शिक्षा
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मैं सिविल ब्रांच थर्ड ईयर का छात्र हूं। इसकी लैब नहीं है। मुझे तो आज तक मैनिट या अन्य संस्थान में प्रैक्टिकल करने के लिए नहीं पहुंचाया गया। अन्य ब्रांच की लैब भी बुरी स्थिति में है। कई बार मांग की गई। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
- स्वप्निल पटेल, छात्रसंघ अध्यक्ष

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यह सही है कि छात्र लंबे समय से व्यवस्थाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। बीयूआईटी के डायरेक्टर को बहुत अधिक अधिकार नहीं है। इसलिए मैं कुछ कर भी नहीं सकता। जो कुछ भी करना है प्रशासन को करना है।

- प्रो.अश्विनी वांगनू, डायरेक्टर बीयूआईटी

 

 

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