उपचुनावः 28 सीटों के चुनाव में बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा

उपचुनाव वाले जिलों में कोरोना कोरोना से स्थिति हुई गंभीर, राजनीतिक दल भूले कोरोना गाइडलाइन, हाईकोर्ट जता चुका है नाराजगी

By: Hitendra Sharma

Published: 20 Oct 2020, 04:04 PM IST

भोपाल. मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में इस बार 355 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। सोमवार को नाम वापसी की समय सीमा बीतते ही मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई। जांच के बाद 74 प्रत्याशियों के पर्चे पहले ही खारिज किए जा चुके थे। 35 ने सोमवार को उम्मीदवारी वापस ले ली। अब 355 उम्मीदवार मैदान में हैं।

जिन जिलों में इन 28 सीटों पर उप चुनाव होने हैं वहां चुनावी पारा बढऩे के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण का ग्राफ भी बढ़ रहा है। प्रदेश के उपचुनाव वाले इन19 जिलों पर लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या और मौत के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है।

प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में उप चुनाव की सबसे ज्यादा सीटें हैं। यहां कोरोना मरीजों की संख्या भी अधिक है। हालांकि चुनाव आयोग उप चुनाव क्षेत्रों पर लगातार नजर रखकर, कोरोना गाइडलाइन के साथ चुनाव कराने की कोशिश कर रहा है। आयोग प्रतिदिन जिला प्रशासन से मृतकों, सक्रमित मरीजों और स्वस्थ होने वालों की रिपोर्ट ले रहा है।

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संक्रमण 1.61 लाख के पार
प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख 61 हजार के पार जा पहुंचा है। प्रदेश में हर रोज एक हजार से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। उप चुनाव क्षेत्रों में भी यह आंकडा लगातार बढ़ रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के ग्वालियर जिले की बात करें तो यहां संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

विशेष व्यवस्थाएं

असल में कोरोना काल होने के कारण यह चुनाव आम चुनाव से हटकर होंगे। चुनाव आयोग यहां विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने से लेकर कोरोना संक्रमण रोकने तक के उपाय होंगे। यह भीध्यान रखना होगा कि सभी को मतदान का अधिकार मिले। कोरोना संक्रमित मतदाता के लिए भी मतदान की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसी को ध्यान में रखकर आयेाग तैयारी की है।

सख्त कार्रवाई के निर्देश
उपचुनाव की सभाओं में उमडऩे वाली भीड़ पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने वाले नेताओं पर केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। कहा था, अब प्रोटोकॉल का कोई नेता या दल उल्लंघन करता है उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून या आइपीसी के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि कलेक्टर नियमों का पालन कराने में असमर्थ रहते हैं तो उन पर भी अवमानना की कार्रवाई की जाए। 3 अक्टूबर को दिए गए कोर्ट के ये आदेश नेता और अधिकारी हवा में उड़ा रहे हैं।

हाई कोर्ट की नाराजगी
उच्च न्यायालय भी दे चुका है निर्देश मध्य प्रदेश में चल रहे उपचुनाव के प्रचार प्रसार को लेकर हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेश के नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि राजनेता या फिर राजनीतिक दल का सदस्य जनता के लीडर के रूप में होता है, इसलिए लीडर की जिम्मेदारी होती है कि वह कानून का बेहतर तरीके से पालन करे और उल्लंघन को रोके, लेकिन मतदाता लीडर के आचरण, व्यवहार और उसके कर्मों का अनुकरण नहीं करते हैं। इसके पीछे कारण हमारे समाज में फैली व्याप्त अज्ञानता, अशिक्षा और गरीबी है। हमारे राजनीतिक दलों के सदस्य अपने मतदाता और आम जनता के बीच एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं, केन्द्र, राज्य और जिला प्रशासन की कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करके।

 

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