केथा वृक्ष के गोंद से तैयार होती है कलाकृतियां... जानें और सीखें भी

भारत के आंचलिक कलारूपों और कथाओं में प्रचलित कृष्णा रुक्मिणी प्रसंगों पर केन्द्रित 10 दिसवीय कलाकार कार्यशाला का आयोजन

By: hitesh sharma

Published: 13 Mar 2018, 05:20 AM IST

भोपाल। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय सदैव ही भारत की संस्कृति एवं कला को संरक्षित करने में प्रत्यनशील रहा है। इसी तरम्य में संग्रहालय के जनजातीय आवास मुक्ताकाश प्रदर्शनी परिचयात्मक गैलरी में आयोजित भारत के आंचलिक कलारूपों और कथाओं में प्रचलित कृष्णा रुक्मिणी प्रसंगों पर केन्द्रित 10 दिसवीय कलाकार कार्यशाला में आये उड़ीसा के पटट्चित्र कलाकारों ने इसके निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले पटट्चित्र का आधार बनाने के लिए पतले कपडे पर सफेद चूना पत्थर के पाउडर और इमली के बीज से बने गोंद को मिलाकर लगाया जाता है।

यह है तरीका
इस पेस्ट से कपड़े के दो टुकड़ों को आपस में जोड़ा जाता है और उस पर कई बार कच्ची मिट्टी का लेप किया जाता है जब तक कि वह पक्का न हो जाए। जैसे ही कपड़ा सूख जाता है तो उस पर खुरदरी मिट्टी के अन्तिम रूप से पालिश की जाती है। इसके बाद उसे एक नरम पत्थर अथवा लकड़ी से दबा दिया जाता है, जब तक कि उसको सतह एक दम नरम और चमड़े की तरह न हो जाए। यही कैनवास होता है जिस पर चित्रकारी की जाती है।

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इसके बाद कलाकार सर्वप्रथम कैनवास पे किनारा बनाते है उसके बाद बिना पेंसिल या चारकोल (कोयला) का सहारा लिए सीधे ब्रश से हल्के लाल एवं पीले रंग से रफ स्केच बनाते है। तत्पश्चात रफ स्केच पर सामान्यता सफेद लाल, पीला और काला रंग से आकृति को रंगते है।

चित्रकार पेंटिंग को काली लाइनों को ब्रश से सहारे से उभरता है। जब पेंटिंग पूरी हो जाने पर पेंटिंग की सतह पर उसे लम्बे समय तक पानी एवं अन्य कारणों से खराब होने से बचने के लिए लाख को कोयले की आग में गर्म कर लाख की पतली परत लगाते है। रंग तैयार करना संभव तरू पट्टचित्र बनाने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है जिसमें प्राकृतिक रूप में उपलब्ध कच्ची सामग्री को रंग का सही रूप देने में चित्रकारों की शिल्पकारिता का प्रयोग होता है।

केथा वृक्ष की गोंद

यह इसकी मुख्य सामग्री है और भिन्न-भिन्न तरह के रंग द्रव्य तैयार करने के लिए एक बेस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जिसमें तरह-तरह की कच्ची सामग्री मिलाकर विविध रंग तैयार किए जाते है। उदाहरण के लिए शंख का उपयोग सफेद रंग बनाने और काजल का प्रयोग काला रंग बनाने के लिए किया जाता है।

कीया के पौधे की जड़ का इस्तेमाल सामान्यतः एक साधारण ब्रश बनाने और चूहे के बालों का प्रयोग जरूरत होने पर बढिया ब्रश बनाने के लिए किया जाता है जिन्हें लकड़ी के हैंडल से जोड़ दिया जाता है।
पट्टचित्र मूलतः धार्मिक लोककथाओं एवं श्रीकृष्ण, श्री जागन्नाथ की लीलाओं की पृष्ठभूमि पर आधारित होता है। उड़ीसा में पारंपारिक रूप से पट्टचित्र का निमार्ण महाराणा एवं महापात्र समूह के लोगों द्वारा किया जाता है।

hitesh sharma Reporting
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