जानिए...यहां क्यों परोसे जाते हैं भगवान को छप्पन भोग

रसगुल्ले से शुरू होकर इलायची तक होती है इस महाभोग में



उज्जैन.
भगवान को लगाए जाने वाले भोग की बड़ी महिमा है। देवालयों में देवताओं की प्रतिमाओं के समक्ष 56 प्रकार के व्यंजन परोसे जाने की शुरुआत दीपावली जैसे महापर्व से होती है। इस महाभोग में रसगुल्ले, दही, चावल, पूरी, पापड़ आदि से लेकर इलायची तक शामिल होती है। 

आठ प्रहर जीमते थे बाल कृष्ण
ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि भगवान को अर्पित करने वाले छप्पन भोग के पीछे कई रोचक कथाएं हैं। कहा जाता है कि यशोदाजी बाल कृष्ण को आठ प्रहर भोजन कराती थीं। अर्थात बाल कृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे। जब इंद्र के प्रकोप से सारे ब्रज को बचाने के लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था, तब लगातार सात दिन तक भगवान ने अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था। आठवें दिन जब इंद्र का कोप शांत हुआ और ब्रजवासी पर्वत से निकलकर घरों की ओर जाने लगे, तो दिन में आठ प्रहर भोजन करने वाले ब्रज के नंदलाल का लगातार सात दिन भूखा रहना ब्रजवासियों और माता यशोदा के लिए बड़ा कष्टप्रद हुआ। भगवान के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धा-भक्ति दिखाते हुए सभी ब्रजवासी सहित यशोदाजी ने 7 दिन और अष्ट प्रहर के हिसाब से (7 इंटू 8 बराबर 56) व्यंजनों का भोग बाल कृष्ण को लगाया।

गोपियों ने भेंट किए थे 56 भोग
श्रीमद्भागवत के अनुसार गोपिकाओं ने एक माह तक यमुना में भोर में ही न केवल स्नान किया, बल्कि कात्यायनी मां की अर्चना भी इस मनोकामना से की कि उन्हें कृष्णजी ही पति रूप में प्राप्त हों। भगवान ने उनकी मनोकामना पूर्ति की सहमति दे दी। व्रत समाप्ति और मनोकामना पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ही उन्होंने उद्यापन स्वरूप भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन परोसे थे। 

56 भोग हैं 56 सखियां
ऐसा भी कहा जाता है कि गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण राधिका के साथ एक दिव्य कमलासन पर विराजते थे। उस कमल की तीन परतें होती हैं। प्रथम में आठ, दूसरी में सोलह और तीसरी में बत्तीस। प्रत्येक पंखुड़ी पर एक प्रमुख सखी और मध्य में राधा-कृष्ण विराजते हैं। इस तरह कुल पंखुडिय़ों की संख्या 56 होती हैं, यही 56 सखियां हैं।
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Brajendra Sarvariya
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