केंद्र ने नहीं दिए मध्यप्रदेश के 1000 करोड़, अब क्या करेगा मध्यप्रदेश

- भावांतर का भंवर में किसान, केंद्र नहीं दे रहा 1000 करोड़
- पिछला बकाया : तकादा किया, पर केंद्र ने नहीं दिया

08 फसलों को पहले भावांतर में शामिल किया था
04 महीने में 27 से ज्यादा बदलाव पिछली सरकार ने किए थे
01 साल से अटका है किसानों का भावांतर का पैसा

भोपाल. प्रदेश की कमलनाथ सरकार को भावांतर योजना की बकाया राशि भारी पड़ रही है। केंद्र सरकार बार-बार मांगने के बावजूद इस योजना के 1000 करोड़ रुपए नहीं दे रही है। दूसरी ओर किसान अपना बकाया पैसा देने के लिए प्रदेश सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
दरअसल, पिछली भाजपा सरकार के समय भावांतर योजना में किसानों को नुकसान की स्थिति में अतिरिक्त राशि दी गई थी। यह योजना जब लॉन्च, तब विवादों में रही। नतीजतन, इसमें बार-बार संशोधन किए गए। नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव हुए, तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई। लेकिन, भावांतर का पूरा भुगतान नहीं हो सका था। इसका खुलासा कृषि विभाग की जांच में हुआ। बकाया मांगने के लिए सरकार ने कृषि मंत्रालय को पत्र भी लिखा। लेकिन, कोई राशि नहीं मिली। केंद्र सरकार ने इस योजना में राशि देने से इनकार कर दिया। अब सरकार इसके भुगतान को लेकर परेशान है। क्योंकि प्रदेश के खजाने की माली हालत पहले से ही खराब है। इस कारण भावांतर के 1000 करोड़ रुपए का बोझ सरकार नहीं उठा सकती। भावांतर योजना में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द, तुुअर और बाद में लहसुन को शामिल किया गया है।
- केंद्र से तकादा करेगी सरकार
केंद्र से बकाया राशि का भुगतान कराने को लेकर कृषि विभाग का एक दल दिल्ली जाएगा। फिलहाल पत्र व्यवहार के जरिए केंद्र से भावांतर, पीएम फसल बीमा और अन्य बकाया राशि की मांग की जा रही है। लेकिन, यदि फिर भी राशि नहीं मिलती है, तो कृषि मंत्री सचिन यादव और अफसरों का दल भी दिल्ली जाकर इस राशि की मांग करेगा। इसे लेकर अभी कृषि मंत्रालय से पत्राचार चल रहा है।

- केंद्र को पसंद आई थी ये योजना
मध्यप्रदेश की भावांतर योजना केंद्र सरकार को भी पसंद आई थी। इसलिए बाद में केंद्र सरकार ने प्रदेश की भावांतर योजना को अपग्रेड करके अपनाया था। लेकिन, इसके भुगतान में केंद्र सरकार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही बकाया राशि की मांग की थी।

- सोयाबीन का सबसे ज्यादा
प्रदेश में सोयाबीन और उड़द की फसल का सबसे ज्यादा पैसा भावांतर में अटका हुआ है। इसके बाद दूसरी फसलों की राशि है। पिछली सरकार के समय भावांतर योजना में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द, तुुअर और बाद में लहसुन शामिल है।


केंद्र सरकार मध्यप्रदेश को पैसा देने में भेदभाव कर रही है। भावांतर योजना के 1000 करोड़ रुपए अभी तक नहीं दिए गए हैं। पीएम फसल बीमा की राशि भी बकाया है। केंद्र से हम पूरा बकाया देने की मांग कर रहे हैं।
- सचिन यादव, कृषि मंत्री

राज्य सरकार ने पैसे की कमी के कारण भावांतर का पैसा नहीं दिया है। यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की है कि वह भावांतर का पैसा किसानों को दें।
- शिवकांत दीक्षित, राष्ट्रीय सदस्य, भारतीय किसान संघ

भावांतर का पैसा सरकार ने अब तक नहीं दिया है। केंद्र या राज्य का गणित हमें नहीं मालूम। हमें तो हमारी फसल का भावांतर मिलना चाहिए। राज्य सरकार अपने स्तर से इसकी व्यवस्था करें।
- राजेंद्र पाटीदार, किसान, मिसरोद भोपाल

anil chaudhary
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