बच्चों में गुस्से को दूर करने के लिए डांटे नहीं, बस फॉलों करें ये टिप्स

बच्चों में गुस्से को दूर करने के लिए जरूर फॉलों करें ये टिप्स

By: Ashtha Awasthi

Published: 24 Jul 2018, 06:25 PM IST

भोपाल। बच्चे वे कच्चे घड़े होते हैं, जिनको हम जिस आकार में भी ढालना चाहें वे उसी तरह का आकार ले लेते हैं। आजकल के पैरेंट्स बच्चों के कॅरियर को लेकर तो बहुत चिंतित और उत्सुक रहते हैं लेकिन वे बच्चों को रिश्तों के महत्त्व को नहीं समझा पाते। सिर्फ उनका जोर बच्चे का कॅरियर बनाने का होता है। रिश्तों की अपनी अहमियत होती है। बालमन पर ही अगर रिश्तों के महत्त्व को अंकित कर दिया जाए तो आगे चलकर ऐसे बच्चे घर-परिवार और समाज के स्तर पर अपनी अच्छी पहचान रखते हैं। माना शिक्षा का महत्त्व है लेकिन ऐसे संस्कार भी कम अहमियत नहीं रखते।

मां की गोद

कहा जाता है कि बच्चे की पहली पाठशाला मां की गोद होती है और पहला गुरु भी मां ही। मां की गोद से जो संस्कार और तहजीब बच्चे हासिल करते हैं, उसका असर उन पर जिंदगी भर होता है। ऐसे में मां की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है। मां को चाहिए कि वह बच्चे के समझने की अवस्था के साथ ही रिश्तों की अहमियत के बीज बच्चों में रोपित करने लगे। शुरुआत घर के सदस्यों से करें। बच्चे के पिता, भाई-बहिन, दादा-दादी, नाना-नानी सहित घर के तमाम सदस्यों के प्रति आदर भाव और सम्मान का भाव सिखाए।

गाइड करते रहें

अक्सर पेरेन्ट्स यह सोचते हैं कि बच्चा उम्र के अनुसार अपने अनुभव से धीरे-धीरे सब सीख लेगा। उन्हें पहले सिखाने की कहां जरूरत है। यह सोच गलत है। अपने बच्चों को चर्चा और गाइडेंस के साथ संबंधों के महत्त्व की सीख बराबर देते रहें और टोकते भी रहें।

बच्चों के लिए समय

आजकल के माता-पिता व्यस्त अधिक रहते हैं। दोनों के कामकाजी होने के चलते ये व्यस्तता कु छ और ज्यादा हो जाती है। आप चाहें कितने ही व्यस्त रहें लेकिन ध्यान रखें कि आपके बच्चों की जिंदगी में आपकी गाइडेंस बेहद जरूरी है। आपका स्थान कोई दूसरा ले ही नहीं सकता। इसलिए माता-पिता के लिए बेहद जरूरी है कि वे अपने व्यस्ततम समय से अपने बच्चों के लिए वक्त जरूर निकालें। उनसे जुड़े रहें और इस जुड़ाव के साथ ही उनमें रिश्तों के महत्त्व का बीज बोते रहें।

हमारे भाव

हमारा व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि हम दूसरों के साथ किस तरह से पेश आते हैं।दूसरों के सामने हमारे एक्शन हमारे भाव या जज्बात को दर्शाते हैं। ऐसे में बच्चों को प्रैक्टिकल रूप में बताया जाना चाहिए कि किन मामलों में किस तरह से पेश आना चाहिए।

संवाद

मधुर संबंध बनाए रखने में संवाद की अहम भूमिका होती है। अगर आप रिश्तों में संवाद बनाए रखते हैं तो वे रिश्ते प्रभावी और सार्थक रहेंगे। दूसरी तरफ संवादहीन बने रहने से रिश्तों में गलतफहमियां बढऩे की आशंका रहती है। ऐसे में बच्चों में यह गुण विकसित करें कि वे घर-परिवार अड़ोस-पड़ोस आदि में जुड़ाव के लिए संवाद के महत्त्व को समझें। सबसे खुशमिजाज तरीके से बातचीत बनाए रखकर वे संबंधों को तरोताजा बनाए रख सकते हैं। बच्चों की यह आदत उनको खुद भी खुशमिजाज बनाएगी।

Ashtha Awasthi
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