Chandra Grahan 2019: ऐसा चंद्रग्रहण 149 साल बाद आया, जानिये किन राशियों की खुलेगा भाग्य, चमकेगी तकदीर

Chandra Grahan 2019: ऐसा चंद्रग्रहण 149 साल बाद आया, जानिये किन राशियों की खुलेगा भाग्य, चमकेगी तकदीर

Deepesh Tiwari | Updated: 13 Jul 2019, 01:10:36 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

ग्रहण के दौरान ये करें, ये ना करें...

भोपाल। इस साल यानि 2019 में जुलाई में लगे सूर्यग्रहण के बाद 16 व 17 जुलाई की मध्य रात्रि को खंडग्रास चंद्रग्रहण ( chandra grahan 2019 ) दिखाई देगा। भारत में चंद्रग्रहण रात 1:31 से सुबह 4:31 तक होगा।

चंद्र ग्रहण भारतीय ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र ग्रहण के घटित होने से प्रकृति और मानव जीवन में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। ये परिवर्तन अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

जानकारों के अनुसार धर्मशास्त्रों के मुताबिक चंद्रग्रहण ( Chandra grahan 2019 ) में सूतक 9 घंटे पहले 16 जुलाई को दिन में 4:30 से शुरू हो जाएगा। यह ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा और धनु व मकर दोनों राशि के जातकों पर इसका खास असर ( Effects of Chandra Grahan ) देखने को मिलेगा। यह ग्रहण 149 वर्ष बाद माघ पूर्णिमा के अवसर पर लग रहा है।

चंद्र ग्रहण

2019 में कब-कब पड़ने वाला है चंद्रग्रहण?- ( lunar eclipse 2019 in india )
चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है जो हर साल घटित होती है। प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या घटती और बढ़ती रहती है। साल 2019 में कुल 2 चंद्रग्रहण दिखाई देंगे। इनमें 21 जनवरी को पहला चंद्रग्रहण ( chandra grahan 2019 ) लगेगा और दूसरा चंद्रग्रहण 16-17 जुलाई के बीच घटित होगा। ध्यान रहे चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन दिखाई देता है। इन दोनों ग्रहण में से सिर्फ 16-17 जुलाई को घटित होने वाला चंद्रग्रहण ही भारत में दिखाई देगा।

grahon ki chaal

चंद्रग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये काम : DO & Don't on CHANDRA GRAHAN...

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा ( Guruparnima chandra grahan ) के दिन साल 2019 का दूसरा चंद्रग्रहण 16 जुलाई को पड़ने वाला है। साथ ही इस दिन गुरु पूर्णिमा भी है। ग्रहण के दोषकाल वाले समय को सूतक कहा जाता है, जो ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है।

खंडग्रास चंद्रग्रहण रात 1:31 से शुरू होकर 17 जुलाई सुबह 4:31 बजे तक रहेगा। इस क्रम में चंद्रग्रहण के नौ घंटे पूर्व 16 जुलाई को सूतक लगने के कारण शाम 4:30 से मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे।

ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां ज्यादा हावी रहती हैं, जिनसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ग्रहण के दौरान भूलकर भी ये 8 काम नहीं करने चाहिए। नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं…


भगवान की मूर्ति न छुएं :
सूतक काल से लेकर ग्रहण खत्म होने तक किसी भी भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण के दौरान भगवान का मन में ध्यान करना चाहिए। ध्यान रखें कि भगवान को भी ग्रहण के दर्शन ना हों। क्योंकि मंदिर के कपाट भी बंद हो जाते हैं।

Astrology

खान पान में संयम रखें :
सूतक काल से ग्रहण खत्म होने तक बाहर खाना-पीना नहीं चाहिए। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति कोई भी आपको कुछ भी खाने को दे तो नहीं लेना चाहिए। ग्रहण के दौरान कई लोग टोना-टोटका करते हैं। अगर कोई भी चीज दे तो उसकी जानकारी अपने घर पर जरूर दें। साथ ही इस दिन मांस-मदिरा और शराब के सेवन से करना नहीं चाहिए।


गर्भवती महिलाओं के लिए खास :
चंद्रग्रहण में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की छाया से भी दूर रहना चाहिए क्योंकि ग्रहण की छाया का कुप्रभाव से गर्भस्थ शिशु पर पड़ने का डर रहता है, जो बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं एक नारियल हमेशा पास रखें और उसे अपने पास ही रखकर सोएं।

शारीरिक संबंध से दूर रहें :
ग्रहण के दौरान स्त्री-पुरुष प्रसंग से बचना चाहिए। इस दौरान संबंध बनाना अशुभ और परलोक में कष्टकारी माना गया है। इस समय गर्भधारण से संतान पर बुरा प्रभाव पड़ता है, ऐसा शास्त्रों का मत है। इस समय शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाए रखना चाहिए।

अपमान ना करें.
सूतक काल से ही ध्यान रखें कि किसी भी गरीब व असहाय व्यक्ति या फिर अपने मां-बाप का अपमान ना करें। संभव हो तो इनकी मदद करें और इसको अपनी आदत बना लें। शास्त्रों में बताया गया है कि गरीब व असहाय का अपमान करने पर शनिदेव की बुरी नजर उस पर पड़ती है।

यहां न जाएं.
ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्ति बहुत हावी रहती हैं, इस दौरान इनकी शक्तियां बढ़ जाती हैं। यह शक्तियां किसी को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। बेहतर होगा कि ग्रहण के दौरान किसी भी सुनसान या श्मशान जैसी जगहों से जाने से बचें। ग्रहण के दौरान घर पर ही पूजा करें।

ये कार्य न करें.
सूतक काल से ही कोई भी शुभ कार्य करने से बचें, अन्यथा वह कार्य आपके लिए अशुभ बन सकते हैं। साथ ही इस दौरान बाल और नाखून काटने से भी बचें, वहीं सिलाई-कढ़ाई, भोजन पकाना और खाना आदि कार्य नहीं करने चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि नहीं आती है।

टकराव से बचें.
ग्रहण के दिन घर में या बाहर किसी भी तरह के वाद-विवाद से बचना चाहिए, इससे घर का माहौल भी खराब रहता है। साथ ही घर में अशांति रहने से पितृगण की कृपा नहीं मिलती है। ग्रहण के दिन पितृगणों का ध्‍यान करें और उनका नाम लेकर कुछ दान करें।

चंद्रग्रहण के समय ये करें : Do on chandra Grahan...

: प्राणायाम और व्यायाम करना चाहिए।
: चंद्र देव की आराधना करना चाहिए।
: चंद्र मंत्र “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात् ” का जप करें।
: चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।
: स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और उनकी पूजा करें।
: ग्रहण समाप्त होने पर ताजा भोजन बनाएँ और खाएं। याद रखें अगर भोजन पहले से बना हुआ है तो ग्रहण से पूर्व उसमें तुलसी डाल दें ताकि वह भोजन दूषित न हो।
: चंद्रग्रहण के बाद जरुरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मणों को अनाज का दान करें।

horoscope

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस ग्रहण से कुछ राशियों के लोगों पर शुभ प्रभाव पड़ेगा और कुछ राशियों पर अशुभ।

ग्रहण का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा : Effects on rashi zodiac sign…

1. मेष राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Aries :
मेष राशि के लिए यह ग्रहण मिश्रित फलदायी होगा। इस दौरान आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाद-विवाद से बचें। हालांकि आपको कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी और लाभ मिलेगा।

2. वृषभ राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Tauras :
वृषभ राशि के लिए भी यह ग्रहण मध्यम फलदायी होगा। इस दौरान आपको संतान के भविष्य को लेकर चिंता हो सकती है। आपको बनते कामों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। शेयर निवेश के जोखिम से बचें।

3. मिथुन राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Gemini :
चंद्रग्रहण के प्रभाव से मिथुन राशि को लाभ होगा। शत्रुभय से मुक्ति मिलेगी और नौकरी पेशा लोगों को प्रमोशन की संभावना है। व्यर्थ के खर्च से बचें। साझेदारी के काम में नुकसान हो सकता है।

राशियों की किस्मत

4. कर्क राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Cancer :
आपके लिए यह ग्रहण शुभ संकेत लेकर नहीं आ रहा है। इस दौरान दांपत्य जीवन में आपको सुधार की बहुत जरूरत है। आपको धन के मामले में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

5. सिंह राशिफल / GRAHAN EFFECTS ON Leo :
यह चंद्रग्रहण आपके लिए प्रतिकूल फलदायी रहेगा। स्वास्थ्य में उतार-चढाव की स्थिति हो सकती है।। दुर्घटना के प्रति भी आपको सजग रहने की जरूरत है। गुप्तरोग की शिकायत हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

6. कन्या राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Virgo :
ग्रहण संकेत दे रहा है कि आपको व्यर्थ के खर्च से बचना जरूरी है। अपना व्यवहार संयमित रखें नहीं तो मान हानि हो सकती है। साथ ही आपके कार्यों में विलंब देखने को मिलेगा।

7. तुला राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Libra :
चंद्रग्रहण आपके लिए फायेदमंद वाला होगा। इस दौरान आपके सभी कार्य पूरे होंगे और धन लाभ भी होगा। आपको शुभ समाचार की प्राप्ति भी हो सकती है। आपके कार्य की प्रशंसा हो सकती है।

8. वृश्चिक राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Scorpio :
यह चंद्रग्रहण आपको मिलाजुला परिणाम देगा। धन की प्राप्ति होगी लेकिन खर्च भी खूब होगा, जिससे बचत में कमी आएगी। आपके सभी कार्य योजनानुसार संपन्न होंगे।


9. धनु राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Sagittarius :
यह ग्रहण आपकी राशि में हो रहा है। यह ग्रहण आपके लिए मिश्रित फलदायी होगा। इस दौरान आपको व्यवसाय में ध्यान देना होगा। शेयर-सट्टे से दूर रहें अन्यथा धन की हानि हो सकती है।


10. मकर राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Capricorn :
पारिवारिक जीवन के मामले में यह ग्रहण शुभ फलदायी नहीं दिख रहा है। इस दौरान आप वाहन से दूर रहें अन्यथा चोट लगने की आशंका है। साथ ही अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें।


11. कुंभ राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Aquarius :
चंद्रग्रहण आपके लिए अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। आपको आर्थिक क्षेत्र में जोखिम से बचना चाहिए नुकसान हो सकता है। घर का माहौल सही रहे, इसका ध्यान रखें। परिजनों के साथ मनमुटाव होने की आशंका है।


12. मीन राशि फल / GRAHAN EFFECTS ON Pisces :
ग्रहण आपके लिए कई लाभ लेकर आ रहा है। आपको प्रिय व्यक्ति का साथ मिलेगा। शेयर में निवेश भी कर सकते हैं, लाभ होगा। मेहनत के अनुपात में लाभ अवश्य प्राप्त होगा। सामाजिक व आर्थिक रूप से सम्मान प्राप्त होगा।

guru purnima 2019

गुरु पूर्णिमा 2019 : GURU PURNIMA
वहीं दूसरी ओर इस वर्ष 16 जुलाई यानि मंगलवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व पड़ेगा। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। साधारण भाषा में गुरु वह व्यक्ति हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा मुहूर्त : Guru Purnima muhurat
1. गुरु पूजा और श्री व्यास पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि को सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक व्याप्त होना आवश्यक है।
2. यदि पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तो यह पर्व पहले दिन मनाया जाता है।

guru puja

गुरु पूजन विधि : Guru puja vidhi
1. इस दिन प्रातःकाल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों को करके उत्तम और शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
2. फिर व्यास जी के चित्र को सुगन्धित फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए। उन्हें ऊँचे सुसज्जित आसन पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए।
3. इसके बाद वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर कुछ दक्षिणा यथासामर्थ्य धन के रूप में भेंट करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा महत्व
पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था; ऐसी मान्यता है।

वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी।

धर्म में रुचि कम होने के कारण मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बांट दिया जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति रखने वाले लोग भी वेदों का अध्ययन करके लाभ उठा सकें।

व्यास जी ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बाँटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

वेदों में मौजूद ज्ञान अत्यंत रहस्यमयी और मुश्किल होने के कारण ही वेद व्यास जी ने पुराणों की रचना पाँचवे वेद के रूप में की, जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक किस्से-कहानियों के रूप में समझाया गया है। पुराणों का ज्ञान उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को दिया।

व्यास जी के शिष्यों ने अपनी बुद्धि बल के अनुसार उन वेदों को अनेक शाखाओं और उप-शाखाओं में बाँट दिया। महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना भी की थी। वे हमारे आदि-गुरु माने जाते हैं। गुरु पूर्णिमा का यह प्रसिद्ध त्यौहार व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

1. इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु परिवार में जो भी बड़ा है अर्थात माता-पिता, भाई-बहन, आदि को भी गुरु तुल्य समझना चाहिए।
2. गुरु की कृपा से ही विद्यार्थी को विद्या आती है। उसके हृद्य का अज्ञान व अन्धकार दूर होता है।
3. गुरु का आशीर्वाद ही प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगल करने वाला होता है। संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है।
4. गुरु से मन्त्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
5. इस दिन गुरुजनों की यथा संभव सेवा करने का बहुत महत्व है।
6. इसलिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक जरूर मनाना चाहिए।

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