लाइफ स्टाइल में करें बदलाव, हाइपर एक्टिविटी बना सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस का शिकार

लाइफ स्टाइल में करें बदलाव, हाइपर एक्टिविटी बना सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस का शिकार
लाइफ स्टाइल में करें बदलाव, हाइपर एक्टिविटी बना सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस का शिकार

hitesh sharma | Publish: Oct, 06 2019 01:16:13 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

'मल्टीपल स्क्लेरोसिस' पर योग थैरेपिस्ट डॉ. आरएच लता की लिखी पुस्तक का विमोचन

भोपाल। असाध्य बीमारी 'मल्टीपल स्क्लेरोसिस' पर योग थैरेपिस्ट डॉ. आरएच लता की लिखी किताब का शनिवार को एमपी नगर स्थित एक निजी होटल में विमोचन हुआ। यह किताब उन्होंने अपने 22 वर्षों के अनुभव के आधार पर लिखी है। डॉ. लता का कहना है ये बीमारी 15 से 50 साल एज ग्रुप के ऐसे लोगों को होती है जो बहुत महत्वकांशी है और हाइपर एक्टिव हैं। ऐसे लोग खुद को टाइम लाइन में बांध लेते हैं। एक ही समय में कई काम करना चाहते हैं। मैंने 22 साल के दौरान 14 ऐसे मरीजों का इलाज किया है। यह बीमारी इंसान के नर्व सिस्टम पर प्रहार करती है। हालांकि इसके ज्यादातर मामले यूरोप में सामने आए हैं, लेकिन अब ये इंडिया में भी बढ़ रहा है। ये बीमारी महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा जल्दी होती है।

 

टाइप-ए के लोगों को ज्यादा खतरा

स्वास्थ्य विभाग के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉ. केके टस्सू ने बताया कि जो लोग अपने हर काम को जल्दी-जल्दी करना चाहते हैं, उन्हें टाइप-ए कैटेगरी में रखा जाता है। इस बीमारी में दिमाग शरीर के अन्य अंगों को संकेत भेजता तो है, लेकिन अन्य अंग उसे रिसिव नहीं कर पाते। एक तरह से उनका ब्रेन से संपर्क टूट जाता है। ऐसे में व्यक्ति की स्थित लकवे जैसी हो जाती है। कभी उसे दिखाई कम देता है तो कभी हाथ-पैर काम नहीं करते, शरीर में जकडऩ आ जाती है। ऐलोपैथी में अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है। इसके होने के कारणों का भी अभी तक पता नहीं चला पाया। पूरी जिंदगी के लिए आदमी लाचार हो जाता है। डॉ. लता ने बताया कि लाइफ स्टाइल में बदलाव कर इससे बचा जा सकता है। योग, मेडिटेशन, प्राणायम से पीडि़त व्यक्ति को काफी हद तक रिलिफ मिलता है। मैंने लोगों को इस बीमारी के प्रति अवेयर करने के लिए यह बुक लिखी है। कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र ओझा तथा आभार प्रदर्शन जीके छिब्बर ने किया।

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