मास्टर प्लान में बदलाव के बाद अब इन परिणामों को भोगने को रहें तैयार!

राजधानी के मास्टर प्लान में रहवासियों को ट्रैफिक जाम से निजात मिलना मुश्किल ही है।

By: दीपेश तिवारी

Updated: 11 Sep 2017, 11:08 AM IST

भोपाल। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अफसरों ने रहवासी क्षेत्र में हॉस्पिटल खोलने के नाम पर पिछले दरवाजे से बड़ा खेल किया है। इन्होंने भोपाल मास्टर प्लान 2005 के नियम 4.52 (2) घ को हटा दिया है। ये एेसा बदलाव है, जिससे शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ ही रहवासी व मिक्स यूज वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही से ट्रैफिक जाम होगा। ये बदलाव एक तरफ आमजन कष्टकारी साबित होंगे, वहीं बडे़ उद्योगपति, कारोबारियों को राहत देगा।

ग्राउंड कवरेज 15 प्रतिशत बढ़ाया : गोडाउन बनाने के लिए 2005 के प्लान में प्लॉट एरिया का 25 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज का नियम बनाया था। इसे बदलकर 40 प्रतिशत कर दिया।

यानी पहले की अपेक्षा 15 फीसदी बड़ा वेयर हाउस, गोडाउन बनाया जा सकेगा। एफएआर भी डेढ़ के करीब दिया है, पहले ये सवा ही था।

डायरेक्टर संदीप यादव ने नहीं दिए इन सवालों के जवाब-
1. मास्टर प्लान को टुकड़े-टुकड़े में क्यों लाया जा रहा है?
2. क्या कारण है कि ड्राफ्ट तैयार है, फिर भी उसे जारी नहीं किया जा रहा?
3. कौन रसूखदार हैं जो पूरा प्लान आने पर प्रभावित हो रहे हैं?

गलियों व वन-वे क्षेत्र में गोडाउन को हरीझंडी...
प्लान 2005 की कंडिका 4.52 (2) घ को हटाकर वेयरहाउसिंग, गोडाउन, स्टोरेज एरिया को वन वे पर शुरू करने की छूट दे दी है। नियम को हटाने के बाद वन-वे व गलियों में कोई भी आसानी से मिक्स यूज के तहत गोडाउन, स्टोरेज एरिया, वेयरहाउस खोल सकेगा। इससे रहवासी क्षेत्र, शहर के बाजारों व गलियों में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाएगी।

ट्रैफिक प्रबंधन को बनाया आधार-
मास्टर प्लान में स्पष्ट लिखा है कि कंडिका 4.52 को ट्रैफिक का अध्ययन व ट्रैफिक प्रबंधन के तरीकों के आधार पर बनाया था। इसका मकसद पदयात्रियों को गलियों व वन-वे पर ट्रैफिक फ्री स्थिति मिले। इसके लिए उन्होंने कुछ उपाय सुझाए थे।

वन-वे व गलियों में पदयात्रियों समेत ट्रैफिक का ध्यान रखते हुए इसमें स्पष्ट दर्ज किया था कि यदि किसी क्षेत्र या गली में मिक्स यूज के तौर पर अनुमति की स्थिति बने तो वहां ग्राउड फ्लोर पर २५त्न कवरेज या 50 वर्गमीटर इनमें से जो कम हो लागू किया। साथ ही भवन सामग्री, रिपेयर शॉप जैसे ऑटोमोबाइल रियरिंग वर्कशॉप, फ्लोर मिल, फेब्रिकेशन, वेल्डिंग, स्टोरेज, गोडाउन, वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स समेत जंक शॉप को पूर्णत: प्रतिबंधित किया था।

 

 

जो बदलाव किए हैं, वे अंतिम नहीं हैं। जो आपत्तियां आएंगी, उस आधार पर ही अंतिम रूप दिया जाएगा। बदलाव जरूरत पर भी किए जाएंगे।
- मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन व आवास पर्यावरण

तो चुनाव के बाद ही आएगा भोपाल का मास्टर प्लान 2031 :-

भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की धूल संभवत: अब चुनावों के बाद ही हटाई जाए। स्मार्ट सिटी से लेकर मेट्रो ट्रेन डीपीआर और बड़े तालाब को बचाने वाली सेप्ट की रिपोर्ट से अपडेट हो चुके भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 पर डायरेक्टोरेट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में बीते पांच माह से कोई चर्चा या समीक्षा नहीं हुई।

इस ड्राफ्ट को तैयार करने वाले तक हैरत में हैं कि इसे क्यों रोक रखा है। यदि अभी मास्टर प्लान ड्राफ्ट जारी किया जाता है, तो आपत्तियां आमंत्रित करने, उनकी सुनवाई करने और अंतिम स्वरूप देकर लागू करने में कम से कम चार माह का समय लगेगा। यानी जनवरी 2018 तक ये लागू हो पाएगा। मार्च-अप्रैल 2018 के बाद सरकार व उसके विभाग पूरी तरह से चुनावी मूड में होंगे और एेसे में इसका जारी होना मुश्किल है।

बीडीए के पूर्व चीफ आर्किटेक्ट अवनीश सक्सेना का कहना है कि यदि अभी एक से दो माह में ही ये ड्राफ्ट जारी हो जाता है तो 2018 की पहली तिमाही से लोगों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। अब ये 2019 के बाद ही जारी होकर लागू हो पाएगा।

2012 में भी बनी थी एेसी स्थिति :

भोपाल मास्टर प्लान 2031 का ड्राफ्ट 2012 में तत्कालीन संचालक टीएंडसीपी केसी गुप्ता ने पूरी तरह से तैयार करा लिया था। तत्कालीन संयुक्त संचालक वीपी कुलश्रेष्ठ और संचालक गुप्ता ने मिलकर अलग-अलग वर्गों से इसके लिए बैठक भी कर ली थी। अक्टूबर 2012 को ड्राफ्ट जारी करना था, लेकिन नहीं हुआ। विधानसभा, लोकसभा और निगम के चुनावों की वजह से अटका ड्राफ्ट अब तक जारी नहीं हो पाया। डायरेक्टर टीएंडसीपी संदीप यादव से जब मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

 

ये होगा लाभ -
— शहर की आबादी की सघनता के आधार पर निर्माण में नए एफएआर तय होंगे, जिससे ऊंचे भवन बनाने वालों को लाभ होगा।
— शहर को 20 से अधिक नई मास्टर प्लान रोड मिल जाएंगी।
— बड़ा तालाब को राहत मिलेगी, इसके कैचमेंट और एफटीएल से निर्माण की दूरी के नए नियम रहेंगे।
—नए बाजार क्षेत्र घोषित होंगे, जिससे व्यापारियों को नजूल और निगम की अनुमति के बीच परेशान नहीं होना पड़ेगा।
- शहर के उपेक्षित क्षेत्रों में विकास की नई राह खुल सकती है

इसलिए हुई देरी-
— 2012 में तालाब के कैचमेंट को अलग भू उपयोग बनाकर प्लान में दर्ज करने से देरी हुई।
— इसके बाद तालाब पर सेप्ट की रिपोर्ट बनने का इंतजार किया, ताकि उसे प्लान में शामिल करें।
— मेट्रो की नई डीपीआर का काम शुरू हुआ तो 2014 के बाद इसके रूट को प्लान में शामिल करने के लिए इंतजार किया गया।
— केंद्र में नई सरकार के साथ स्मार्टसिटी का प्रोजेक्ट आया। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार हुई, जिसके लिए प्लान में प्रावधान किए गए।
(नोट- जैसा की टीएंडसीपी के अफसरों ने बताया।)

दीपेश तिवारी
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