चाणक्य के अनुसार इन 5 के बीच में से कभी नहीं निकलना चाहिए

चाणक्य के अनुसार इन 5 के बीच में से कभी नहीं निकलना चाहिए
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Nitesh Tiwari | Publish: Apr, 14 2016 04:44:00 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

चाणक्य की इन्हीं नीतियों में से एक नीति में ये बताया गया है कि हमें किन लोगों या चीजों के बीच में से नहीं निकलना चाहिए…


चाणक्य की स्वीकार्यता लोगों में बहुत अधिक है। कई बार इनकी नीतियों का पालन करके लोग परेशानियों से बच जाते हैं। चाणक्य की इन्हीं नीतियों में से एक नीति में ये बताया गया है कि हमें किन लोगों या चीजों के बीच में से नहीं निकलना चाहिए…


दो ज्ञानी लोगों के बीच से
जब दो ज्ञानी लोग बात कर रहे हों तो उनके बीच में से निकलना नहीं चाहिए। क्योंकि जब वो मिलते हैं तो ज्ञान की बात करते हैं। ऐसे वक़्त में उनकी बातचीत में बाधा उत्पन्न नहीं करना चाहिए।


अग्नि और ब्राह्मण 
चाणक्य ने कहा है कि यदि किसी स्थान पर कोई ब्राह्मण अग्नि के पास बैठा हो तो इन दोनों के बीच में से भी नहीं निकलना चाहिए। ऐसा करके हम उसके पूजा में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। हो सकता है कि वह ब्राह्मण हवन या यज्ञ कर रहा हो और हमारी वजह से उसका पूजन अधूरा रह सकता है।

मालिक और नौकर
जब मालिक (स्वामी)और सेवक बातचीत कर रहे हों तो उनके बीच में से भी निकलना नहीं चाहिए। ऐसे में हम उनके बीच हो रहे संवाद के बीच में अड़चन पैदा कर देते हैं।

हल और बैल
कहीं हल और बैल, एक साथ दिखाई दें तो उनके बीच में से नहीं निकलना चाहिए।


पति और पत्नी
चाणक्य के अनुसार यदि किसी जगह पर कोई पति-पत्नी खड़े हों या बैठे हों तो उसके बीच में नहीं निकलना चाहिए। यह अनुचित माना गया है।


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