एमपीपीएससी विवाद पर मुख्यमंत्री नाराज, आज मिलेंगे अध्यक्ष

- कमलनाथ नाराज, अध्यक्ष रखेंगे अपना पक्ष

By: anil chaudhary

Published: 15 Jan 2020, 05:12 AM IST

भोपाल. राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में भील समाज को आपराधिक प्रवृत्ति का बताने पर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इससे बेहद नाराज हुए। इसके चलते एमपीपीएससी के भास्कर चौबे को हटाने की तैयारी हो गई थी, लेकिन जब नियम खंगाले गए तो पाया गया कि इसके लिए महाभियोग लाना होगा। इन पेचीदगियों के कारण सरकार ने अध्यक्ष को हटाने का इरादा फिलहाल बदल दिया। अब इस मामले में चौबे बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। मुलाकात में वे अपना पक्ष और अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा रख सकते हैं।
दरअसल, एमपीपीएससी की 2020 के पहले की भर्ती परीक्षाओं में भी विवाद होता रहा है। विधानसभा में भी इसका मुद्दा उठ चुका है। इससे पहले स्टेट सिविल सर्विस एक्जाम 2019 का ताजा विवाद है, जिसमें आयु की गणना एक जनवरी 2019 से की गई थी, जबकि विज्ञापन दिसंबर 2019 में निकला था। बाद में सरकार को उम्र की गणना एक जनवरी 2020 से करने का संशोधन करना पड़ा।
- चुनिंदा विवादों पर एक नजर
स्टेट सर्विस एक्जाम 2019 के विज्ञापन में आयु सीमा का विवाद। इसमें आयु की गणना 1 जनवरी 2019 से की गई थी। विवाद होने पर बाद में एक साल आयु सीमा बढ़ाई गई।
2018 की भर्ती पर विवाद छाया था। इसमें गलत भर्तियों की शिकायतें। लंबे समय तक पदस्थापना रोकी गई। खूब आंदोलन हुए, फिर पदस्थापनाएं हुईं।
भाजपा सरकार के समय हुई अन्य भर्तियों पर भी विवाद का साया रहा। विधानसभा में भी कई बार कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया था। इसमें आवेदन ही गलत होने पर भी नियुक्तियां हुई थीं। इस पर खूब बवाल हुआ था।
2016 में स्टेट सिविल सर्विस एक्जाम में भी 255 पदों पर भर्ती के समय विवाद छाया था। तब, पीएससी ने कई आवेदन रद्द किए थे। बाद में नियमों पर भी विवाद हुआ।
2016 की सर्विस एक्जाम में परीक्षार्थियों से परीक्षा केंद्र पर मंगलसूत्र व कलावा उतरवाने पर जमकर बवाल मचा। बाद की परीक्षाओं में भी परीक्षा केंद्रों पर तलाशी को लेकर जब-तब विवाद गहराते रहे।

- पेपर सेटर और मॉडरेटर को नोटिस, रेणु पंत को छोड़ा
एमपीपीएससी की सचिव रेणु पंत को फिलहाल सरकार नहीं हटा रही है। मामले में पेपर सेटर व मॉडरेटर को नोटिस दिया गया है। इसके अलावा जांच भी बैठा दी गई है। इस कारण फिलहाल सचिव को नहीं हटाया जा रहा है। हालांकि, आगे की कार्रवाई सीएम के निर्देश के हिसाब से अध्यक्ष की मुलाकात के बाद तय होगी।

- ये है मौजूदा विवाद
राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में भील समुदाय को लेकर पूछे गए सवाल के गद्यांश में विवादित अंश है। इसमें भील समुदाय आपराधिक प्रवृत्ति का, शराब के अथाह सागर में डूबने वाला व अन्य अनैतिक काम करने वाला बताया गया था। इस पर भील समुदाय व आदिवासी नेताओं ने भारी नाराजगी जाहिर की थी।

- मॉडल ऑन्सरशीट से हटाए विवादित सवाल
एमपीपीएससी ने मंगलवार शाम को विवादित सवालों को मॉडल ऑन्सरशीट से हटा दिया है। भील जनजाति पर आपत्तिजनक टिप्पणी वाले गद्यांश को भी हटा दिया है। इस गद्यांश से जुड़े पांच सवाल पेपर में पूछे गए थे। अब दूसरे सत्र के पेपर में ए सैट में प्रश्न क्रमांक 86 से 90, बी सैट में 91 से 95, सी सैट में 96 से 100 और डी सैट में 81 से 85 नंबर तक के सवालों को हटाकर मूल्यांकन होगा।

- 390 अंकों से होगा मूल्यांकन
दोनों सत्र के पेपर में 2-2 अंक के 100-100 सवाल पूछे गए थे। पांच सवाल हटाए जाने के बाद अब तक की स्थिति में 400 की जगह 390 अंकों से मूल्यांकन होगा। हालांकि, मॉडल ऑन्सरशीट जारी होने के बाद अन्य सवालों पर भी आपत्तियां बुलाई जाएगी।

anil chaudhary Desk
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