मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लिखा ब्लॉग

केन्द्र सरकार के अविवेकपूर्ण आर्थिक निर्णय और प्रदेश भाजपा नेताओं की मौन सहमति : कमलनाथ

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भोपाल : प्रदेश वासियों, आप लोगों ने जब मुझे प्रदेश का मुखिया होने का दायित्व दिया तब मैंने पाया था कि केन्द्र सरकार और पूर्ववर्ती प्रदेश भाजपा सरकार के अविवेकपूर्ण आर्थिक निर्णयों की वजह से प्रदेश गम्भीर आर्थिक कठिनाइयों में फंस गया है। आज मैं आपसे एक विशेष उद्देश्य को लेकर संवाद स्थापित कर रहा हूं। बीते दिनों केन्द्र की सरकार ने देश का बजट जारी किया है जिसे देखने के बाद इस बात का साफ आभास हो रहा है कि केन्द्रीय सरकार के अपरिपक्व आर्थिक निर्णयों ने समूचे देश को बेहद गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है, जिसका खामियाजा प्रदेश को भी भुगतना पड़ रहा है।

देश की घटती जीडीपी वृद्धि दर :
ऐसा 23 वर्षों बाद हुआ है कि लगातार 6 त्रैमास से देश की जीडीपी वृद्धि दर गिर रही है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के प्रथम त्रैमास में वास्तविक जी.डी.पी. वृद्धि दर 7.95 प्रतिशत थी, जो लगातार गिरते हुए 2018-19 के द्वितीय त्रैमासमें 7 प्रतिशत, तृतीय त्रैमास में 6.58 प्रतिशत, चौथे में 5.83 प्रतिशत, 2019-20 के प्रथम त्रैमास में 5.01 प्रतिशत और अब 2019-20 के द्वितीय त्रैमास में 4.5 प्रतिशतरह गई ।वर्ष 2018-19 की जीडीपी वृद्धि दर पूर्व में 6.8 प्रतिशत अनुुमानित थी, जिसका अनुमान घटाकर अब 6.1 प्रतिशत कर दिया गया है। 2019-20 में तो देश की वृद्धि दर मात्र 5 प्रतिशत अनुमानित है जो कि केंद्र सरकार की नीतियों का देश की अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव परिलक्षित करती है।

प्रदेश के साथ केन्द्र का विश्वासघात:
मध्यप्रदेश की भी कई बड़ी योजनाओं में केन्द्र सरकार द्वारा बहुत कम प्रदान की गई है जिससे प्रदेश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की संभावना है। जैसे-स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) में अब तक 20.7 प्रतिशत ही राशि केन्द्रीय हिस्से की प्रदान की गई है। हाउसिंग फॉर ऑल में 8.5 प्रतिशत, विशेष पिछड़ी जन-जातियों के विकास में 58 प्रतिशत, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन 44.87 प्रतिशत, नि:शक्तजनों के लिए बाधा रहित वातावरण 19 प्रतिशत, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान 42 प्रतिशत, किशोरी बालिका योजना 28 प्रतिशत, समेकित बाल संरक्षण योजना 53 प्रतिशत, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना 49 प्रतिशत, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 57 प्रतिशत, अर्थात् कुल मिलाकर 31 जनवरी 2019 तक केन्द्र सरकार ने प्रदेश के विभिन्न विकास की योजनाओं में केन्द्र से प्राप्तियोग्य धनराशि में से रुपये 5061 करोड़ कम दिये हैं।

पचास वर्षों में सबसे कम केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी :
केन्द्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के वोट ऑन अकाउन्ट में केन्द्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 63750 करोड़ रुपये निर्धारित की थी, जिसे मुख्य बजट 2019-20 में घटाकर रूपये 61073 करोड़ कर दिया गया। जिसे पुन: पुनरीक्षित अनुमान 2019-20 में रुपये 53960 करोड़ कर दिया गया और अन्तत: पूर्व वर्ष की राशियों को समायोजित करते हुए वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु राज्य की केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी को रुपये 49517 करोड़ किया गया है। अर्थात् केन्द्रीय करों के हिस्से में से मध्यप्रदेश के रुपये 14233 करोड़ कम किये गये। बीते 50 वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि केन्द्रीय करों में से राज्यों की हिस्सेदारी को इतना कम किया गया है।

अन्तत:, मैं प्रतिबद्ध हूँ कि हर ऐसी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ, जो मध्यप्रदेश के सम्मुख आएंगी, उन्हें अवसरों में तब्दील कर दूँगा। मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा होने से कोई नहीं रोक सकता।

आपका
कमलनाथ
मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

mp kamalnath
Arun Tiwari Reporting
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