स्ट्रीट लाइट में कंपनियों की रुचि नहीं.. देखें पूरा मामला!

तीसरी बार सेंट्रलाइज टेंडर जारी

By: योगेंद्र Sen

Published: 25 Apr 2018, 10:30 AM IST

भोपाल। प्रदेश सरकार नगर निगमों में पीपीपी मोड पर स्ट्रीट लाइट लगाना चाहती है, लेकिन इसमें निजी कंपनियां रुचि नहीं ले रही हैं। सागर और छतरपुर नगर निगम में लाइट लगाने के लिए दो बार टेंडर जारी किए जा चुके हैं। अब एक बार फिर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के माध्यम से सागर, छतरपुर, उज्जैन और देवास के लिए सेंट्रलाइज टेंडर जारी किए गए हैं। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों का वर्ष 2017 तक 7740.48 लाख रुपए बिजली बिल बकाया है। कई बार बिजली कंपनियां लाखों रुपए का सरचार्ज भी लगा देती हैं। इससे बचने के लिए पीपीपी मोड पर काम होना है।

निरीक्षण करने बनेगी टीम

स्ट्रीट लाइट का निरक्षण करने के लिए नगर निगम स्तर पर निरीक्षण दल बनाया जाएगा। यह दल नए क्षेत्रों में एलईडी लगाने के लिए भी कंपनी को रिकमंड करेगा।

यह है शर्त

सरकार ने पीपीपी मोड से 45 फीसदी बिजली बचाने की शर्त रखी है। यह राशि कंपनियों के खाते में जाएगी। इससे ऊपर जो बिल कम होगा, उसमें 60 फीसदी राशि नगर निगमों और 40 फीसदी कंपनियों को सात साल तक दी जाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि निजी कंपनियों को शर्तों क मामले में कुछ भ्रम था, जो दूर कर दिया है।

मेंटेनेंस नहीं तो करार निरस्त

नगरीय निकायों में लगाई जाने वाली ेस्ट्रीट लाइट का ठीक से मेंटेनेंस नहीं करने और कॉलोनियों में अकारण बिजली गुल होने पर बिजली कंपनियों का करार निरस्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं उन पर पेनल्टी भी लगाई जा सकेगी। ऐसा माना जा रहा है कि निजी कंपनियों को यह शर्त भी उचित नहीं लगी।

इंदौर में सौ करोड़ रुपए का बिल

इंदौर नगर निगम का 20 साल पुराना बिजली का बिल 100 करोड़ रुपए हो गया था। यह बिल बकाया होने के कारण विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली कनेक्शन काट दिया था। अब यह बिल नगरीय प्रशासन विभाग पांच करोड़ रुपए मासिक किस्त में जमा कर रहा है।

कंपनियों को बुलाकर विभाग का प्लान समझा दिया है। सेंट्रलाइज टेंडर में कुछ कंपनियों ने हिस्सा लिया है। टेंडर इसी माह खोले जाएंगे।
-प्रभाकांत कटारे, ईएनसी, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग

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योगेंद्र Sen Reporting
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